ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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आहत हुए अल्फ़ाज़ ज़माने की आब-ओ-हवा में,  लिपटते रहे  हाथों  में और  सीने में उतर गये, अल्फ़ाज़ में एक लफ़्ज़ था मुहब्बत, ज़ालिम ज़माना उसका साथ छोड़ गया,   मुक़द्दर से झगड़ता रहा ता-उम्र वह,  मक़ाम मानस अपना बदलता गया,&nbs...
Yashoda Agrawal
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पूछो न बिना तुम्हारे कैसे सुबह से शाम हुईपी-पीकर जाम यादों के ज़िंदगी नीलाम हुईदर्द से लबरेज़ हुआ कोरा काग़ज़ दिल कालड़खड़ाती हर साँस ख़ुमारी में बदनाम हुईइंतज़ार, इज़हार, गुलाब, ख़्वाब, वफ़ा, नशातमाम कोशिशें सबको पाने की सरेआम हुईक्या कहूँ वो वादा-ए-दस्तूर  निभा न सके&n...
Kailash Sharma
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आज दिल ने है कुछ कहा होगा,अश्क़ आँखों में थम गया होगा।आज खिड़की नहीं कोई खोली,कोइ आँगन में आ गया होगा।आज सूरज है कुछ इधर मद्धम,केश से मुख है ढक लिया होगा।दोष कैसे किसी को मैं दे दूं,तू न इस भाग्य में लिखा होगा।दोष मेरा है, न कुछ भी तेरा,वक़्त ही बावफ़ा न रहा होगा।...©क...
डॉ शिव राज  शर्मा
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ख़्वाब, प्यार, वादा, वफ़ा, के कौन है दुश्मन ।ये है बेबसी, गरीबी,धोखा, तन्हाई और जुदाई ।बस नसीब का खेल है और कुछ नहीं प्यारेकिसी को गम मिला तो किसी ने ख़ुशी पाई ।----शिवराज---
डॉ शिव राज  शर्मा
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अपने ही दग़ा करते है अपने ही ज़फ़ा करते हैंऔर जो वफ़ा करते है वो अपने हो जाते हैं अपने ही ख़ुशी लाते हैं अपने ही तड़पाते हैं __शिवराज___
 पोस्ट लेवल : ज़फ़ा वफ़ा दग़ा
राजीव कुमार झा
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गर तुमसे यूँ नहीं मिला होता कोई खटका दिल में नहीं हुआ होता तुम्हें भुलाने की लाख कोशिश की मैंने गर मेरे दिल में नश्तर नहीं चुभोया होता दोस्ती-दुश्मनी में फर्क मिटा दिया तुमने गर अहदे वफ़ा का सिला नहीं दिया होता रास्ते का पत्थर जो समझ लिया तुमने गर ठोकर में न उड़ा दिय...
 पोस्ट लेवल : नश्तर एतबार दिल वफ़ा
सुमन कपूर
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आदतन उसने झूठ से फिर बहलाया हमकोआदतन हम फरेब-ए-वफ़ा को सच मान बैठे !!सु-मन 
 पोस्ट लेवल : फरेब वफ़ा आदत
पत्रकार रमेश कुमार जैन उर्फ निर्भीक
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1. भलाई से अगर हो मौत तो जीने से बेहतर है ! बुराई का तो जीना मौत के सदमें से बदतर है !!2. चमन वालों ! अगर तर्जे अमल अपना न बदला तो, चमन बदनाम भी होगा चमन वीरान भी होगा !3.  दौर वह आया है, कातिल की सज़ा कोई नहीं ! हर सज़ा उसके लिए है, जिसकी खता कोई नहीं !!4. आह !...
विनय प्रजापति
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शायिर: वक़ील ख़ान 'बेदिल' (सम्भल)हर किसी को वफ़ा नहीं मिलतीदर्दे-दिल को दवा नहीं मिलतीकैसा इंसाफ़ है ज़माने काज़ालिमों को सज़ा नहीं मिलतीवो बड़े बद्-नसीब होते हैंजिनको माँ की दुआ नहीं मिलतीनुख़्ले-उल्फ़त1 जहाँ पनपता होकहीं ऐसी फ़ज़ा नहीं मिलतीहाय ऐ दौरे-नौ2 तेरा फ़ैशनओढ़ने क...
विनय प्रजापति
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शायिरा: शिबली हसन 'शैल'गर तुम्हारी कमी नहीं होतीबेवफ़ा ज़िन्दगी नहीं होतीहर कोई क्यों फ़रेब देता हैज़िन्दगी क्यों मेरी नहीं होतीबेच देती ज़मीर गर अपनाघर में कुछ कमी नहीं होतीबेवफ़ा है वो जानती हूँ मैंप्यार में कुछ कमी नहीं होतीदिल जलाकर भी 'शैल' देखा हैघर में अब रोशनी नह...