--छठपूजा का आ गया, फिर पावन त्यौहार।माता जन-गण के हरो, अब तो सभी विकार।।--लोग छोड़कर आ गये, अपने-अपने नीड़।सरिताओं के तीर पर, लगी हुई है भीड़।।--अस्तांचल की ओर जब, रवि करता प्रस्थान।छठ पूजा पर अर्घ्य तब, देता हिन्दुस्थान।।--परम्पराओं पर टिका, सारा कारोबार।मान्यताओं...
 पोस्ट लेवल : दोहे षष्टी मइया