ब्लॉगसेतु

यूसुफ  किरमानी
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सुनो ऐ अल्लाह वालों...सुनो ऐ मोहम्मद के अनुयायियों सुनो...आप सभी को ईद मिलादुन नबी बहुत मुबारक हालाँकि मैं खुद 17 रबी उल अव्वल को पैगंबर साहब का जन्मदिन मनाता हूँ। ख़ैर यह कोई मसला नहीं है, जिसका जब दिल करे मनाये।यह पहली ऐसी मिलादुन नबी है जब आप उदास हैं। हालाँकि आ...
यूसुफ  किरमानी
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अयोध्या में राम मंदिर बनेगा या बाबरी मस्जिद को उसकी जगह वापस मिलने का संभावित फ़ैसला आने में अब कुछ घंटे बचे हैं।सवाल यह है कि अगर फ़ैसला मंदिर के पक्ष में आया तो मुसलमान क्या करेंगे...मुसलमानों को एक बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि इस सारे मामले में न तो उनका कुछ...
Lokendra Singh
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भारतीय भाषाओं के सम्मान का अनुष्ठानयूँ तो मीडिया विमर्श का हर अंक ही विशेष होता है। हर अंक पठनीय और संदर्भ सामग्री से भरा पड़ा संग्रहणीय। कई ऐसे विषयों पर भी मीडिया विमर्श ने विशेषांक निकाले हैं, जिनकी मीडिया में भी अत्यंत कम चर्चा होती है और होती भी है तो वही पुरान...
Lokendra Singh
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सक्रिय पत्रकारिता और उसके शिक्षण-प्रशिक्षण के सशक्त हस्ताक्षर प्रो. कमल दीक्षित की नयी पुस्तक ‘मूल्यानुगत मीडिया : संभावना और चुनौतियां’ ऐसे समय में आई है, जब मीडिया में मूल्यहीनता दिखाई पड़ रही है। मीडिया में मूल्यों और सिद्धांतों की बात तो सब कर रहे हैं, लेकिन उस...
Bharat Tiwari
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टीआरपी के बिसातियोंन प्राइम टाइम में हंगामा मचा और न कोई कवर स्टोरी सामने आयी अनब्याही माता होने की पीढ़ीगत परम्परा के अनगिनत महीन और भद्दी वजहों को तलाशता कोई नौकरशाह नहीं मिला, कोई समाजसेवी भी नहीं और कोई पत्रकारनुमा सोशल एक्टिविस्ट भी नहीं दिखा। तब ऐसी खबरें...
anup sethi
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सतीश गुजराल : साभारएक और हिन्‍दी दिवस बीत गया। इस मौके पर राजभाषा के पद पर आसीन हिन्‍दी पर एक और तरह से भी नजर डाली जाए। यह लेख बहुत पहले लिखा था। समय बदला है पर ये बातें अभी भी प्रांसगिक हैं। पढ़कर देखिए।  हिन्दी का राजयोग 1949 से शुरू हुआ। उस साल 14 सित...
 पोस्ट लेवल : विमर्श लेख हिंदी
राजीव सिन्हा
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‘झीनी-झीनी बीनी चदरिया’ अब्दुल बिस्मिल्लाह का सर्वाधिक चर्चित एवं प्रशंसित उपन्यास है। 1987 ई. में सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार से सम्मानित इस उपन्यास का कई भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।         उपन्यास बनारस के साड़ी बुनकरों की ज़िंदगी पर आधारित है। वर्षों तक इन बुनकर...
 पोस्ट लेवल : विमर्श
sanjiv verma salil
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लेख-लघु कथा - नव विधान और मूल्यों की आवश्यकता*पारंपरिक लघुकथा का उद्गम व् उपयोगिता -लघु कथा का मूल संस्कृत वांग्मय में है। लघु अर्थात देखने में छोटी, कथा अर्थात जो कही जाए, जिसमें कहने योग्य बात हो, बात ऐसी जो मन से निकले और मन तक पहुँच जाए। यह बात कहने का कोई उद्द...
sanjiv verma salil
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विमर्श : जाति अनुगूँजा सिन्हाः मैं आपके प्रति पूरे सम्मान के साथ आपको एक बात बताना चाहती हूँ कि मैं जाति में यकीन नही रखती हूँ और मैं कायस्थ नहीं हूँ।अनुगून्जा जी! आपसे सविनय निवेदन है कि- 'जात' क्रिया (जना/जाया=जन्म दिया, जाया=जगजननी का एक नाम)...
 पोस्ट लेवल : विमर्श jati जाति
sanjiv verma salil
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विमर्श: इतिहास और भविष्य *अकबर महान है या महाराणा प्रताप???ये कैसा प्रश्न,कैसा मुद्दा आज पूरे देश मे उठाया जा रहा है??ऐसी दुविधा उत्पन्न करने वाले महानुभावों से मेरा अनुरोध है कि आप इतिहास बदलने पर जितना ज़ोर दे रहे हैं उतना प्रयास व उतना समय एक नया इतिहास...