ब्लॉगसेतु

Yashoda Agrawal
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हाँमैं प्रवासी हूँशायद इसी लिएजानता हूँकि मेरे देश कीमाटी मेंउगते हैं रिश्ते*बढ़ते हैंप्यार की धूप मेंजिन्हें बाँध करहम साथ ले जाते हैंधरोहर की तरहऔर पोसते हैं उनकोकलेजे से लगाकर*क्योंकि घर के बाहरहमें धन, वैभव,यश और सम्मानसब मिलता है,नहीं मिलती तोरिश्तों कीवो गुड़...
Yashoda Agrawal
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आज रात चाँदज़रा देर सेखिड़की पर आयाथा भी कुछ अनमना सापूछा .... तो कुछ बोला नहींशायद उसने सुना नहींया फिर अनसुनी कीराम जाने....लेकिन ये तो तय हैथा उदास, चेहरा भीकुछ पीला पीला सा ही लगायूँ ही थोड़ी देरइधर उधर पहलू बदलतेबादलों की ओट मेंछुपते छुपातेन जाने कबचुपके से नी...
Yashoda Agrawal
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प्यार है तो जताया भी करो दर्द है तो बताया भी करो रूठे हुओं को मनाया भी करो जज़्बात छिपाये तो टीस उठेगी छिपाने की जगह दिखाया भी करो ज्यादा दिन दूर रहने से दूरियां बढ़ जाती हैं कभी कभी दोस्तों से मिल आया भी करो बिन मांगी सला...
 पोस्ट लेवल : इन्द्रा.वर्ड प्रेस
Yashoda Agrawal
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वह पूरे परिवार की जिंदगी का ताना बाना होती है घर भर के दुःख दर्द आँसू हँसी मुस्कान और रिश्ते... सब उसके आँचल की गांठ से बंधे उसकी डिग्री या बिना डिग्री वाली मगर गजब की स्किल्स के आस पास  जीवन की आंच में धीरे धीरे पकते रह...
Yashoda Agrawal
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मौत ने पूछाज़िंदगी एक छलावा हैएक झूठ हैहर दिन हर पल तुम्हारा साथ छोड़ती जाती हैफिर भी तुम उसे प्यार करते होमैं एक सच्चाई हूँ अंत तक तुम्हारा साथ निभाती हूँपर फिर भी तुम मुझसे नफरत करते होमुझसे डरते होमुझसे समझौता कर लोफिर कोई डर तुम्हें डरा न पायेगामैंने कहातुम सत्य...
 पोस्ट लेवल : इन्द्रा.वर्ड प्रेस
Yashoda Agrawal
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हवाओं की..  कोई सरहद नहीं होतीये तो सबकी हैं बेलौस बहा करती हैं**हवाएँ हैं, ये कब किसी से डरती हैंजहाँ भी चाहें बेख़ौफ़ चला करती हैं**चाहो तो कोशिश कर के देख लो मगरबड़ी ज़िद्दी हैं कहाँ किसी की सुनती हैं**हवाएँ न हों तो क़ायनात चल नहीं सकती इन्ही की इनायत...
Yashoda Agrawal
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लम्हे वो प्यार के जो जिए थे, वजह तुम थेख्वाब वो जन्नत के जो सजाये थे, वजह तुम थे दिल का करार तुम थे,रूह की पुकार तुम थेमेरे जीने की वजह तुम थेलबों पे हँसी थी जो , वजह तुम थेआँखों में नमी थी जो, वजह तुम थेरातों की नींद तुम थे,दिन का चैन तुम थेमांगी थी जो रब से...
Yashoda Agrawal
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कभी सोचता है उलझनों में घिरा मनक्या ठहर गया है वक्त ? नहीं,वक्त वैसे ही भाग रहा हैकुछ ठहरा है तो वो है मन,मन ही कर देता है कमअपनी गति कोऔर करता है महसूसठहरे हुए वक्त कोउसे नज़र आती हैं सारीजिज्ञासायें उसी वक्त में,सारीनिराशायें उसी वक्त मेंपर ठहरा हुआ मन अचानक-हो उ...
Yashoda Agrawal
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अक्सर सोचती हूँ... तुम्हे शब्दों में समेट लूँ या फिरबाँध दूँ ग़ज़ल में न हो तो ढाल दूँ गीत के स्वरों में ही मगर कहाँ हो पाता है तुम तो समय की तरह फिसल जाते हो मुट्ठी से...- मंजू मिश्रामूल रचना 
Yashoda Agrawal
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आज तुम इतनी बड़ी हो गयी हो कि मुझे तुम से सर उठा कर बात करनी पड़ती हैसच कहूं तो बहुत फ़ख्र महसूस करती हूँ जब तुम्हारे और मेरे रोल और सन्दर्भ बदले हुए देखती हूँ आज तुम्हारा हाथमेरे कांधे पर और कद थोड़ा निकलता हुआ&nbs...