ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
0
 वासंती परिधान पहनकरक्षिति दुल्हन-सी शरमाई है शीश मुकुट मंजुल सुमनों का मृदुल हास ले मुसकाई है ।।पोर-पोर शृंगार सुशोभितसुरबाला कोई आई हैमुग्ध घटाए बहकी बहकीघट भर सुषमा छलकाई है।।शाख़-शाख़ बजती शहनाई सौरभ  गंध उतर आई  हैमंद मलय मगन लहराएप...
अनीता सैनी
0
शीतल झरना झरे प्रीत काबहता अनुराग हूँ साथीसींचू सुमन समर्पण से कभी न बग़िया सूखे साथी।मैं तेरे बागों  की शोभादूर्वा बनकर लहराऊँ रात चाँदनी तारों वालीसपना बनकर सज जाऊँ बिछ जाऊँ बन प्रेम पुष्प पाँव चुभे न काँटे साथी ।। देहरी सजत...
 पोस्ट लेवल : प्रेम /शृंगारिक साथी
अनीता सैनी
0
 हर कोई आज-कल प्रेम में हैजैसे भोर की प्रीत में लिप्त हैं रश्मियाँत्याग की पराकाष्ठा के पार उतरती मद्धिम रौशनीसूर्य को आग़ोश में भर नींद में जैसे है सुलाती वैसे ही हर नौजवान आजकल प्रेम में है।गलियों में भटकता प्रेम भी प्रेम है समर्पण की भट्टी में अपना...
 पोस्ट लेवल : प्रेम /शृंगारिक
अनीता सैनी
0
 तमसा के पथ पर उजियाराजुगनू है जीवन का मेरे ।हृदय शाख पर खिले फूल सामधुमास अंगना का मेरे।उजली भोर गाती प्रभातीगुनगुनी धूप सी मृदु बोलीतारक दल से मंजुल चितवनशाँत चित्त मन्नत की मोलीसंवेदन अंतस तक पैंठामानस कोमल सुत का मेरे  ।।आँगन खिलता है शतदल सानयना निरख...
अनीता सैनी
0
 राजस्थानी लोक भाषा में एक नवगीत।गोधुली की वेला छंटगीसाँझ खड़ी है द्वार सखीमन री बाताँ मन में टूटी बीत्या सब उद्गार सखी।।मन मेड़ां पर खड़ो बिजूकोझाला देर बुलावे है धोती-कुरता उजला-उजला हांडी  शीश हिलावे हैतेज़ ताप-सी जलती काया विरह कहे&nb...
अनीता सैनी
0
 दुआ बन निखरुँ जीवन में रोळी-मौळी-सी सजूँ।हँसी बन बिखरुँ होठों परबाती-सी जल धीर धरुँ।लोकगीतों का गुलदस्तामधुर धुन की बाड़ मढूँ ।आँगन में छिड़कूँ प्रीत पुष्पसोनलिया पद छाप गढ़ूँ।अपलक हँसती आँखों कोनमी से कोसों  दूर रखूँ ।बुझे मन पर दीप्ति बनथार अँजु...
अनीता सैनी
0
बहुत दिनों से बहुत ही दिनों से  सुराही पर मैं तुम्हारी यादों के   अक्षर से विरह को सजा रही हूँ छन्द-बंद से नहीं बाँधे उधित भाव कविता की कलियाँ पलकों से भिगो कोहरे के शब्द नभ-सा उकेर रही हूँ। उपमा मन की मीत मिट्टी-सी महकी...
अनीता सैनी
0
 उड़ते खग साथी पवन के  समझते हैं ऋतुओं की मसख़री दर्द,बेचैनी चेहरे के भाव एवं शांतिछिपाते है उड़ान के पीछेयों न कहता कुरजां जहन में दबी बात ।विरह, वेदना परस्परएक दूसरे से घुलेमिले हुए हैसाठ-गाँठ सदियों पुरानी पहले अँधरे में छिपे थेअब उजाले ने...
अनीता सैनी
0
अनदिखे में तुम्हारे होने का आभासदिल को इतना भी बुरा नहीं लगता बुरा नहीं लगता इंतज़ार के दरमियाँपनपने वाले प्रेम को पोषित करना।बुरा नहीं लगता शब्दों के सागर में भावनाओं के ज्वार-भाटे का उतार-चढ़ाव बुरा नहीं लगता पैरों को भिगोती लहर का किनारे&n...
अनीता सैनी
0
प्रसिद्द गायिका, संगीतकार एवं वरिष्ठ ब्लॉगर आदरणीया शुभा मेहता दीदी ने मेरे नवगीत 'मूरत मन की ' को अपना मधुर स्वर देकर संगीतबद्ध किया है। आदरणीया दीदी के स्वर में अपना नवगीत सुनकर मन भावविभोर हो गया।आदरणीया शुभा दीदी का स्नेह और आशीर्वाद सदैव मेरे साथ बना रहे।...