ब्लॉगसेतु

mahendra verma
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पिछले दिनों भूतविद्या समावार पत्रों की सुर्खियाँ बनी रहीं । कुछ ने इसे भूत-प्रेत से संबंधित बताया तो कुछ ने इसे मनोचिकित्सा से संबंधित विद्या कहा । कुछ अतिउत्साही लोगों ने तो इसे पंचमहाभूतों की विद्या भी बता दिया । चूंकि भूतविद्या आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति से संबंधि...
kumarendra singh sengar
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उरई के इंदिरा स्टेडियम में बुन्देलखण्ड ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट का आयोजन का आज शुभारम्भ हुआ. पहले दी ही अनेक मैच हुए. उन मैचों सहित पूरे टूर्नामेंट की रिपोर्टिंग की जिम्मेवारी हमारे ऊपर थी. ऐसे में एक-एक मैच को देखा जा रहा था, उनके परिणामों पर, खिलाड़ियों के प्रदर्शन...
kumarendra singh sengar
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किसी भी व्यक्ति के विकास में उसके आत्मविश्वास का बहुत बड़ा योगदान होता है. इस बात को न केवल कहा जाता रहा है बल्कि बहुत से व्यक्तियों ने इसे अमल में लाकर इसे सच भी साबित किया है. विश्वास से ओतप्रोत व्यक्ति के चेहरे की आभा, उसके बातचीत का तरीका, कार्य करने का ढंग सबसे...
kumarendra singh sengar
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वर्षों पुराने दो परिचित. सामाजिक ताने-बाने के चक्कर में, शिक्षा-कैरियर के कारण चकरघिन्नी बन दोनों कई वर्षों तक परिचित होने के बाद भी अपरिचित से रहे. समय, स्थान की अपनी सीमाओं के चलते अनजान बने रहे. तकनीकी विकास ने सभी दूरियों को पाट दिया तो उन दोनों के बीच की दूरिय...
kumarendra singh sengar
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बेटियों के साथ होने वाली किसी भी घटना के बाद एक आम पोस्ट आती है कि बेटियों के बजाय बेटों को शिक्षा दें कि वे स्त्री को एक इन्सान समझें. हम बराबर और बार-बार कहते हैं कि समाज में स्त्री-पुरुष का, लड़के-लड़की का, बेटे-बेटी का भेद करने से कभी कोई सुधार नहीं आने वाला. बे...
ज्योति  देहलीवाल
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दुनिया में ऐसे कई वैज्ञानिक, डॉक्टर और इंजीनियर जैसे पढ़े-लिखे लोग हैं, जिनका मन बिल्ली के रास्ता काटने पर आज भी शंकाग्रस्त हो उठता हैं कि कहीं कोई अनहोनी तो नहीं होगी? घर से निकलते वक्त छींक आने पर मन में आशंका होने लगती हैं कि कुछ अमंगल तो नहीं होगा? अंधविश्वास सि...
 पोस्ट लेवल : अंधविश्वास धार्मिक
अनीता सैनी
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  समय के साथ समेटना पड़ता है वह दौर,   जब हम खिलखिलाकर हँसते हैं, बहलाना होता है उन लम्हों को,  जो उन्मुक्त उड़ान से अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान करते हैं,  गठरी में बाँधनी पड़ती है, उस वक़्त धूप-सी बिखरी कुछ गु...
kumarendra singh sengar
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26 वर्ष 11 माह 3 दिन की समयावधि बहुत लम्बी होती है. देश की संस्कृति पर एक काले धब्बे की तरह बना ढाँचा, जो बार-बार दर्शाता था एक विदेशी आक्रान्ता के आने और भारतीय संस्कृति के मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की जन्मभूमि पर अपने निशान बना जाना. वर्षों तक हिन्दुओं-मुसलमानो...
अनीता सैनी
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 उजड़ रहा है साहेब धरा के दामन से विश्वास सुलग रही हैं साँसें कूटनीति जला रही है ज़िंदा मानस   सुख का अलाव जला भी नहीं दर्द धुआँ बन आँखों में धंसाता गया  निर्धन हुआ बेचैन  वक़्त...
kumarendra singh sengar
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विश्वास और अविश्वास के बीच एक अक्षर का अंतर है मगर दोनों की प्रकृति में जमीन आसमान का अंतर है. विश्वास के द्वारा व्यक्ति अपनी प्रस्थिति को मजबूत बना पाता है वहीं अविश्वास के कारण उसके व्यक्तित्व पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. विश्वास और अविश्वास के बीच के बारीक अंतर...