ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
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आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ - मानवीय संवेदनाओं के कविआचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी का नाम अंतर्जाल पर हिंदी साहित्य जगत में विशेष रूप से सनातन एवं नवीन छंदों पर किये गए उनके कार्य को लेकर अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है, गूगल पर उनका नाम लिखते ही सैकड़ों के संख्या मे...
अनीता सैनी
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इंसान  इंसान के लिबास में तुम्हारे इर्द-गिर्द घूमते रहेंगे।  वे युधिष्ठिर-सा अभिनय शकुनी-से पासे फेंकेंगे। ऊसर हो चुकी संवेदना स्मृतियों में यातना भोगेगी। क्रोध जलाएगा  अस्थियाँ विज्ञान उपचार तलाशेगा। वे आधिपत्य की...
सतीश सक्सेना
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जयकार में उठी कलम,क्या ख़ाक लिखेगीअभिव्यक्ति को वतन में,खतरनाक लिखेगी !अवसाद में निराश कलम , ज्ञान लिखेगी ?मुंह खोल जो कह न सके,चर्वाक लिखेगी ?जिसने किया बरवाद , वे बाहर के नहीं थे !तकलीफ ए क़ौम को भी इत्तिफ़ाक़ लिखेगी !किसने दिया था दर्द, वह बतला न सकेगी !कुछ चाहतें द...
kuldeep thakur
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स्नेहिल अभिवादनवेदना मूलतः संस्कृत शब्द है जिसका शाब्दिक अर्थ पीड़ा,दर्द,व्यथा इत्यादि है।मनुष्य के मन की भावनाओं में दो भावों की प्रधानता है  सुख और दुख। दुख को नैसर्गिक रुप से बिना किसी कृत्रिमता और छल,कपट के बड़बोले आडंबरों से मुक्त, मानसिक व्य...
 पोस्ट लेवल : वेदना 1683
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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दीवार उठती है बाँटती है आचार-विचार रहन-सहन दशा-दिशा कोई सेंध लगाकर देख लेता है आरपार दीवार ढोती है व्यक्ति की निजताअस्थायी सुरक्षा का पता  संकीर्णता के कीड़े-मकोड़े सहती है महत्त्वाकाँक्षा के हथौड़ेप्रकृति सिहर उठ...
 पोस्ट लेवल : कविता असीम वेदना
Nitu  Thakur
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नवगीत : नीतू ठाकुर 'विदुषी'मुखड़ा पूरक पंक्ति 16/14 अंतरा 16/14 विरह वेदना की लहरों में जीवन की नदियां बहतीसावन की वह मंद फुहारें तन-मन स्वाहा कर दहतीसूनी हैं सपनों की गलियाँअपनों का आभास नहीइतनी वीरानी है छाईमन भी मन के पास नही फिर भी आशाएं...
Sanjay  Grover
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मज़े की बात है कि जब प्रशंसा में तालियां बजतीं हैं तब आदमी नहीं देखता कि तालियां बजानेवालों की भीड़ कैसे लोंगों के मिलने से बनी है !? उसमें पॉकेटमार हैं कि ब्लैकमेलर हैं कि हत्यारे हैं कि बलात्कारी हैं कि नपुंसक हैं कि बेईमान हैं कि.......लेकिन जैसे ही इसका उल्टा कुछ...
अनीता सैनी
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एक नन्हा-सा पौधा तुलसी का, पनपा मेरे मन के एक कोने में, प्रार्थना-सा प्रति दिन लहराता, सुकोमल साँसों का करता दानसतत प्राणवायु बहाता आँगन में    संताप हरण करता हृदय का,   संतोष का सुखद एहसास सजा,  पीड़ा को पल में...
kumarendra singh sengar
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सूरत की बिल्डिंग में लगी आग सिर्फ वहाँ की अव्यवस्था की निशानी नहीं है बल्कि वहाँ तमाशबीन बने नागरिकों के संवेदनहीन होने की तथा सरकारी तंत्र की नाकामी की भी निशानी है. आग लगने के बाद जिस तरह से उस इमारत की चौथी मंजिल से बच्चे कूदते दिखाई दे रहे थे, वह घबराहट पैदा कर...
सतीश सक्सेना
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साधू सन्यासी हमारे , लार टपकाते दिखेंकौन आएगा नमन को ,मेरे हिंदुस्तान में ?धूर्तों ने धन कमाने , घर में, कांटे बो दिए !रोयेंगी अब पीढ़िया,परिवार पुनुरुत्थान में !कौम सारी हो चुकी बदनाम,बहते खून से ,कितनीं पीढ़ी बीत जायेंगीं इसी भुगतान में ! जाहिलों की बुद्धि, कै...