ब्लॉगसेतु

Yashoda Agrawal
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दृष्टिभरप्रकृति का सम्मोहननिःशब्द नादमौन रागिनियों काआरोहण-अवरोहणकोमल स्फुरण,स्निग्धतारंग,स्पंदन,उत्तेजना,मोहक प्रतिबिंब,महसूस करता सृष्टि को प्रकृति में विचरता हृदयकितना सुकून भरा होता हैपर क्या सचमुच,प्रकृति का सौंदर्य-बोधजीवन में स्थायी शांतिप्रदान करता है?...
 पोस्ट लेवल : श्वेता सिन्हा
Yashoda Agrawal
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कब तक...?फिर से होंगी सभाएँमोमबत्तियाँचौराहों पर सजेंगीचंद आक्रोशित नारों सेअख़बार कीसुर्खियाँ फिर रंगेंगीहैश टैग मेंसंग तस्वीरों केएक औरत कीअस्मत फिर सजेगीआख़िर हम कब तक गिनेंगे?और कितनी अर्थियाँबेटियों की सजेंगी?कोर्ट,कानूनों और भाषणोंके मंच पर हीमहिला सशक्तिकरणभ्र...
 पोस्ट लेवल : श्वेता सिन्हा
Yashoda Agrawal
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उम्र के बोझिल पड़ाव परजीवन की बैलगाड़ी पर सवारमंथर गति से हिलती देहबैलों के गलेे से बंधा टुन-टुन की आवाज़ में लटपटाया हुआ मनअनायास ही एक शामचाँदनी से भीगे गुलाबी कमल सरीखीनाजुक पंखुड़ियों-सी चकई को देखहिय की उठी हिलोर में डूब गयाकुंवारे हृदय केप्रथम प्रेम की...
 पोस्ट लेवल : श्वेता सिन्हा
Yashoda Agrawal
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धूप की उंगलियों ने छू लिया अलसाया तन सर्द हवाओं की शरारतों सेतितली-सा फुदका मनतन्वंगी कनक के बाणों सेकट गये कुहरीले पाशबिखरी गंध शिराओं मेंमधुवन में फैला मधुमासमन मालिन्य धुल गयाझर-झर झरती निर्झरी कस्तूरी-सा मन भरमायेकंटीली बबूल छवि रसभरीवनपंखी चीं-च...
 पोस्ट लेवल : श्वेता सिन्हा
Yashoda Agrawal
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दर्दे  दिल  की अजब  कहानी  हैहोंठों पर मुस्कां आँखों में पानी हैजिनकी ख़्वाहिश में गुमगश्ता हुयेउस राजा की  कोई और  रानी  हैरात कटती है  यूँ  रोते च़रागों कीज्यों बाती ने ख़ुदकुशी की ठानी हैदर्द,ग़म,तड़प,अश्क और रूसवाई,इश्क़...
 पोस्ट लेवल : श्वेता सिन्हा
Yashoda Agrawal
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सृष्टि से उत्पन्नब्रह्मांड के चर-अचरसमस्त जीव-निर्जीवग्रह-गोचर,नक्षत्र,उल्का,पिंडजीवन,प्रकृति का सूक्ष्म से सूक्ष्म कण,सभी अपनी निर्धारितसीमाओं से बँधेअपनी निश्चित परिधियों में घूमतेतट से वचनबद्धनिरंतर अपनेकर्मपथ पर,अपनी तय उम्र जीने कोविवश हैंक्योंकि निर्धारि...
 पोस्ट लेवल : श्वेता सिन्हा
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ठाठें मारता ज्वार से लबरेज़नमकीन नहीं मीठा समुंदरतुम्हारी आँखेंतुम्हारे चेहरे कीमासूम परछाईमुझमें धड़कती है प्रतिक्षणटपकती है सूखे मन परबूँद-बूँद समातीएकटुक निहारतीतुम्हारी आँखेंनींद में भी चौंकातीरह-रह कर परिक्रमा करतीमन के खोह,अबूझ कंदराओं,चोर तहखानों कास्वप्न...
 पोस्ट लेवल : श्वेता सिन्हा
Yashoda Agrawal
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नज़र-नज़र की बात हैसच-झूठ,दिन या रात हैख़ामोश हुई सिसकियाँबहते हुये ज़ज़्बात हैं लब थरथरा के रह गयेनज़रों की मुलाकात हैसाँसों की ये सरगोशियाँनज़रों की ही सौगात हैरोया है कोई ज़ार-ज़ारबिन अभ्र ही बरसात हैदिल की बिछी बिसात परनज़रों की शह और मात हैमनमर्ज़ियाँ चलती हो जबनजरो...
 पोस्ट लेवल : श्वेता सिन्हा
Yashoda Agrawal
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देह की परिधियों तकसीमित करस्त्री की परिभाषाहै नारेबाजी समानता की।दस हो या पचासकोख का सृजनउसी रजस्वला काल से संभवतुम पवित्र हो जन्म लेकरजन्मदात्रीअपवित्र कैसे?रुढ़ियों को मान देकरअपमान मातृत्व कामान्यता की आड़ मेंअहं तुष्टि यासृष्टि केशुच...
 पोस्ट लेवल : श्वेता सिन्हा
Yashoda Agrawal
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मौन हृदय के आसमान परजब भावों के उड़ते पाखी,चुगते एक-एक मोती मन का फिर कूजते बनकर शब्द।कहने को तो कुछ भी कह लोन कहना जो दिल को दुखाय,शब्द ही मान है,शब्द अपमानचाँदनी,धूप और छाँव सरीखे शब्द।न कथ्य, न गीत और हँसी निशब्दरूंधे कंठ प्रिय को न कह पाये मीत,पीकर हृदय की...
 पोस्ट लेवल : श्वेता सिन्हा