ब्लॉगसेतु

Bharat Tiwari
25
हरिशंकर परसाई की 'जिंदगी और मौत का दस्तावेज़' को पढ़ते हुए मुझे ऐसा क्या लगा होगा जो इसे टाइप किया और यहाँ आपसब के लिए लगाया...यह मैं अभी सोच रहा हूँ. शायद रचना के शुरू में उनका यह कहना –संपादकों ने कभी कहा था–इमरजेंसी है तो डरो। मैं डरा। फिर कहा–इमरजेंसी की तारीफ म...
sanjiv verma salil
9
व्यंग्य लेख::माया महाठगिनी हम जानीसंजीव*तथाकथित लोकतंत्र का राजनैतिक महापर्व संपन्न हुआ। सत्य नारायण कथा में जिस तरह सत्यनारायण को छोड़कर सब कुछ मिलता है, उसी तरह लोकतंत्र में लोक को छोड़कर सब कुछ प्राप्य है। यहाँ पल-पल 'लोक' का मान-मर्दन करने में निष्णात 'तंत्र की त...
समीर लाल
78
कल ही पोता लौटा है दिल्ली से घूम कर. अपने कुछ दोस्तों के साथ गया था दो दिन के लिए.सुना उपर अपने कमरे में बैठा है अनशन पर कि यदि मोटर साईकिल खरीद कर न दी गई तो खाना नहीं खायेगा. जब तक मोटर साईकिल लाने का पक्का वादा नहीं हो जाता, अनशन जारी रहेगा.माँ समझा कर थक गई कि...
संतोष त्रिवेदी
146
इन दिनों ‘लोकतंत्र’ और ‘सत्य’ लगातार खबरों में बने हुए हैं।इससे इस बात की पुष्टि भी होती है कि ये दोनों अभी तक जीवित हैं।यह इस सबके बावजूद हुआ जबकि हर दूसरे दिन ‘लोकतंत्र की हत्या’ होने की मुनादी पिटती है।पर यह सशक्त लोकतंत्र का कमाल ही है कि वह अगले दिन सही-सलामत...
रविशंकर श्रीवास्तव
5
..............................
 पोस्ट लेवल : व्यंग्य
रविशंकर श्रीवास्तव
5
..............................
समीर लाल
78
अगर आपके पास घोड़ा है तो जाहिर सी बात है चाबुक तो होगी ही. अब वो चाबुक हैसियत के मुताबिक बाजार से खरीदी गई हो या पतली सी लकड़ी के सामने सूत की डोरी बाँधकर घर में बनाई गई हो या पेड़ की डंगाल तोड़ कर पत्तियाँ हटाकर यूँ ही बना ली गई हो. भले ही किसी भी तरह से हासिल की गई ह...
sanjiv verma salil
9
एक व्यंग्य कविता*ऊधौ! का सरकारै सब कछु?'विथ डिफ़रेंस' पार्टी अद्भुत, महबूबा से पेंग लड़ावैबात न मन की हो पाए तो, पलक झपकते जेल पठावैमनमाना किरदारै सब कछु?कम जनमत पा येन-केन भी, लपक-लपक सरकार बनावै'गो-आ' खेल आँख में धूला, झोंक-झोंककर वक्ष फुलावैसत्ता पा फुँफकारै सब कछ...
 पोस्ट लेवल : एक व्यंग्य कविता
sanjiv verma salil
9
एक व्यंग्य कविता *ऊधौ! का सरकारै सब कछु?'विथ डिफ़रेंस' पार्टी अद्भुत, महबूबा से पेंग लड़ाए बात न मन की हो पाए तो, पलक झपकते जेल पठाए मनमाना किरदारै सब कछु?कम जनमत पा येन-केन भी, लपक-लपक सरकार बनाए 'गो-आ' खेल आँख में धूला, झोंक-झोंककर वक्ष फुलाए सत्ता पा फुँफकारै सब...
 पोस्ट लेवल : एक व्यंग्य कविता
रविशंकर श्रीवास्तव
5
..............................
 पोस्ट लेवल : व्यंग्य