ब्लॉगसेतु

अजय  कुमार झा
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कई दिनों से इस ब्लॉग पर पोस्ट नहीं आई थी , और मेरे बहुत चाहने के बावजूद भी मैं इस पर कोई पोस्ट अपडेट नहीं कर पा रहा था बावजूद इसके कि बिना नियमित लिखने के भी इस ब्लॉग पर हमेशा ही पाठकों की संख्या ज्यादा रहती है , मैं कोताही बरत जाता हूं , खैर तो जब  ब्लॉग बुले...
संगीता पुरी
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रूमानित भरा मौसम होता है वसंत कावसंत के मौसम में रूमानियत तो होती ही है ,भारतीय संस्‍कृति मे भी इस महीने प्‍यार के अनेक रंग बिखेरता होली का त्‍यौहार मनाए जाने की परंपरा रही है। इसलिए इस महीने  प्रेम की महिमा से इंकार नहीं किया जा सकता है , यह अलग बात है कि पहल...
रेखा श्रीवास्तव
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२६ जनवरी १९८० वह दिन था जिस दिन हम नई जिन्दगी शुरू करने के लिए वचनबद्ध हुए थे। एक लम्बा अरसा गुजर गया और लगता नहीं कि ये वर्ष कहाँ गुजर गए ? संयुक्त परिवार की जिम्मेदारियों को पूरा करते करते और अपने बच्चों के बड़ा करने और पढ़ाने लिखने में ही सारा समय गुजर गया।...
रेखा श्रीवास्तव
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बेटी पराया धन किस लिए कहा जाता है कि उसको घर में हमेशा नहीं रखा जा सकता है बल्कि एक सुयोग्य वर को उसका हाथ देकर कन्यादान किया तो अपना हक़ उसपर से ख़त्म हो जाता है। ऐसा ही कहा जाता है लेकिन मुझे लगा कि बेटी या बेटा विवाह के बाद उनकी एक अपनी दुनियाँ तो बस ही जाती है...
हिमांशु पाण्डेय
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पढ़ने के लिए बहुत दिनों से सँजो कर रखी अपने प्रिय चिट्ठों की फीड देखते-देखते वाणी जी की एक प्रविष्टि पर टिप्पणी करने चला । उस प्रविष्टि में वैवाहिक सप्तपदी का उल्लेख था, सरल हिन्दी में उसे प्रस्तुत करने की चेष्टा भी । इस वैवाहिक सप्तपदी को हिन्दी-काव्य रूप में...
हिमांशु पाण्डेय
134
आज पढ़ने के लिए बहुत दिनों से सँजो कर रखी अपने प्रिय चिट्ठों की फीड देखते-देखते वाणी जी की एक प्रविष्टि पर टिप्पणी करने चला । उस प्रविष्टि में वैवाहिक सप्तपदी का उल्लेख था, सरल हिन्दी में उसे प्रस्तुत करने की चेष्टा भी । इस वैवाहिक सप्तपदी को हिन्दी-काव्य रूप में सु...
ललित शर्मा
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Sanjay Chourasia
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हर इंसान सपने देखता है ! हमारे देश में ऐसे हजारों - लाखों लोग हैं जिनके कई सपने , कई उम्मीदें दिन - प्रतिदिन टूटती हैं ! जिनके सपने टूटते हैं , जिनकी उम्मीदें टूटती हैं , उनमें ज्यादातर गरीब , मजबूर , लाचार और बेरोजगार ही होते हैं ! क्योंकि इस देश में आज इन लोगों क...
राजीव तनेजा
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    "ओफ्फो!…कुछ याद भी रहता है इसे?....आज…इस वैलैंटाईन के दिन को तो बक्श देना था कम से कम लेकिन नहीं...’बरसों से पाल-पोस कर परिपक्व की हुई बुरी आदत को भला एक दिन के लिए भी क्यों त्यागा जाए?’....यही सोचा होगा ना शायद उसने?"... &quot...
सर्जना शर्मा
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चर्चा मंच पर ज्ञानवाणी में विवाह संबंधी एक पोस्ट पढ़ी, सुशील बाकलीवाल जी ने उसमें वर वधु दोनों के वचनों के बारे में जानकारी चाही है । मैं अपने को विशेषज्ञ तो नहीं मानती लेकिन आजकल विवाह से संबंधित एक साप्ताहिक कार्यक्रम बनाती हूं तो हर तरह के विवाह पर रिसर्च कर रही...