ब्लॉगसेतु

अनंत विजय
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पाकिस्तानी वामपंथी शायर फैज अहमद फैज एक बार फिर से चर्चा में हैं। ये चर्चा गैर साहित्यिक विवाद की वजह से शुरू हुई। इसमें साहित्य के कई विद्वान कूद गए और इसको एक अलग ही रंग देने की कोशिश शुरू कर दी। आईआईटी कानपुर में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन में फैज क...
अजय  कुमार झा
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दो पंक्तियों में लिखे हुए कुछ शब्द जो मुहब्बत और ज़िंदगी के फलसफों को समझने के लिए लिखे गए | देखिये आप भी , इन्हें मैं अनाम आदमी के नाम से अलग अलग मंचों पर साझा करता रहा हूँ | यदि प्रयास पसंद आए तो चैनल के साथी बनें |
सुशील बाकलीवाल
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                                            दूर से देखा तो बडे ही सुहाने मन्जर थे,पास पहुंचे तो देखा सारे खेत ब॑जर थे !हम उनके पास से भी प्यासे लौटे,जिनकी...
ज्योति  देहलीवाल
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प्रभु ईसा मसीह के जन्मदिन के तौर पर दुनिया भर में क्रिसमस का त्यौहार पूरे उमंग और उल्लास के साथ मनाया जाता हैं। ईसाई समुदाय का यह सबसे प्रमुख और बड़ा त्योहार हैंं। इस मौके पर सभी अपने रिश्तेदारों, परिचितों और दोस्तों को शुभकामना संदेश भेजते हैं। इसलिए 'आपकी सहेली' य...
ज्योति  देहलीवाल
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दशहरा या विजयादशमी भगवान राम की विजय के रुप में मनाया जाता हैं। दशहरा एक प्रसिद्ध हिन्दू त्योहार है जो अच्छाई की बुराई पर जीत की ख़ुशी में मनाया जाता है। यहां पर दशहरा की 15 शुभकामनाएं दी गई हैं जो आप विजयादशमी पर अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को भेज सकते हैं। 1...
ज्योति  देहलीवाल
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नवरात्रि पर्व पुरे भारत में बहुत उत्साह के मनाया जाता है। हिंदू धर्म के लोग इस त्यौहार को भारत के अलग-अलग भागों में अलग-अलग तरह से मनाते है। एक-दुसरे को बधाई सन्देश, भेजते हैं। ‘आपकी सहेली’ नवरात्रि पर बधाई सन्देश, मैसेज, SMS, Quotes और नवरात्रि शायरी संग्रह आपके स...
Sanjay  Grover
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ग़ज़लकोई पत्ता हरा-सा ढूंढ लियातेरे घर का पता-सा ढूंढ लियाजब भी रफ़्तार में ख़ुद को खोयाथोड़ा रुकके, ज़रा-सा ढूंढ लियाउसमें दिन-रात उड़ता रहता हूंजो ख़्याल आसमां-सा ढूंढ लियाशहर में आके हमको ऐसा लगादश्त का रास्ता-सा ढूंढ लियातेरी आंखों में ख़ुदको खोया मगरशख़्स इक लापता-सा...
ज्योति  देहलीवाल
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गुरु शब्द में ही गुरु की महिमा का वर्णन है। ‘गु’ का अर्थ है ‘अंधकार’ और ‘रु’ का अर्थ है ‘प्रकाश’। इसलिए गुरु का अर्थ है अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला। यानी गुरु ही शिष्य को जीवन में सफलता के लिए उचित मार्गदर्शन करता है। हिंदू धर्म में आषाढ़ मास की पूर्णिमा का...
Juban-ए- दास्तां
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अपनों का ये कैसा मंज़र देख रहा हूँ,मैं आज रिश्तों को बिखरता देख रहा हूँ।जिनके आँगन में गूंजती थी कभी,मेरे बचपन की किलकारियां,वहां आज अपनी जवानी को सिसकता देख रहा हूँ,मैं आज रिश्तों को बिखरता देख रहा हूँ।कभी था जिस घर में वो मंज़र प्यार का,आज उन्ही के हाथों में,नफ़रत क...
Juban-ए- दास्तां
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अक्सर ऐसा होता हैजब दो "जन" बात करते हैंएक रिश्ता बन जाता हैफिर प्रेम भरी तकरार कासमाँ बन्ध सा जाता हैउम्मीद जुड़ जाती हैकही निराशा हो जाती है"उसकी" फ़िक्र भीतर साँस लेती हैअक्सर ऐसा होता है...ख्याल सो जाते हैंनींद जागती रहती है...आँखे नम हो जाती हैकुछ थम सा जाता हैस...