ब्लॉगसेतु

Akanksha Yadav
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पहली बारइन आँखों ने महसूस कियाहसरत भरी निगाहों कोऐसा लगाजैसे किसी ने देखा होइस नाजुक दिल कोप्यार भरी आँखों सेन जाने कितनीकोमल और अनकही भावनायेंउमड़ने लगीं दिल मेंएक अनछुये अहसास केआगोश में समाते हुएमहसूस किया प्यार कोकितना अनमोल थावह अहसासमेरा पहला प्यार !!आकांक्षा...
सुनील  सजल
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व्यंग्य- आधुनिक गुरु के तर्क पिछले दिनों सरकार ने शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए सख्त आदेश जारी किए | कारण , गिरते परीक्षा परिणाम , बदहाल शाली व्यवस्थाएं ,,लापरवाह शिक्षकों को सुधारना था | अत: दखल देने का अधिकार जनता , सरकारी अधिकारी व जनप्रतिनिधि  के हाथ में...
sanjiv verma salil
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एक प्रश्न:*लिखता नहीं हूँ, लिखाता है कोई*वियोगी होगा पहला कवि आह से उपजा होगा गान *शब्द तो शोर हैं तमाशा हैं भावना के सिंधु में बताशा हैं मर्म की बात होंठ से न कहोमौन ही भावना की भाषा है*हैं सबसे मधुर वो गीत जिन्हें हम दर्द के सुर...
 पोस्ट लेवल : विवाह और सृजन प्रेम
Ramesh pandey
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ऋग्वेद की ऋचाएं बताती हैं कि बालिकाओं को विवाह की उम्र तय करने की आजादी रही। बाल विवाह को सामाजिक अपराध सरीखा माना गया। 2011 की जनगणना के आंकड़े अपने साथ भारत की एक चौंका देने वाली छवि लेकर आए हैं। यह आंकड़े केन्द्र और राज्य सरकार के लिए एक चुनौती है। साथ ही चुनौती उ...
 पोस्ट लेवल : बाल विवाह
घुघूती  बासूती
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घुघूती बासूतीमाम काँ छू मालकोट्टीके ल्यालोदूध भात्तीको खालोतन्नी खाली, तन्नी खाली, तन्नी खाली !तन्नी गा रही है। तन्नी, जानती हो कि घुघूती बासूती कौन है?वह अपनी धुन में अपने को ही बिस्तर पर झूला सा झुलाती गाती जाती है।तन्नी, नानू घुघूती बासूती है।उसकी धुन भंग हो जात...
Akanksha Yadav
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शादी की दसवीं सालगिरह। काश समय एक बार मुड़कर फिर वहीँ चला जाये, जहाँ से हमने शुरुआत की थी। एक बार फिर से उन दिनों को जीने का जी चाहता है। जीवन-साथी कृष्ण कुमार जी के विचार अच्छे लगे। इन्होंने लिखा -''जीवन में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव। दाम्पत्य जीवन का एक दशक आज पू...
शेखर सुमन
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आज करवाचौथ पर फेसबुक पर तरह-तरह के स्टेटस देखे, कुछ बेहद कड़वे कुछ प्यार में पूरी तरह से डूबे हुये, किसी भी इस तरह के स्टेटस पर अपनी राय देने से बचा... जब भी इस तरह का कोई भी पर्व आता है अजीब तरह की कशमकश होती है... इस बाजारवाद को अगर एक किनारे कर भी दें लेकिन एक...
रेखा श्रीवास्तव
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                                  '' विवाह " जैसी सामाजिक संस्था का अस्तित्व जितना महत्वपूर्ण दशकों&...
Akanksha Yadav
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परिवार की महत्ता से कोई भी इंकार नहीं कर सकता।  रिश्तों के ताने-बाने और उनसे उत्पन्न मधुरता, स्नेह और प्यार का सम्बल ही परिवार का आधार है।  परिवार एकल हो या संयुक्त, पर रिश्तों की ठोस बुनियाद ही उन्हें ताजगी प्रदान करती है।  आजकल रिश्तों को लेकर मातृ...
ललित शर्मा
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 पोस्ट लेवल : मुंबई विवाह दर्शनकौर