ब्लॉगसेतु

Basudeo Agarwal
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आओ करें प्रण और अब आतंक को सहना नहीं,अब मौन ज्यादा और हम सब को कभी रहना नहीं,आतंक में डर डर के जीना भी भला क्या ज़िंदगी,अब कर दिखाना कुछ हमें बस सिर्फ कुछ कहना नहीं।(2212×4)*********किस अभागी शाख का लो एक पत्ता झर गया फिर,आसमां से एक तारा टूट कर के है गिरा फिर,सरहदो...
sanjiv verma salil
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  कृति सलिला: जीवन के झंझावातों से जूझता "अधूरा मन "संजीव [अधूरा मन, उपन्यास।, प्रथम संस्करण २००९, आकार २२ से.मी. x १४ से.मी., आवरण बहुरंगी, सजिल्द जैकेट सहित, पृष्ठ १७९, मूल्य १५०/-, तिवारी ग्राफिक्स एन्ड पब्लिकेशंस भोपाल]हिंदी साहित्य की...
Bharat Tiwari
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जिस समय की कोपल पीढ़ी मंटो को ढूंढ ढूंढ कर पढ़ रही हो उसे और परिपक्व दोनों ही को मंटो की कहानी 'एक प्रेम कहानी' आज वैलेंटाइन डे पर पढ़ाने की सोच है जो आपके लिए यह लायी है...भरत एस तिवारी
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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अरे!यह क्या ?अराजकता में झुलसता मेरा देश,अभागी चीख़ में सिसकता परिवेश।सरकारी शब्दजाल नेऊबड़खाबड़ घाटियों में धकेला है,शहर-शहर विरोध कामहाविकट स्वस्फूर्त रेला है,होंठ भींचे मुट्ठियाँ कसते नौजवानकोई मुँह छिपाकर देशद्रोहीजलाता अपना देश,अभागी चीख़ में सिसकता परिवेश।रक...
अनीता सैनी
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समझ सभी की अपनी समझ से फुसफुसा रही है, किसी की ज़्यादा  किसी की कम दौड़ लगा रही है, हदों के पार ताकती कुछ तो बुदबुदा रही है, झुरमुट बना कभी झाँकती दरीचे से, कभी ख़ुद को महफूज़ कर रही है |सन्नाटें के संग दौड़ कुछ तो सुना रही है,  सुने-सुनाये...
PRAVEEN GUPTA
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साभार: Agrawal Samaj Shivpur Seonimalwa फेसबुक वाल से 
mahendra verma
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छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए इस मौसम में ‘ओल’ महत्वपूर्ण हो जाता है । रबी फसल के लिए खेत की जुताई-बुआई के पूर्व किसान यह अवश्य देखता है कि खेत में ओल की स्थ्ति क्या है । ओल मूलतः संस्कृत भाषा का शब्द है । विशेष बात यह है कि ओल का जो अर्थ संस्कृत में है ठीक वही अर्थ छ...
सुशील बाकलीवाल
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           बाबु मोशाय... कभी-कभी ऐसा होता है कि किसी आदमी ने हमारा कोई भला नहीं किया लेकिन वो हमें अच्छा लगता है । हाँ...  और कभी-कभी ऐसा भी होता है कि किसी आदमी ने हमारा कोई बुरा नहीं किया, लेकिन वो हमें बिल्कुल...
Basudeo Agarwal
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मानस सागर की लहरों के हैं उफान मेरे आँसू,वर्षों से जो दबी हृदय में वो पीड़ा कहते आँसू,करो उपेक्षा मत इनकी तुम सुनलो ओ दुनियाँ वालों,शब्दों से जो व्यक्त न हो उसको कह जाते ये आँसू।(2×15)*********देख कर के आपकी ये जिद भरी नादानियाँ,हो गईं लाचार सारी ही मेरी दानाइयाँ,झे...
Bharat Tiwari
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#पत्र_शब्दांकन: मृदुला गर्ग नया ज्ञानोदय, सितम्बर २०१९ कथा-कहानी विशेषांक आदि परकहते हैं फंतासी को चारों पैरों पर खड़ा होना चाहिए वरना न फंतासी रहती है, न सच...कहानी 'नरम घास, चिड़िया और नींद में मछलियां')  मैने 'नया ज्ञानोदय' में ही पढ़ ली थी। बहुत ही शानदा...