ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
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व्यंग्य रचना:अभिनंदन लो*युग-कवयित्री! अभिनंदन लो....*सब जग अपना, कुछ न परायाशुभ सिद्धांत तुम्हें यह भाया.गैर नहीं कुछ भी है जग में-'विश्व एक' अपना सरमाया.जहाँ मिले झट झपट वहीं सेअपने माथे यश-चंदन लोयुग-कवयित्री अभिनंदन लो....*मेरा-तेरा मिथ्...
प्रमोद ताम्‍बट
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//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट// कांग्रेस जब देखो तब भ्रम फैलाती है। वैसे कांग्रेस भ्रम की जगह कुछ और भी फैला सकती है मगर कांग्रेस को भी देखिए आजकल और कोई काम-धाम ही नहीं है, वो सिर्फ और सिर्फ भ्रम ही फैलाती रहती है। एक दिन तो मैं भारी चिंता में पड़ गया कि कांग्रेस अग...
 पोस्ट लेवल : व्यंग्य
sanjiv verma salil
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व्यंग्य-हाय! हम न रूबी राय हुए- संजीव वर्मा 'सलिल'*रात अचानक नींद खुल गयी, उठ भी नहीं सकता था। श्रीमती जी की निद्रा भंग होने की आशंका और फिर अगले दिन ठीक से सो न पाने का उलाहना कौन सुनता? यह भी कि देर रात उठकर तीर भी कौन सा मार लेता? सो 'करवटें बदलते रहे सारी' न सह...
प्रमोद ताम्‍बट
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//व्‍यंग्‍य-प्रमोद ताम्‍बट//कोरोनावर्त के अन्तर्राष्ट्रीय कोरोना डिप्लाईमेंट सेंटर में रात दो बजे से ही जबरदस्त भीड़ लगना शुरू हो जाती है। हर उम्र के कोरोना वायरसों के झुंड के झुंड अपनी-अपनी मनपसन्द जगहों पर डिप्लाईमेंट पोस्टिंग की हसरत लिए अपने बीवी-बच्चों और रिश्‍...
 पोस्ट लेवल : व्यंग्य
प्रमोद ताम्‍बट
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//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट//वाट्सअप ग्रुप आजकल इफरात में बढ़ चले हैं । इससे साबित होता है कि निठल्‍ले भी बड़ी तादात में बढ़ गए हैं। इन निठल्‍लों ने अपने-अपने वाट्सअप ग्रुप बना रखे हैं और अपनी सल्‍तनतों की तरह वे रात-दिन उन ग्रुपों की छाती पर सवार रहते हैं । एक ग्रुप स...
 पोस्ट लेवल : व्यंग्य
समीर लाल
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जब चपरासी रामलाल जाले हटाता, धूल झाड़ता हुआ कबाड़घर के पिछले हिस्से में गाँधी जी की मूर्ति को खोजता हुआ पहुँचा तो उड़ती हुई  धूल के मारे गाँधी जी की मूर्ति को जोरों की छींक आ गई. अब छड़ी सँभाले या चश्मा या इस बुढ़ापे में खुद को? ऐसे में चश्मा आँख से छटक कर टूट गया....
प्रमोद ताम्‍बट
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//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट//आ गए, आ गए, आ गए, मल्टी स्पेशियलिटी, मल्टीपरपज़ फेस मास्क आ गए । शानदार डिज़ाइनर मास्कों की बेहतरीन रेंज आकर्षक दामों में। हमारे फेस मास्कों को लगाने से कोरोना के नाक-मुँह में घुसने का खतरा तो खत्म हो ही जाता है, एक से एक बेहतरीन सुविधाएँ भी...
 पोस्ट लेवल : व्यंग्य
प्रमोद ताम्‍बट
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//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट//भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था एक ऐसी व्‍यवस्‍था है जिसमें न कोई ‘अर्थ’ है और न कोई ‘व्‍यवस्‍था’। यह  एक ऐसी अर्थव्‍यवस्‍था है जिसका ‘अर्थ’ व्‍यवस्‍था के ऊपर और ‘व्‍यवस्‍था‘ अर्थ के ऊपर चढ़ कर बैठी हुई होती है। यह वैसा ही है जैसा कि यह सवाल- ला...
 पोस्ट लेवल : व्यंग्य
सुनीता शानू
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दोस्तों, बहुत समय बाद पुरूषों के चटोरेपन पर एक व्यंग्य लिखा है, पढ़िए भारत भास्कर में और आनंद लीजिए।मूल पाठयह मुंह और उनकी प्रयोगशाला आप सोच रहे होंगे कि प्रयोगशाला से हमारे मुंह का क्या लेना देना है। लेकिन मैं बताऊंगा तो आप सब भी अपना मुंह संभाल कर बै...
kumarendra singh sengar
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कुछ लोग नमस्कार करते समय अपनी गर्दन, सिर को इतना ही हिलाते हैं कि बस उसके मन को मालूम चलता है कि नमस्कार की गई। बेचारी गर्दन और बेचारे सिर को तो पता ही नहीं चल पाता कि उनके मालिक ने किसी को नमस्कार करने में उनका दुरुपयोग कर लिया।जिसको नमस्कार की गई उसकी जानकारी की...