ब्लॉगसेतु

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हमने इंसान को बनते हुए पत्थर देखा |--डॉ. प्रेम जौनपुरीडॉ. प्रेमचंद्र विश्वकर्मा ( प्रेम जौनपुरी ) की  शक्सियत किसी तार्रुफ कि मोहताज नहीं | एक मशहूर गज़लकार के साथ साथ रीडर ,तिलकधारी विधि महाविद्यालय जौनपुर, डीन (अधिष्ठाता) विधि संकाय वी०बी०एस. पूर्वांचल विश्व...
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फूलों की खेती से जिले के किसान मालामाल हो रहे हैं। वह दौर अब बीते दिनों की बात हो चुकी है, जब किसान सिर्फ परंपरागत खेती तक सीमित थे। गेंदे, गुलाब व ग्लेडियोलस की खेती किसानों को खूब मुनाफा दे रही है। इसमें ग्लेडियोलस का नंबर अव्वल है। शायद यह बहुत कम लोग जानते...
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हिंदुस्तान में महिलाओं का नाम पुरुषों के पहले लेते हैं.कुलपति प्रो सुंदर लाल(News from the file 2013)औरत  अपने  स्त्रित्व  को पहचाने:डॉ वंदना , औरतों को खुद अपने विकास के लिए आगे आना होगा:तमन्ना फरीदीवीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय...
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आम एक ऐसा फल है जिसका नाम सुनते ही मुह में पानी आ जाता है | आम जो भारतीय सभ्यता और संस्कृति की पहचान है |इसे "कल्पवृक्ष" अर्थात् मनोवाछिंत फल देनेवाला भी कहते हैं |कालिदास ने इसका गुणगान किया है ,वेदों में आम को विलास का प्रतीक कहा गया है। कविताओं में इसका ज़िक्र ह...
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मुझे अपने वतन जौनपुर से हमेशा से मुहब्बत रही लेकिन इस वतन में रहने का अवसर कम ही मिल पाया करता है मुझे | वैसे वर्ष में ३-४ चक्कर अब वतन पहुँच जाता हूँ लेकिन जब भी वापस आता हूँ दिल में एक ख्वाहिश बाकी रह जाती है काश २-४ दिन और मिल जाते |मेरी इस जन्म भूमि न...
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प्राचीन भारत में “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता” का उद्गोष था | ऋग्वेद में नववधू को "साम्राज्ञी श्वसुरे भव" का आशीर्वाद मिलता है। तुम श्वसुर के घर की साम्राज्ञी होओ। भार्या श्रेष्ठतम सखा। पत्नी को मोक्ष का हेतु माना गया। कोई भी धार्मिक कार्य पत्नी के ब...
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जौनपुर में वरिष्ठ शिया धर्म गुरु व अस्फी इमामबाडा लखनऊ के इमाम मौलाना कल्बे जवाद ने कहा की मुजाफ्फर नगर में जो हालात है उससे सभी प्रभावित है | वहा के लोगो का आशियाना उजाड़ गया और कातिल आज भी टहल रहे है |सरकार आज तक उनका वतन नहीं पंहुचा सके |उन्होंने कहा दिल्ली में ए...
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आज का दौर जौनपुर की तरक्की का दौर है | जौनपुर की आवाज़ को विश्व तक पहुँचाने के लिए यहाँ के लोगों को विश्व से जोड़ने के लिए और यहाँ पर्यटन की आवश्यकता को बताने के लिए जौनपुर शहर की पहली वेबसाइट सन २०१० में हिंदी और अंग्रेजी में मैंने शुरू की |यह और बात है की इस वेबस...
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जिस बात को न्यायाधीश कामनी ला ने हाल में ही कहा की बलात्कारियों को नपुंसक बना देना चाहिए अर्थात उनका बंध्याकरण कर देना चाहिए उस बात को मैं १९८५ ई से ही कहता अवं लिखता चला आ रह हूँ |मेरा मानना   है की ऐसे विकृत चित्त , निडर यौन अपराधी को प्रथमत: तो बंध्या क्र द...
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हमारा वतन ही हमारी पहचान है यह बात मैं तब समझा जब मैं अपनी रोज़ी रोटी की तलाश में मुंबई पहुच गया | मुंबई शहर में बड़े आराम हैं शान है लेकिन पहचान नहीं है | इस पहचान शब्द को समाज के मिलने जुलने वालों से पहचान के रूप में न देखिये बल्कि आपकी पहचान वो होती है कि आपने अ...