ब्लॉगसेतु

ज्योति  देहलीवाल
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दुनिया में ऐसे कई वैज्ञानिक, डॉक्टर और इंजीनियर जैसे पढ़े-लिखे लोग हैं, जिनका मन बिल्ली के रास्ता काटने पर आज भी शंकाग्रस्त हो उठता हैं कि कहीं कोई अनहोनी तो नहीं होगी? घर से निकलते वक्त छींक आने पर मन में आशंका होने लगती हैं कि कुछ अमंगल तो नहीं होगा? अंधविश्वास सि...
 पोस्ट लेवल : अंधविश्वास धार्मिक
अनीता सैनी
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  समय के साथ समेटना पड़ता है वह दौर,   जब हम खिलखिलाकर हँसते हैं, बहलाना होता है उन लम्हों को,  जो उन्मुक्त उड़ान से अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान करते हैं,  गठरी में बाँधनी पड़ती है, उस वक़्त धूप-सी बिखरी कुछ गु...
kumarendra singh sengar
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26 वर्ष 11 माह 3 दिन की समयावधि बहुत लम्बी होती है. देश की संस्कृति पर एक काले धब्बे की तरह बना ढाँचा, जो बार-बार दर्शाता था एक विदेशी आक्रान्ता के आने और भारतीय संस्कृति के मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की जन्मभूमि पर अपने निशान बना जाना. वर्षों तक हिन्दुओं-मुसलमानो...
अनीता सैनी
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 उजड़ रहा है साहेब धरा के दामन से विश्वास सुलग रही हैं साँसें कूटनीति जला रही है ज़िंदा मानस   सुख का अलाव जला भी नहीं दर्द धुआँ बन आँखों में धंसाता गया  निर्धन हुआ बेचैन  वक़्त...
kumarendra singh sengar
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विश्वास और अविश्वास के बीच एक अक्षर का अंतर है मगर दोनों की प्रकृति में जमीन आसमान का अंतर है. विश्वास के द्वारा व्यक्ति अपनी प्रस्थिति को मजबूत बना पाता है वहीं अविश्वास के कारण उसके व्यक्तित्व पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. विश्वास और अविश्वास के बीच के बारीक अंतर...
Yashoda Agrawal
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हो काल गति से परे चिरंतन,अभी यहाँ थे अभी यही हो।कभी धरा पर कभी गगन में,कभी कहाँ थे कभी कहीं हो।तुम्हारी राधा को भान है तुम,सकल चराचर में हो समाये।बस एक मेरा है भाग्य मोहन,कि जिसमें होकर भी तुम नहीं हो।न द्वारका में मिलें बिराजे,बिरज की गलियों में भी नहीं हो।न योगिय...
 पोस्ट लेवल : डॉ. कुमार विश्वास
Yashoda Agrawal
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जब भी मुंह ढक लेता हूं, तेरे जुल्फों की छांव में.कितने गीत उतर आते हैं, मेरे मन के गांव में!एक गीत पलकों पे लिखना, एक गीत होंठो पे लिखना.यानी सारे गीत हृदय की, मीठी चोटों पर लिखना !जैसे चुभ जाता है कांटा नंगे पांव में.ऐसे गीत उतर आता है,&nb...
 पोस्ट लेवल : डॉ. कुमार विश्वास
सतीश सक्सेना
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और अब यह बेहद आसान है अगर दो वर्ष में आप एक बार घर से दूर घूमना चाहते हैं तो कम खर्चे में आप जर्मनी, चेकिया या रोम जा सकते हैं और निश्चित ही यह आपके या परिवार के लिए उत्साहवर्धक एवं आत्मविश्वास बढाने में कामयाब होगा ,बहुत कम लोग यह जानते होंगे कि यूरोप जाना उतना ही...
अनीता सैनी
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ख़ामोशी से बातें करता था न जाने  क्यों लाचारी है  किपसीने की बूँद की तरह टपक ही जाती थी अंतरमन में उठता द्वंद्व ललाट पर सलवटें  आँखों में बेलौस बेचैनी छोड़ ही जाती थी दूध में कभी पानी की मात्रा कभी दूध...
Kavita Rawat
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