ब्लॉगसेतु

समीर लाल
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जब चपरासी रामलाल जाले हटाता, धूल झाड़ता हुआ कबाड़घर के पिछले हिस्से में गाँधी जी की मूर्ति को खोजता हुआ पहुँचा तो उड़ती हुई  धूल के मारे गाँधी जी की मूर्ति को जोरों की छींक आ गई. अब छड़ी सँभाले या चश्मा या इस बुढ़ापे में खुद को? ऐसे में चश्मा आँख से छटक कर टूट गया....
समीर लाल
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कुत्ता मूते तभी कुकुरमुत्ते पैदा हों, वो जमाना गुजरे भी जमाना गुजरा। अंग्रेजी का अपना बोलबाला है। उसका विश्व स्वीकार्य अपना वर्चस्व है। अंग्रेजी स्कूल मे पढ़ने वाला बच्चा तक इस बात को जानता है और हिन्दी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे को हेय दृष्टि से देखता है। हमने...
समीर लाल
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हाल ही में लवली सिंग को यह ज्ञान प्राप्त हुआ कि हम असफल होने के लिए योजना नहीं बनाते बल्कि असफल होते ही इसलिए हैं कि हमने कोई योजना ही नहीं बनाई। आधी से ज्यादा जिन्दगी इसी ज्ञान के आभाव में असफलताओं से गलबहियाँ करते बीत चुकी हैँ। खैर कोई बात नहीं देर आए मगर दुरुस्त...
समीर लाल
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इधर १५० किमी दूर एक मित्र के घर जाने के लिए ड्राईव कर रहा था. पत्नी किसी वजह से साथ न थी तो जीपीएस चालू कर लिया था. वरना तो अगर पत्नी साथ होती तो वो ही फोन पर जीपीएस देखकर बताती चलती है और जीपीएस म्यूट पर रहता है. कारण यह है कि जीपीएस में यह सुविधा नहीं होती है न क...
समीर लाल
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जिन्दगी की गाड़ी एक ऐसी गाड़ी है जिसमें रिवर्स करने की सुविधा नहीं होती। वो सिर्फ चलती चली जाती है। वो जब रुकती है तो वह आपकी जिन्दगी का अंतिम पड़ाव होता है। लोगों से कई बार इस महामारी के दौर मे सुनने में आया कि जिन्दगी की गाड़ी एकदम से रुक गई है। दरअसल गाड़ी चल रही है...
समीर लाल
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हर व्यक्ति की इच्छा होती है कि वो महान कहलाये, अभी न भी सही, तो कम से कम मरणोपरांत.हमारे एक मित्र तो इसी चक्कर में माला पहन कर अगरबत्ती समाने रखकर तस्वीर खिंचवा कर घर में टांग दिये हैं कि घर में टंगी रहेगी. कोई माला पहनाये न पहनाये, अगरबत्ती जलाये न जलाये, तस्वीर म...
समीर लाल
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मुस्कान संक्रामक होती है, मुस्कराते रहिये -ये अब कल की बात हो गई है.  अब तो मुस्कराओ या कि मनहूस की तरह मूँह बनाये बैठे रहो, कोई देखने वाला नहीं. सब मास्क के पीछे छिपा रहेगा.कोई फरक नहीं. सब धान बाईस पसेरी वाला मुहावरा इससे बेहतर कहाँ सटीक बैठेगा?अब...
समीर लाल
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अक्सर सुनते थे कि फलाना आदतन अपराधी है. बार बार जेल जाता है. छूटता है फिर अपराध करता है, फिर जेल चला जाता है. कोई आदतन शराबी होता है. कितना ही उधार में डूब जाये, स्वास्थय गिर जाये, बीबी छूट जाये मगर आदत ऐसी कि शराब नहीं छूटती. अभी लॉकडाउन में तो ५ गुना रकम देकर भी...
समीर लाल
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आपदा लाख कहर बरपाये लेकिन साथ में अथाह ज्ञान का सागर भी लाती है. चाहे पढ़े लिखे हों या अनपढ़, सब आपदा की मार से ज्ञानी हो जाते हैं. शायद हमारे समय स्कूल में इसीलिए पीटा जाता होगा कि बिना मार खाये ज्ञानी न हो पाओगे.दिन में दो बार हाथ धोने वालों को इस आपदा की मार ने सि...
समीर लाल
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कोरोना ने सबको चपेट में लिया है. जनता से सरकार तक सभी अपने अपने हिसाब से जुटे हैं इसका सामना करने में. सरकार सुनिश्चित करने में लगी है कि लोगों को बहुत परेशानी न हो और जहाँ तक हो सके, जनता को नुकसान न हो. न जाने कितनों की नौकरियाँ चली गई, कितनों के धंधे बंद हो गये....