ब्लॉगसेतु

Sandhya Sharma
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धरती माँ ने सहीअसह्य वेदनाजन्मा कोरोनाकभी रफ़्तार होती थीमायने ज़िंदगी कीथम गई दुनियाएक ही पल मेंधरा ने खोल दियाअपने घर का झरोखाआसमान साफ़ कियाआँगन बुहाराकुछ परिंदे उड़ा दिएकुछ सहेज लिये जल पवित्र किया नदियाँ जी उठीं  हवा शुद्ध कीअल्प साधनों में...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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 नाविक नैया खेते-खेते तुम चले गए उस पार बाट तुम्हारी हेरे-हेरे थके नयन गए हारबादल ठहरे होंगे कहीं कहे क्षितिज की रेखा संध्या का सफ़र शुरू होगा हो न सकेगा अनदेखानदी शांत है आ जाओ होगा मटमैला पानीसांध्य-दीप साथ जलाना होगी प...
sahitya shilpi
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sahitya shilpi
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सतीश सक्सेना
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नाम तुम्हारा ले बस्ती में , जोर शोर से गाएंगे !दरी बिछाकर फटी तेरे, दरवाजे आके नाचेंगे !जय जयकारों के नारों में भूले देश दुर्दशा को !बर्तन भांडे बिके देश के , टांग उठा के नाचेंगे !कोर्ट कचहरी सारे तेरे, जेल मिले गर बोले तो घर की जमा लुट गई, नंगे घर...
kumarendra singh sengar
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उस दिन बहुत से चेहरों से दो दशक से अधिक समय बाद मिलना हो रहा था. बहुत से चेहरे तो ऐसे थे जिनसे पहली बार मिलना हो रहा था. उस दिन के पहले न कभी भी, कहीं भी मुलाकात हुई थी, न कभी कोई बात हुई थी, न फोन से कोई बात हुई थी इसके बाद भी उन तमाम नए चेहरों पर सम्मान भाव झलक र...
sanjiv verma salil
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आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ - मानवीय संवेदनाओं के कविआचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी का नाम अंतर्जाल पर हिंदी साहित्य जगत में विशेष रूप से सनातन एवं नवीन छंदों पर किये गए उनके कार्य को लेकर अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है, गूगल पर उनका नाम लिखते ही सैकड़ों के संख्या मे...
अनीता सैनी
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इंसान  इंसान के लिबास में तुम्हारे इर्द-गिर्द घूमते रहेंगे।  वे युधिष्ठिर-सा अभिनय शकुनी-से पासे फेंकेंगे। ऊसर हो चुकी संवेदना स्मृतियों में यातना भोगेगी। क्रोध जलाएगा  अस्थियाँ विज्ञान उपचार तलाशेगा। वे आधिपत्य की...
सतीश सक्सेना
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जयकार में उठी कलम,क्या ख़ाक लिखेगीअभिव्यक्ति को वतन में,खतरनाक लिखेगी !अवसाद में निराश कलम , ज्ञान लिखेगी ?मुंह खोल जो कह न सके,चर्वाक लिखेगी ?जिसने किया बरवाद , वे बाहर के नहीं थे !तकलीफ ए क़ौम को भी इत्तिफ़ाक़ लिखेगी !किसने दिया था दर्द, वह बतला न सकेगी !कुछ चाहतें द...
kuldeep thakur
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स्नेहिल अभिवादनवेदना मूलतः संस्कृत शब्द है जिसका शाब्दिक अर्थ पीड़ा,दर्द,व्यथा इत्यादि है।मनुष्य के मन की भावनाओं में दो भावों की प्रधानता है  सुख और दुख। दुख को नैसर्गिक रुप से बिना किसी कृत्रिमता और छल,कपट के बड़बोले आडंबरों से मुक्त, मानसिक व्य...
 पोस्ट लेवल : वेदना 1683