ब्लॉगसेतु

मुकेश कुमार
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जड़त्व के नियम के अनुसार ही, वो रुकी थी, थमी थी,निहार रही थी, बस स्टैंड के चारो औरथा शायद इन्तजार बस का या किसी और का तो नहीं ?जो भी हो,  बस आयी,  रुकी, फिर चली गयीपर वो रुकी रही ... स्थिर !यानि उसका अवस्था परिवर्तन हुआ नहीं !!तभी, एकदम से सर्रर्र से रुकी...
Ashish Shrivastava
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सुब्रह्मण्यन् चन्द्रशेखर सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर (जन्म- 19 अक्तूबर, 1910 – मृत्यु- 21 अगस्त, 1995) खगोल भौतिक शास्त्री थे और सन् 1983 में भौतिक शास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार विजेता भी थे। उनकी शिक्षा चेन्नई के प्रेसीडेंसी कॉलेज में हुई। वह नोबेल पुरस्कार विजेत...
Ashish Shrivastava
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विलियम सी कैम्पबेल , सातोशी ओमूरा और यूयू तू (बांये से दायें) चिकित्सा के क्षेत्र में इस साल का नोबेल पुरस्कार पैरासाइट यानी परजीवी से होने वाले संक्रमण से लड़ने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले तीन वैज्ञानिकों को देने की घोषणा की गई है। इन तीन वैज्ञानिकों में चीन क...
Ashish Shrivastava
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सतीश धवन सतीश धवन (जन्म- 25 सितंबर, 1920; मृत्यु- 3 जनवरी, 2002) भारत के प्रसिद्ध रॉकेट वैज्ञानिक थे। देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊँचाईयों पर पहुँचाने में उनका बहुत ही महत्त्वपूर्ण योगदान था। एक महान वैज्ञानिक होने के साथ-साथ प्रोफ़ेसर सतीश धवन एक बेहतरीन इनसान...
प्रदीप  कुमार
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लेखक : प्रदीप  आर्यभट प्राचीन भारत के सर्वाधिक प्रतिभासंपन्न गणितज्ञ-ज्योतिषी थे। वर्तमान में पाश्चात्य विद्वान भी यह स्वीकार करते हैं कि आर्यभट प्राचीन विश्व के एक महान वैज्ञानिक थे। यद्यपि हम आर्यभट का महत्व इसलिए देते  हैं क्योंकि सम्भवतः वे ईसा की पांचवी-छठी ...
Ashish Shrivastava
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डॉक्टर विश्वेश्वरय्या मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या (15 सितम्बर 1860 – 14 अप्रैल 1962) (कन्नड में: ಶ್ರೀ ಮೋಕ್ಷಗುಂಡಂ ವಿಶ್ವೇಶ್ವರಯ್ಯ ; अंग्रेजी में : Visvesvaraya, Visweswaraiah, Vishweshwariah;) भारत के महान अभियन्ता एवं राजनयिक थे। उन्हें सन 1955 में भारत के सर्वोच...
 पोस्ट लेवल : वैज्ञानिक
Manoj Kumar
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Lokendra Singh
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 ह म सबके हृदय द्रवित हैं। आँखें नम हैं। भारत के पूर्व राष्ट्रपति, वैज्ञानिक और भारत रत्न डॉ. एपीजे कलाम चले गए। असल मायने में वे गए नहीं हैं बल्कि हमारे दिलों में और गहरे उतर गए हैं। यह मौका है, जब हमें कलाम साहब के सिद्धांतों को अपने व्यक्तित्व में उतार लेना...
केवल राम
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गतांक से आगे उपरी तौर पर देखा जाए तो पूरे विश्व में मानवीय पहलुओं की दुहाई देने वालों की कमी नहीं है. लेकिन यथार्थ में जो कुछ भी घटित हो रहा है उसका चेहरा बड़ा विद्रूप है. कई बार तो ऐसा लगता है कि मनुष्य जो कुछ कह रहा है या जो कुछ उसके द्वारा किया जा रहा है वह...
kumarendra singh sengar
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क्यों लग रहा है कि कुछ रीतापन सा है आसपास, क्यों ऐसा महसूस हो रहा है जैसे कुछ खाली-खाली सा हो गया है आसपास? तुमसे तो कोई रिश्ता भी नहीं था हमारा, तुमसे कोई नाता भी नहीं था हमारा, तुम कहीं दूर के रिश्तेदार, सम्बन्धी भी नहीं लगते थे हमारे फिर क्यों तुम्हारे जाने की...