ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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14 फरवरी, समाज में बहुतायत लोगों के लिए वेलेंटाइन डे का परिचायक बना हुआ है. वेलेंटाइन के बारे में बिना जाने-समझे विपरीत-लिंगी एक-दूसरे को लुभाने में लगे हुए हैं. बहरहाल, समाज में सबकी अपनी स्वतंत्र सोच है, अपना स्वतंत्र अस्तित्व है जो कुछ भी मानने, मनाने के लिए मुक...
विजय राजबली माथुर
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26 दिसंबर:पूण्यतिथि विशेष#जब_एक_युवती_द्वारा_चलायी_गयी_गोलियों_से_थर्रा_उठा_कलकत्ता_विश्वविद्यालय6 फरवरी 1932 को कलकत्ता विश्व विद्यालय के कनवोकेशन हाल में दीक्षांत समारोह में सैकड़ों लोग एक युवती द्वारा लगातार चलायी जा रही गोलियों से स्तब्ध रह गए.उस युवती केनिशाने...
अनंत विजय
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उन्नीस सौ नब्बे के आसपास की बात होगी, उन दिनों हिंदी साहित्य जगत में लघु पत्रिकाएं बहुतायत में निकला करती थीं। इनमें से ज्यादातर पत्रिकाएं एक विशेष विचारधारा का पोषण और सवंर्धन करनेवाली होती थीं। कम संख्या में छपनेवाली इन पत्रिकाओं की मांग उस विशेष विचारधारा के अनु...
Asha News
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जवाहर नवोदय विद्यालय झाबुआ में पीटीसी की बैठक संपन्नझाबुआ। जवाहर नवोदय विद्यालय क्रमांक-1 झाबुआ में 4 अक्टूबर, शुक्रवार को समग्र अभिभावक पीटीसी की बैठक का आयोजन संस्था प्राचार्य अब्दुल हमीद के मार्गदर्शन एवं अध्यक्षता में हुआ। जिसमें विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा कर आवश...
Asha News
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महात्मा गांधी एक मोमबत्ती की तरह थे, जिन्होंने पूरे संसार को किया रोशन - डाॅ. एससी जैनझाबुआ। शासकीय महाविद्यालय झाबुआ में देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का 150वीं जयंती वर्ष मनाया गया। जिसमें ’सत्य के प्रयोग’, गांधीजी की आत्मकथा के गद्यांध निर्बल के बलराम, धर्म क...
अनंत विजय
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दिविक रमेश दिल्ली विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू कॉलेज में हिंदी के शिक्षक रहे और वहीं प्राचार्य के पद से रिटायर हुए। उन्होंने कविताएं और कहानियां लिखी हैं। वो तीन साल तक दक्षिण कोरिया में हिंदी के विजिटिंग प्रोफेसर भी रहे हैं। उनको बाल साहित्य के लिए साहित्य अकादम...
Shreesh Pathak
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यूंइग क्रिश्चियन कालेज ( ईसीसी)समय की रफ्तार का पता ही नही चलता , दिसंबर का आख़िरी दिन आ गया , एक और साल बीतने को है। बीतते साल के साथ जिेंदगी भी लगता है भाग रही है । हमें लगता है अभी बहुत समय है पर ऐसे ही जिंदगी बीत जाती है। इंसान केवल देख सकता है बंद आँखों से , क...
Shreesh Pathak
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नाम इलाहाबाद ...!समय कभी नहीं रुकता, अपनी गति से भागता रहता है । समस्त बदलावों को आत्मसात करते हुये। इसी भागते निष्ठुर समय के साथ मेरा शहर इलाहाबाद से प्रयागराज बना दिया गया, और देखते ही देखते इस बदलाव को जनता ने स्वीकार भी कर लिया। पता नहीं क्यों मगर मैं इस बदलाव...
Shreesh Pathak
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इलाहाबाद और सिनेमा स्कूल की दहलीज़ लाँघने और कॉलेज कैम्पस मे क़दम रखते ही मेरे जीवन मे जो सबसे बड़ा परिवर्तन आया ,  वह था बिंदास फ़िल्में देखने की आज़ादी ...  इसको आज़ादी कहने के पीछे भी एक वजह है ....स्कूल मे पढ़ते समय आप हमेशा एक दायरे मे रहते...
Shreesh Pathak
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युनिवर्सिटी रोड ...श्री अंजनी पांडेय इलाहाबाद का नाम आये और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की चर्चा ना हो ...ऐसा तो हो ही नही सकता...और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी का नाम आये और यूनिवर्सिटी रोड की चर्चा ना हो ...ऐसा तो किसी कीमत पर नही हो सकता....। कुछ तो है इस रोड पर ...जो सु...