ब्लॉगसेतु

दीपक कुमार  भानरे
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 पोस्ट लेवल : वहम vaham
S.M. MAsoom
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हम को अल्लाह ने इंसान बनाया "अशरफुल मख्लूकात " का दर्जा दिया  लेकिन हम हैं कि जानवरों कि फितरत को ही अपनाने अपनी शान समझने लगे हैं.|  चलिए  आज किसी और की  बात ना कर के आप को मक्खी के बारे मैं बताता हूँ.|  मक्खी कि फितरत यह होती है क...
S.M. MAsoom
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अरब मैं जब इस्लाम आया था तो वहाँ ग़रीबी भी थी, जहालत भी थी. हज़रत मुहम्मद (स.अ.व) के किरदार  को उन लोगों ने इतना बुलंद देखा, कि ईमान ले आये, इस्लाम कुबूल कर लिया। इस्लाम हकीकत मैं किरदार की बुलंदी से फैला है और इस सुबूत यह है की हज़रत मुहम्मद (स.अ.व) ने एल...
S.M. MAsoom
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शक या वहम  एक बुरा रोग  है। अगर यह हो गया किसी को तो इसका इलाज हकीम लुकमान के पास भी नहीं है.  यह व्यक्ति को विवेकहीन बना देता है। शक से आपसी संबंधों में दरार  पैदा हो जाया करती है। समाज मैं एक दुसरे का संबंध भरोसे पर टिका होता है। इसे कायम...
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )http://www.livehindustan.com/news/editorial/subeditorial/article1-story-57-116-292305.htmlआज के हिंदुस्तान मे प्रकाशित यह सम्पाद्कीय एक बहुत महत्वपूर्ण...
ganga dhar sharma hindustan
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इतना मैं घर में तुम्हारे अहम हूँ ।ये तो नहीं की शिकार-ऐ-वहम हूँ ।जब भी सुना बस मेरा जिक्र था ।जिक्र ही से बन गया मैं अदम हूँ ।ओ! मेरे मिलते ही खुश होने वाले ।(क्या) मिलके भी अब मैं करता सितम हूँ।नज़र अब भी तलाशती तेरी किसको।जुल्म सहने को क्या मैं एक कम हूँ।उठ...