ब्लॉगसेतु

अमितेश कुमार
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विजय कुमार को टेलीविजन और सिनेमा में अलग अलग तरह की भूमिकाओं में देखा और सराहा गया है लेकिन उनकी वास्तविक भूमि रंगमंच है जहाँ वो अभिनेता, निर्देशक और प्रशिक्षक की भूमिका में सक्रिय है. 'हम बिहार में चुनाव लड़ रहे हैं'  इस  प्रस्तुति को देखना एक अनुभव है....
anup sethi
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विष्णु खरे जी की यह बातचीत चिंतनदिशा के हाल के अंक में यानी 2019 अंत में छपी है। इसकी शुरुआती रिकॉर्डिंग 2012 में रमेश राजहंस के घर पर रात के खाने पर हुई। बातचीत करने के लिए पत्रिका से जुड़े हुए लेखक थे - हृदयेश मयंक, विनोद श्रीवास्तव, रमेश राजहंस, शैलेश सिंह। रिकॉ...
Yashoda Agrawal
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जो दर्द तुमने मुझे दिए,वो अब तक सँभाले हुए हैं !!कुछ तेरी ख़ुशियाँ बन गई हैं कुछ मेरे ग़म बन गए हैं कुछ तेरी ज़िंदगी बन गए हैं कुछ मेरी मौत बन गए हैं जो दर्द तुमने मुझे दिए,वो अब तक सँभाले हुए हैं !!-विजय कुमार सप्पत्ति
anup sethi
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चौबारे पर एकालाप, दूसरा कविता संग्रह इस साल यानी 2018 में छप गया, ज्ञानपीठ प्रकाशन से। पहला संग्रह जगत में मेला आधार प्रकाशन से सन 2002 मेंछपा था। उसमें 2002 से पहले करीब बीस साल की चुनी हुई कविताएं थींं। इसमें 2002 और उसके बाद करीब 15 साल की कविताएं हैं। इस संग्रह...
 पोस्ट लेवल : विजय कुमार कविता
sahitya shilpi
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sahitya shilpi
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sahitya shilpi
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अमितेश कुमार
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छबीलदास  स्कूल  में सम्भव हुआ रंगमंच मुंबई ही नहीं भारत के प्रयोगधर्मी आधुनिक रंगमंच के  इतिहास का ऐसा अध्याय है जिसने भारत के रंगमंच को बदलने में अपनी भूमिका निभाई है. शांता गोखले ने सुनील शानबाग के साथ मिलकर इस रंगमंच के मौखिक इतिहास को अपनी किताब...
विजय कुमार सप्पत्ति
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पारिजात के फूलभाग 1 – 1982 वह सर्दियों के दिन थे. मैं अपनी फैक्टरी से नाईट शिफ्ट करके बाहर निकला और पार्किंग से अपनी साइकिल उठाकर घर की ओर चल पड़ा. सुबह के 8:00 बज रहे थे. मैं अपने घर के सामने से गुजरा. मां दरवाजे पर खड़ी थी, मैंने मां को बोला ‘मां नहाने का पानी गर...
rahul dev
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युवा कवि विजय कुमार पिछले लगभग एक साल से झारखण्ड के “कोयलांचल क्षेत्र“ पर “कोयला“ सीरीज से चालीस कवितायें लिख चुके हैं जोकि उनकी दो वर्षो के अथक शोध का परिणाम है | इस कविता सीरीज में कोयलांचल क्षेत्र के भूभागों में जमीन के नीचे फैली आग, विस्थापन, पर्यावरण आदि समस्य...
 पोस्ट लेवल : विजय कुमार