ब्लॉगसेतु

Yashoda Agrawal
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आज के बिछुड़े न जाने कब मिलेंगे?आज से दो प्रेम योगी अब वियोगी ही रहेंगे!आज के बिछुड़े न जाने कब मिलेंगे?सत्य हो यदि‚ कल्प की भी कल्पना कर धीर बाँधूँ‚किंतु कैसे व्यर्थ की आशा लिये यह योग सांंधूँ?जानता हूं अब न हम तुम मिल सकेंगे!आज के बिछुड़े न जाने कब मिलेंगे?आयेगा मधु...
विजय राजबली माथुर
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इंटरनेशनल बिज़नेस ब्रोकर का कश्मीर से क्या लेना देना? भारत सरकार को कश्मीर के मामले में इंटरनेशनल ब्रोकर की ज़रूरत क्यों पड़ी? भारत आए यूरोपियन संघ के सांसदों को कश्मीर ले जाने की योजना जिस अज्ञात एनजीओ के ज़रिए तैयार हुई उसका नाम पता सब बाहर आ गया है. यह समझ से ब...
Kailash Sharma
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कितनी दूर चला आया हूँ,कितनी दूर अभी है जाना।राह है लंबी या ये जीवन,नहीं अभी तक मैंने जाना।नहीं किसी ने राह सुझाई,भ्रमित किया अपने लोगों ने।अपनी राह न मैं चुन पाया,बहुत दूर जाने पर जाना।बढ़े हाथ उनको ठुकराया,अपनों की खुशियों की खातिर।लेकिन आज सोचता हूँ मैं,अपने दिल क...
Sandhya Sharma
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करवा चौथमैं यह व्रत करती हूँअपनी ख़ुशी सेबिना किसी पूर्वाग्रह केकरती हूँ अपनी इच्छा सेअन्न जल त्यागक्योंकि मेरे लिएयह रिश्ता ....इनसे भी ज़्यादा महत्वपूर्ण हैमेरे लिए यह उत्सव जीवन मेंउस अहसास की ख़ुशी व्यक्त करता हैकि उस ख़ास व्यक्ति के लिएमैं भी उतनी ही ख़ास हूँमैं उल...
Yashoda Agrawal
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गर बेटियों का कत्ल यूँ ही कोख में होता रहेगा!शर्तिया इन्सान अपनी पहचान भी खोता रहेगा!!मर जायेंगे अहसास सारे खोखली होगी हँसी,साँस लेती देह बस ये आदमी ढोता रहेगा!!स्वर्ग जाने के लिए बेटे की सीढी ढूँढ कर,नर्क भोगेगा सदा ये आदमी रोता रहेगा...
Yashoda Agrawal
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तुम्हारे चाहने से रंग नहीं बदलतेप्रेम नहीं बदलतेखून लाल ही रहता हैऔर आसमान नीलाजैसे प्रेम बढ़ता हैखून अधिक लाल हो जाताआसमान अधिक नीलाबढ़ते रंगों मेंहम-तुम एक से हो गयेदेखो !प्रेम हमारा इंद्रधनुष बन रहाबरस रहाअब धरती सुनहरी हो चली है ।@दीप्ति शर्मामूल रचना
 पोस्ट लेवल : दीप्ति शर्मा
sanjiv verma salil
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सरस्वती वंदना रजनी शर्मा जन्म - १५ मार्च ६७, जगदलपुर।  आत्मजा - स्व. सीता देवी-स्व. चुम्मन धर दुबे।  जीवन साथी - श्री अजय कुमार शर्मा।  शिक्षा - बी. एससी., एम. ए. (अंग्रेजी, राजनीति) एम. एड.।संप्रति - व्याख्याता अंग्रेजी सुरज...
Kailash Sharma
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चारों ओर पसरा है सन्नाटामौन है श्वासों का शोर भी,उघाड़ कर चाहता फेंक देनाचीख कर चादर मौन की,लेकिन अंतस का सूनापनखींच कर फिर से ओढ़ लेता चादर सन्नाटे की।पास आने से झिझकतासागर की लहरों का शोर,मौन होकर गुज़र जाता दरवाज़े से दबे क़दमों से भीड़ का कोलाहल, अनकहे...
Sandhya Sharma
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 ख़यालों के पंख लगाकरख़्वाबों की उड़ान भरकरकितनी भी दूर क्यों न चली जाएलेकिन लौट आती है "मेरी नज़्म"उतर आती है ज़मी परमेरे साथ नंगे पाँव घूमती हैपत्ता-पत्ता, डाल-डाल, बूटा -बूटाइसलिए तो तरोताज़ा रहती हैजब कभी यादों के सात समंदर पार करकेथककर निढाल हो जाती हैतो बैठ जा...
विजय राजबली माथुर
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   Nupur Sharma25-08-2019  at 10:00 AM UPDATE: Break from URDU WALA CHASHMA (@The Wire) - after TWO years of a TRANSFORMATIVE & ENRICHING experience - I’ll be taking a TEMPORARY BREAK.AGENDA:1) At this point in life I feel the need to...