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sanjiv verma salil
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दोहा सलिला  रूप नाम लीला सुनें, पढ़ें गुनें कह नित्य।मन को शिव में लगाकर, करिए मनन अनित्य।।*महादेव शिव शंभु के, नामों का कर जाप।आप कीर्तन कीजिए, सहज मिटेंगे पाप।।*सुनें ईश महिमा सु-जन, हर दिन पाएं पुण्य।श्रवण सुपावन करे मन, काम न आते पण्य।।*पालन संयम-नियम का,...
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sanjiv verma salil
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दोहा-दोहा शिव बसे.शिव न जोड़ते श्रेष्ठता,शिव न छोड़ते त्याज्य.बिछा भूमि नभ ओढ़ते,शिव जीते वैराग्य..शिव सत् के पर्याय हैं,तभी सती के नाथ.अंग रमाते असुंदर,सुंदर धरते माथ..शिव न असल तजते कभी,शिव न नकल के साथ.शिव न भरोसे भाग्य के,शिव सच्चे जग-नाथ..शिव नअशिव से दूर हैं,...
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sanjiv verma salil
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दोहा-दोहा शिव बसे  -उदय भानु का जब हुआ,तभी ही हुआ प्रभात.नेह नर्मदा सलिल में,क्रीड़ित हँस नवजात..बुद्धि पुनीता विनीता,शिविर की जय-जय बोल.सत्-सुंदर की कामना,मन में रहे टटोल..शिव को गुप्तेश्वर कहो,या नन्दीश्वर आप.भव-मुक्तेश्वर भी वही,क्षमा ने करते पाप..चित्...
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