ब्लॉगसेतु

Yashoda Agrawal
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सृष्टि से उत्पन्नब्रह्मांड के चर-अचरसमस्त जीव-निर्जीवग्रह-गोचर,नक्षत्र,उल्का,पिंडजीवन,प्रकृति का सूक्ष्म से सूक्ष्म कण,सभी अपनी निर्धारितसीमाओं से बँधेअपनी निश्चित परिधियों में घूमतेतट से वचनबद्धनिरंतर अपनेकर्मपथ पर,अपनी तय उम्र जीने कोविवश हैंक्योंकि निर्धारि...
 पोस्ट लेवल : श्वेता सिन्हा
Yashoda Agrawal
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ठाठें मारता ज्वार से लबरेज़नमकीन नहीं मीठा समुंदरतुम्हारी आँखेंतुम्हारे चेहरे कीमासूम परछाईमुझमें धड़कती है प्रतिक्षणटपकती है सूखे मन परबूँद-बूँद समातीएकटुक निहारतीतुम्हारी आँखेंनींद में भी चौंकातीरह-रह कर परिक्रमा करतीमन के खोह,अबूझ कंदराओं,चोर तहखानों कास्वप्न...
 पोस्ट लेवल : श्वेता सिन्हा
Yashoda Agrawal
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नज़र-नज़र की बात हैसच-झूठ,दिन या रात हैख़ामोश हुई सिसकियाँबहते हुये ज़ज़्बात हैं लब थरथरा के रह गयेनज़रों की मुलाकात हैसाँसों की ये सरगोशियाँनज़रों की ही सौगात हैरोया है कोई ज़ार-ज़ारबिन अभ्र ही बरसात हैदिल की बिछी बिसात परनज़रों की शह और मात हैमनमर्ज़ियाँ चलती हो जबनजरो...
 पोस्ट लेवल : श्वेता सिन्हा
Yashoda Agrawal
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देह की परिधियों तकसीमित करस्त्री की परिभाषाहै नारेबाजी समानता की।दस हो या पचासकोख का सृजनउसी रजस्वला काल से संभवतुम पवित्र हो जन्म लेकरजन्मदात्रीअपवित्र कैसे?रुढ़ियों को मान देकरअपमान मातृत्व कामान्यता की आड़ मेंअहं तुष्टि यासृष्टि केशुच...
 पोस्ट लेवल : श्वेता सिन्हा
Yashoda Agrawal
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मौन हृदय के आसमान परजब भावों के उड़ते पाखी,चुगते एक-एक मोती मन का फिर कूजते बनकर शब्द।कहने को तो कुछ भी कह लोन कहना जो दिल को दुखाय,शब्द ही मान है,शब्द अपमानचाँदनी,धूप और छाँव सरीखे शब्द।न कथ्य, न गीत और हँसी निशब्दरूंधे कंठ प्रिय को न कह पाये मीत,पीकर हृदय की...
 पोस्ट लेवल : श्वेता सिन्हा
Yashoda Agrawal
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चित्र-मनस्वी प्रांजललीपे चेहरों की भीड़ मेंसच-झूठ पहचाने कैसे?अनुबंध टूटते विश्वास कीमौन आहट जाने कैसे?नब्ज संवेदना की टटोलेमोहरे बना कर मासूमियत को,शह मात की बिसात में खेलेशकुनियों के रुप पहचाने कैसे?खींचते है प्राण,अजगर बननिष्प्राण अवचेतन करकेनिगलते सशरीर धीरे-धीर...
 पोस्ट लेवल : श्वेता सिन्हा
Yashoda Agrawal
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देह की परिधियों तकसीमित करस्त्री की परिभाषाहै नारेबाजी समानता की।दस हो या पचासकोख का सृजनउसी रजस्वला काल से संभवतुम पवित्र हो जन्म लेकरजन्मदात्रीअपवित्र कैसे?रुढ़ियों को मान देकरअपमान मातृत्व कामान्यता की आड़ मेंअहं तुष्टि यासृष्टि केशुच...
 पोस्ट लेवल : श्वेता सिन्हा
Yashoda Agrawal
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कंधे पर फटकर झूलतीमटमैली धूसर कमीजचीकट हो चुकीधब्बेदार नीली हाफ पैंट पहनेजूठी प्यालियों को नन्हीमुट्ठियों में कसकर पकड़ेइस मेज से उस मेज दौड़तासाँवले चेहरे पर चमकतीपीली आँख मटकाताभोर पाँच बजे ही से चाय-समोसे की दुकान परनन्हा दुबला मासूम सा 'छोटू'किसी की झिड़की, क...
 पोस्ट लेवल : श्वेता सिन्हा
Yashoda Agrawal
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पिघल रही सर्दियाँझर रहे वृक्षों के पातनिर्जन वन के दामन मेंखिलने लगे पलाशसुंदरता बिखरी फाग कीचटख रंग उतरे घर आँगनलहराई चली नशीली बयारलदे वृक्ष भरे फूल पलाशसिंदूरी रंग साँझ कीमल गये नरम कपोलतन सजे रेशमी चुनर-सीकेसरी फूल पलाशआमों की डाली पे गायेकोयलिया विरहा रागअकुला...
 पोस्ट लेवल : श्वेता सिन्हा
Yashoda Agrawal
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सोनचिरई मेरी मिसरी डली बगिया की मेरी गुलाबी कली प्रथम प्रेम का अंकुर बनजिस पल से तुम रक्त में घुली रोम-रोम, तन-मन की छायातुम धड़कन हो श्वास में ढली नन्ही नाजुक छुईमुई गु़ड़ियाछू कर रूई-फाहे-सी देह को,डबडब भर आयी थी अँखियाँ स्पर्श हुई थी जब उं...
 पोस्ट लेवल : श्वेता सिन्हा