ब्लॉगसेतु

Basudeo Agarwal
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इतना भी ऊँची उड़ान में, खो कर ना इतराओ,पाँव तले की ही जमीन का, पता तलक ना पाओ,मत रौंदो छोटों को अपने, भारी भरकम तन से,भारी जिनसे हो उनसे ही, हल्के ना हो जाओ।(सार छंद)*********बिल्ले की शह से चूहा भी, शेर बना इतराता है,लगे गन्दगी वह बिखेरने, फूल फुदकता जाता है,खोया ह...
Basudeo Agarwal
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हिफ़ाजत करने फूलों की रचे जैसे फ़ज़ा काँटे, खुशी के साथ वैसे ही ग़मों को भी ख़ुदा बाँटे,अगर इंसान जीवन में खुशी के फूल चाहे नित,ग़मों के कंटकों को भी वो जीवन में ज़रा छाँटे।(1222×4)*********मौसम-ए-गुल ने फ़ज़ा को आज महकाया हुआहै,आमों पे भी क्या सुनहरा बौर ये आया हुआ है...
Basudeo Agarwal
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ढ़ोते जो हम बोझ चार पे, तुम वो दो पर ढ़ोते हो,तरह हमारी तुम भी खाते, पीते, जगते, सोते हो,पर उसने वो समझ तुम्हें दी, जिससे तुम इंसान बने,वरना हम तुम में क्या अंतर, जो गरूर में खोते हो।(लावणी छंद आधारित)*********बल बुद्धि शौर्य के स्वामी तुम, मानव जग में कहलाते हो,तुम...
Basudeo Agarwal
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बेवज़ह सी ज़िंदगी में कुछ वज़ह तो ढूंढ राही,पृष्ठ जो कोरे हैं उन पर लक्ष्य की फैला तु स्याही,सामने उद्देश्य जब हों जीने की मिलती वज़ह तब,चाहतें मक़सद बनें गर हो मुरादें पूर्ण चाही।(2122*4)**********वैशाखियों पे ज़िंदगी को ढ़ो रहे माँ बाप अब,वे एक दूजे का सहारा बन सहे संता...
Basudeo Agarwal
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देखिए इंसान की कैसे शराफत मर गई,लंतरानी रह गई लेकिन सदाकत मर गई,बेनियाज़ी आदमी की बढ़ गई है इस कदर,पूर्वजों ने जो कमाई सब वो शुहरत मर गई।आदमी के पेट की चित्कार हैं ये रोटियाँ,ईश का सबसे बड़ा उपहार हैं ये रोटियाँ।मुफलिसों के खून से भरतें जो ज़ाहिल पेट को,ऐसे लोगों के लि...
Basudeo Agarwal
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आओ करें प्रण और अब आतंक को सहना नहीं,अब मौन ज्यादा और हम सब को कभी रहना नहीं,आतंक में डर डर के जीना भी भला क्या ज़िंदगी,अब कर दिखाना कुछ हमें बस सिर्फ कुछ कहना नहीं।(2212×4)*********किस अभागी शाख का लो एक पत्ता झर गया फिर,आसमां से एक तारा टूट कर के है गिरा फिर,सरहदो...
Basudeo Agarwal
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मानस सागर की लहरों के हैं उफान मेरे आँसू,वर्षों से जो दबी हृदय में वो पीड़ा कहते आँसू,करो उपेक्षा मत इनकी तुम सुनलो ओ दुनियाँ वालों,शब्दों से जो व्यक्त न हो उसको कह जाते ये आँसू।(2×15)*********देख कर के आपकी ये जिद भरी नादानियाँ,हो गईं लाचार सारी ही मेरी दानाइयाँ,झे...
Basudeo Agarwal
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बेवज़ह सी जिंदगी में कुछ वज़ह तो ढूंढ राही,पृष्ठ जो कोरे हैं उन पर लक्ष्य की फैला तु स्याही,सामने उद्देश्य जब हों जीने की मिलती वज़ह तब,चाहतें मक़सद बनें गर हो मुरादें पूर्ण चाही।(2122*4)**********वैशाखियों पे जिंदगी को ढ़ो रहे माँ बाप अब,वे एक दूजे का सहारा बन सहे संता...