ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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ज़िन्दगी भर इस बात की टीस रहेगी कि कभी आपसे खुलकर बात भी न कर सके. पिता, पुत्र के बीच का जैसा सम्बन्ध आज देखने को मिलता है, उस समय सोचा भी नहीं जा सकता था. कई-कई महीने तो ऐसे निकल जाया करते थे जबकि हमारे और आपके बीच किसी तरह की कोई बातचीत नहीं होती थी. जबसे होश संभा...
ज्योति  देहलीवाल
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मेरे घर पर एक परिचिता आई हुई थी। उसने मुझ से कहा, ''ज्योति, तुम मटके पर लोटा औंधा क्यों रखती हो? मटके पर लोटा औंधा नहीं रखना चाहिए। लोटे में थोड़ा सा ही सही लेकिन पानी जरुर रखना चाहिए। नहीं तो अपशकुन होता हैं!'' ''मटके पर लोटा हम अपनी सुविधानुसार कैसे भी रखे, उ...
ज्योति  देहलीवाल
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गुजरात के मशहूर स्वामीनारायण संप्रदाय के एक मंदिर के स्वामी कृष्णनस्वरुप दास ने पिछले दिनों एक प्रवचन के दौरान कहा कि, यदि महिलाएं मासिक धर्म के दौरान खाना बनाएंगी तो अगले जन्म में वह श्वान पैदा होगी। सोच और समझ का दुर्भाग्य यहीं खत्म नहीं होता तो इसी संस्थान द्वार...
kumarendra singh sengar
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गणतंत्र दिवस हो या फिर स्वतंत्रता दिवस, इन राष्ट्रीय पर्वों पर दिल-दिमाग पर एक अजब तरह की खुमारी चढ़ी रहती है. ऐसे माहौल में, जबकि देह का रोम-रोम देशभक्ति के एहसास में डूबा रहता है किसी भी देशभक्त के प्रति अनादर जैसी स्थिति देख मन विचलित हो जाता है. कुछ ऐसा ही हमारे...
kumarendra singh sengar
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वो आज की ही तारीख थी, 31 दिसम्बर. तैयारियाँ ख़ुशी की स्थिति में चल रही थीं और उसी समय दुखद खबर का आना हुआ. जहाँ जाना था, जाना उसी दिशा में हुआ; उसी मंजिल को हुआ मगर अब जाते समय मन की स्थिति अलग थी. सबकुछ समझने के बाद भी न समझने जैसी स्थिति बनी हुई थी. हाथ से निकल चु...
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हिन्दी साहित्य काउभरता हुआ युवा सिताराअमन चाँदपुरी नहीं रहा...*****************मेरे लिए यह व्यक्तिगत क्षति है।11 अप्रैल, 2016 कौ मैंनेखटीमा में आयोजित दोहाकार समागम मेंउन्हें “दोहा शिरोमणि से अलंकृत किया था।*****************श्रद्धांजलि स्वरूप उन्हीं की एक क्षणिक...
kumarendra singh sengar
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परिवार में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपने आपमें एक आधार स्तम्भ होते हैं. उनके न कहने के बाद भी वे किसी न किसी रूप में परिवार को एकसूत्र में जोड़े रखने का काम करते हैं. परिवार की मान-मर्यादा को, उसकी प्रतिष्ठा को, उसके वर्चस्व को ऐसे ही लोगों के द्वारा स्वतः ही स्थापना...
kumarendra singh sengar
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अपने गाँव बचपन से ही जाना होता रहता था. गर्मियों की छुट्टियाँ कई बार गाँव में ही बिताई गईं. इसके अलावा चाचा लोगों के साथ भी अक्सर गाँव जाना होता रहता था. हमारे गाँव जाने के क्रम में कोई न कोई साथ रहता था मगर उस बार अकेले जाना हो रहा था. बिना किसी कार्यक्रम के, बिना...
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सबके अपने ढंग हैं, सबके अलग रिवाज।श्राद्ध पक्ष में कीजिए, विधि-विधान से काज।।--श्रद्धा से ही कीजिए, निज पुरुखों को याद।श्रद्धा ही तो श्राद्ध की, होती है बुनियाद।।--मात-पिता को मत कभी, देना तुम सन्ताप।पितृपक्ष में कीजिए, वन्दन-पूजा-जाप।।--जिनके पुण्य-प्रताप...
ज्योति  देहलीवाल
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शिल्पा का दस वर्षिय बेटा सुहास आंगण में खेल रहा था। उसने बेटे से कहा, ''तुम आंगण में खेल रहे हो...गैया आई तो ख्याल रख कर मुझे आवाज़ लगा देना...मुझे गैया को रोटी देनी हैं।'' इतना कह कर वो अपने काम करने लग गई। थोड़ी देर बाद ही सुहास की आवाज़ आई, ''मम्मी, गैया आ ग...