ब्लॉगसेतु

जेन्नी  शबनम
0
एक गुलमोहर का इन्तिज़ार है ******* उम्र के सारे वसंत वार दिए   रेगिस्तान में फूल खिला दिए   जद्दोजहद चलती रही एक अदद घर की   रिश्तों को सँवारने की   हर डग पर चाँदनी बिखराने की   हर कण में सूरज उगाने की&nbsp...
 पोस्ट लेवल : व्यथा स्त्री
जेन्नी  शबनम
0
स्मृति में तुम (11 हाइकु)*******1. स्मृति में तुम   जैसे फैला आकाश   सुवासित मैं।   2. क्षणिक प्रेम   देता बड़ा आघात   रोता है मन।   3. अधूरी चाह   भटकता है मन   नहीं...
 पोस्ट लेवल : व्यथा हाइकु प्रेम
जेन्नी  शबनम
0
अब डर नहीं लगता ******* अब डर नहीं लगता!   न हारने को कुछ शेष   न किसी जीत की चाह   फिर किस बात से डरना?   सब याद है   किस-किस ने प्यार किया   किस-किस ने दुत्कारा   किस-किस ने छला ...
 पोस्ट लेवल : व्यथा वक़्त जीवन
0
--आँखों की कोटर में,जब खारे आँसू आते हैं।अन्तस में उपजी पीड़ा की,पूरी कथा सुनाते हैं।।--धीर-वीर-गम्भीर इन्हें,चतुराई से पी लेते हैं,राज़ दबाकर सीने में,अपने लब को सी लेते हैं,पीड़ा को उपहार समझ,चुपचाप पीर सह जाते हैं।अन्तस में उपजी पीड़ा की,पूरी कथा सुनाते हैं।।--च...
 पोस्ट लेवल : गीत आँसू की कथा-व्यथा
जेन्नी  शबनम
0
मुट्ठी से फिसल गया ******* निःसंदेह, बीता कल नहीं लौटेगा   जो बिछड़ गया, अब नहीं मिलेगा   फिर भी रोज़-रोज़ बढ़ती है आस   कि शायद मिल जाए वापस   जो जाने अनजाने, बंद मुट्ठी से फिसल गया।   खुशियों की ख़्वाहिश. गो...
 पोस्ट लेवल : व्यथा समाज रिश्ते
जेन्नी  शबनम
0
तकरार ******* आत्मा और बदन में तकरार जारी है,   बदन छोड़कर जाने को आत्मा उतावली है   पर बदन हार नहीं मान रहा   आत्मा को मुट्ठी से कसके भींचे हुए है   थक गया, मगर राह रोके हुए है।   मैं मूकदर्शक-स...
जेन्नी  शबनम
0
पत्थर या पानी *******  मेरे अस्तित्व का प्रश्न है -   मैं पत्थर बन चुकी या पानी हूँ?   पत्थरों से घिरी मैं, जीवन भूल चुकी हूँ   शायद पत्थर बन चुकी हूँ   फिर हर पीड़ा, मुझे रूलाती क्यो है?   हर बार पत्...
 पोस्ट लेवल : व्यथा स्त्री
जेन्नी  शबनम
0
दागते सवाल ******* यही तो कमाल है   सात समंदर पार किया, साथ समय को मात दी   फिर भी कहते हो -   हम साथ चलते नहीं हैं।   हर स्वप्न को, बड़े जतन से ज़मींदोज़ किया   टूटने की हद तक, ख़ुद को लुटा दिया   ...
 पोस्ट लेवल : व्यथा स्त्री ज़िन्दगी
जेन्नी  शबनम
0
जून 2019 की बात है, एक दिन हमारी ब्लॉगर मित्र श्रीमती रेखा श्रीवास्तव जी का सन्देश प्राप्त हुआ कि वे कुछ ब्लॉगारों के 'अधूरे सपनों की कसक' शीर्षक से अपने संपादन में एक पुस्तक प्रकाशन की योजना बना रही हैं; अतः मैं भी अपने अधूरे सपनों की कसक पुस्तक के लिए लिख भे...
जेन्नी  शबनम
0
परी******* दुश्वारियों से जी घबराए   जाने क़यामत कब आ जाए   मेरे सारे राज़, तुम छुपा लो जग से   मेरा उजड़ा मन, बसा लो मन में ।   पूछे कोई कि तेरे मन में है कौन   कहना कि एक थी परी, गुलाम देश की रानी   ...
 पोस्ट लेवल : व्यथा स्त्री समाज