ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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शून्य नभ से झाँकते तारों की पीड़ा,हिंद-हृदय सजाता अश्रुमाला आज, मूक स्मृतियों का सिसका खंडहर हूँ मैं, आलोक जगत में देख धधकते प्राण,चुप्पी साधे बिखरता वर्तमान हूँ मैं।कलुषित सौंदर्य हुआ,नहीं विचार सापेक्ष,जटिलताओं में झूलता भावबोध हूँ मैं,उत्थान की अभिलाषा...
विजय राजबली माथुर
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Hemant Kumar Jha09-02-2020 यह कैसा वैचारिक द्वैध या विभ्रम है जिसमें भारत का मध्य वर्ग उसी व्यवस्था को अपने कंधे पर उठाए है जो एक-एक कर उसका बहुत कुछ छीनती जा रही है और तय है कि ऐसा ही चलता रहा तो एक दिन इंसान होने का उसका हक भी छीन लिया जाएगा।पारंपरिक अवधारणा...
अनीता सैनी
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 उस मोड़ पर जहाँ  टूटने लगता है बदन छूटने लगता है हाथ देह और दुनिया से उस वक़्त उन कुछ ही पलों में उमड़ पड़ता है सैलाब यादों का  उस बवंडर में तैरते नज़र आते हैं अनुभव बटोही की तरह ...
Bharat Tiwari
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उन्हें विश्वास है कि दिल्ली में रहता हूँ इसलिए कवि हूँकविता का कुलीनतंत्र (5) — उमाशंकर सिंह परमार जब तक कवि अपनी जमीन में नहीं खड़ा होता तब तक वह अपनी परम्परा में नहीं जुड़ता न परम्परा का विकास करते हुए समकालीन होने की अर्हता हासिल करता हैसमकालीन कविता के कुली...
Bharat Tiwari
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बहुत से कवि ऐसे भी हैं जो न तो महानगरीय कुलीनता से मुक्त हुए न ही अपने जातीय सवर्णवादी संस्कारों से मुक्त हुए मगर अपने आपको "वाम" कहने का दुराग्रह भी रखते हैं। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).p...
Bharat Tiwari
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भाग-3: सत्ता और पूँजी के संरक्षण में विकसित जमीन से विस्थापित कविता का कुलीनतंत्र — उमाशंकर सिंह परमारयह समय विज्ञापन और प्रचार और समझौतों की राजनीति का हैजमीन में रहने वाले पद विहीन, पोजीशन विहीन, गाँव और कस्बे के एक्टिविस्ट लेखन को हासिए पर धकेलने के लिए "दिल्ली...
Bharat Tiwari
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साम्प्रदायिकता विरोध की एक अवधारणा है कि "हिन्दुत्व की बुराई करना" जो हिन्दुत्व की बुराई करेगा वही धर्मनिरपेक्ष है। यह उथली समझ है और दूसरे किस्म की साम्प्रदायिकता है। भाग-२: सत्ता और पूँजी के संरक्षण में विकसित जमीन से विस्थापित कविता का कुलीनतंत्र&nbsp...
Bharat Tiwari
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सत्ता और पूँजी के संरक्षण में विकसित जमीन से विस्थापित कविता का कुलीनतंत्र — उमाशंकर सिंह परमारमहानगरीय अभिजात्य कवियों को पढ़कर ऐसा प्रतीत होता है मानो किसी चकमें में उलझकर अचानक कविता में हाथ आजमाने के लिए उतर आए हों...(adsbygoogle = window.adsbygoogle || [])...
Tejas Poonia
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"कामदेव और रति की वर्तमान यात्रा" कॉलेज के दिनों में परवान चढ़ते नए नए प्यार कोजब नज़र लगती है तो वे प्रेमी जोड़े बदल लेते हैं रास्ते अपने यूनिवर्सिटियों में पनपने वालीमोहब्बतें अक्सर दगाबाज़ निकलती हैं।इनमें अक्सर कोई कामदेव बनता हैतो कोई...
ANITA LAGURI (ANU)
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तुम कवि हो ना,शब्दों  को आकारदेते हो,मैं  एक कड़वा  सच  हूँ सच को नंगा करना मेरी  आत्मसंतुष्टि  है ।तुम्हारे  विचारों के प्रबल वेग का कोई छोर नहीं ।और मैं ...... गंतव्य का भटका राही,तलाश-ए- मंज़िल ...