ब्लॉगसेतु

मनीष कुमार
144
मेघालय में बिताए हमारे आख़िरी दिन की शुरुआत तो लैटलम कैनयम की भुलभुलैया से हुई थी। पर वहाँ से लौटने के बाद हमारा इरादा वहाँ के बेहद प्रसिद्ध संग्रहालय डॉन वास्को म्यूजियम को देखने का था। ऐसा सुना था कि ये संग्रहालय उत्तर पूर्वी राज्यों की संस्कृति को जानने समझने की...
मनीष कुमार
144
मावलीनांग से शिलांग लौटने के बाद हमारे पास एक दिन और बचा था। मैंने शिलांग आने के पहले  इंटरनेट पर लैटलम कैनयन के बारे में पढ़ा था। वहाँ की खूबसूरत वादियों का जिक्र तो था ही, साथ ही ये हिदायत भी थी कि भीड़ भाड़ से दूर इस सुनसान इलाके में पहुँचना टेढ़ी खीर है इसलिए रास्त...
मनीष कुमार
144
शिलांग प्रवास के दूसरे दिन हमने चेरापूंजी की राह पकड़ी । अब यूँ तो चेरापूँजी बारिश के लिए जाना जाता है पर उस दिन आसमान लगभग साफ था। काले बादलों का  दूर दूर तक कोई नामो निशान नहीं था। शिलांग से चेरापूंजी की दूरी साठ किमी की है, जिसे रुकते रुकते भी आराम  से...
मनीष कुमार
144
मेरी मेघालय यात्रा की पहली कड़ी में आपने देखा आसमान से दिखते शिलांग के आस पास के हरे भरे इलाकों को। रात को पूजा की गहमागहमी के बाद जब अगली सुबह उठे तो मौसम बिल्कुल साफ था। रात को ही पता चला था कि वहाँ के किसी स्थानीय समूह ने मेघालय बंद का आह्वान किया है। गाड़ीवाला जि...
मनीष कुमार
144
कुछ साल पहले की बात है। हिंदी में यात्रा लेखन कर रही एक उत्तर पूर्व की छात्रा ने मुझसे अपने शोध के लिए सिक्किम यात्रा वृत्तांत से जुड़े सवाल पूछे थे। साथ ही ये प्रश्न भी किया था कि सिक्किम के आलावा उत्तर पूर्व के किसी राज्य में क्या आप नहीं गए?  मैंने उससे कहा...