ब्लॉगसेतु

Basudeo Agarwal
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(8, 8, 8, 8 पर यति अनिवार्य।प्रत्येक यति के अंत में हमेशा लघु गुरु (1 2) अथवा 3 लघु (1 1 1) आवश्यक।आंतरिक तुकान्तता के दो रूप प्रचलित हैं। प्रथम हर चरण की तीनों आंतरिक यति समतुकांत। दूसरा समस्त 16 की 16 यति समतुकांत। आंतरिक यतियाँ भी चरणान्त यति (1 2) या (1 1 1) के...
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गौरय्या का नीड़, चील-कौओं ने हथियाया हैहलो-हाय का पाठ हमारे बच्चों को सिखलाया है--जाल बिछाया अपना, छीनी है हिन्दी की बिन्दी भीअपने घर में हुई परायी, अपनी भाषा हिन्दी भीखोटे सिक्के से लोगों के मन को बहलाया हैहलो-हाय का पाठ हमारे बच्चों को सिखलाया है--हिन्दीभाषा से ह...
Bharat Tiwari
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अब अब्बा टीवी नहीं देखते, अख़बार पढ़ना भी इन दिनों छूट गया है। दुकान से लौटकर अम्मी के पास बैठे ज़रूर रहते हैं लेकिन बोलते कुछ नहीं। चुपचाप काली खिडकियों से बाहर न दीखती किसी चीज़ को देखते हैं। कभी-कभी उसे लगता है जैसे वे मन ही मन कुछ कहते हैं जो काँच से टकरा उन तक लौट...
शिवम् मिश्रा
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खामोश है जो यह वो सदा है, वो जो नहीं है वो कह रहा है , साथी यु तुम को मिले जीत ही जीत सदा |बस इतना याद रहे ........ एक साथी और भी था || जाओ जो लौट के तुम, घर हो खुशी से भरा, बस इतना याद रहे ........ एक साथी और भी था || कल पर्वतो पे कही बरसी थी जब गोलियां , हम...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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वह 1999 का वर्ष था,दोस्ताना अंदाज़ और अपार हर्ष था।  जब अटल जी पहुँचे थेबस द्वारा लाहौर, दोस्ती की ख़ुशबू से महके  थे दोनों देशों के ठौर। जब पींगें बढ़ी मित्रता की था फरवरी महीना,पाकिस्तानी सेना को रास न आया दो मुल्कों का अमन से...
sanjiv verma salil
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लघु कथाविजय दिवस*करगिल विजय की वर्षगांठ को विजय दिवस के रूप में मनाये जाने की खबर पाकर एक मित्र बोले-'क्या चोर या बदमाश को घर से निकाल बाहर करना विजय कहलाता है?'''पड़ोसियों को अपने घर से निकल बाहर करने के लिए देश-हितों की उपेक्षा, सीमाओं की अनदेखी, राजनैतिक मतभेदों...
sanjiv verma salil
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नर्मदा सलिल सी निर्मलता के पर्याय आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'विजय नेमा 'अनुज'*व्यक्ति के विकास में  परिवार, समाज तथा परिवेश की महती भूमिका होती है। सनातन सलिला नर्मदा तट  स्थित संस्कारधानी जबलपुर के यशस्वी साहित्यकार आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' के व्यक्त...
 पोस्ट लेवल : विजय नेमा 'अनुज' सलिल
Yashoda Agrawal
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बिन मौसम बारिश का पानी,कागज की नैया किसकी दीवानी ?नभ के पत्थर धरा पर कहानी ,कठोर गड्ढा सड़क पर विवश  जवानी ।बचपन की याद और मौन वाणी, बुढापा तक तो बोल उठा ज्ञानी ।नदी रचें यात्रा में न आनाकानी,सिंधु तक जा न शेष मनमानी ।।प्रकृति तो नहीं कभी भी बेपानी,गुलाब औ...
kumarendra singh sengar
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भारत और पाकिस्तान के आपसी संबंधों की जब भी चर्चा होती है तो प्रत्येक देशवासी के मन में यही भावना रहती है कि देश पाकिस्तान से सदैव आगे ही आगे रहे. खेल के मैदान से लेकर राजनीति के अखाड़े तक कहीं भी पाकिस्तान को आगे बढ़ते देख पाना देशवासियों के लिए संभव नहीं होता है. एक...
शिवम् मिश्रा
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ऊपर दी गई इस तस्वीर को देख कर कुछ याद आया आपको ? आज १६ दिसम्बर है ... आज ही के दिन सन १९७१ में हमारी सेना ने पाकिस्तानी सेना को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था ... और बंगलादेश की आज़ादी का रास्ता साफ़ और पुख्ता किया था ! तब से हर साल १६ दिसम्बर विजय दिवस के र...