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Ravindra Pandey
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चौड़ी छाती है वीरों की,गगनभेदी हुँकार है...नाम धनंजय, रुद्र, विनोद,करतम, माझी, करतार है...अब तो कोई जतन करे,कोई तो समाधान हो...ऐसा ना हो सुंदर बस्तर,खुशियों का शमशान हो...दारुण दुःख सहते सहते,देखो पीढ़ी गुज़र रही...बारूदों के ढेर में बैठी,साल की बगिया उजड़ रही...तन आहत...
Kajal Kumar
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