ब्लॉगसेतु

अमितेश कुमार
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रंगमंच वर्तमान में घटित होने वाली कला हैऔर इस कारण यह वर्तमान में हस्तक्षेप भी करता है अपनी जीवंतता से. इससे अपेक्षा भी की जाती है कि यह अपने समय के सवालों को संबोधित करे और उस पर बहस करे. इसे जोर देकर कहना चाहिए कि रंगकर्म ऐसी कला है जो अपने समय की सत्ता से सच कहत...
अमितेश कुमार
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सुबह सुबह पटना में आप प्रेमचंद रंगशाला पहुंचिए या शाम में ही और प्रेक्षागृह के चारो ओर एक चक्कर लगाइए,  थोड़े थोड़े अंतराल पर रंग समूह पूर्वाभ्यास करते हुए मिल जाएंगे। ये यहां रोज मिलते हैं, आपस मे सीखते हैं और कभी कभी कोई बाहर से आकर कार्यशाला कराता है तो उसम...
अमितेश कुमार
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रंगमंच की संस्था 'निर्माण कला मंच' की स्थापना का तीसवां साल शुरू होने पर ये अंश जो संजय उपाध्याय से लंबी बातचीत का हिस्सा है.मेरा दाखिला राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (रानावि) के लिए हो चुका था. होता क्या था कि छुट्टियाँ जो छ: महीने पर होती थी उसमें मैं पटना चला जाता था...
अमितेश कुमार
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बचपन में हम ननिहाल ज्यादा रहेभोजपुर में. मेरा गावँ मगह में है. मेरा बचपन अधिक ननिहाल में गुजरा. ये बहुत कम लोग जानते हैं लगभग छुपा हुआ हैकि मैं मगही हूँ.  मेरा गांव मगह में है. इसलिए कुछ लोग कहते भी है किमैंने मगही के लिए कुछ नहीं किया.पिता जी कीट्रान्ससफरेबल...
 पोस्ट लेवल : sanjay upadhyaya संजय उपाध्याय
अमितेश कुमार
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हमारे समय में आदिवासी जीवन या उनके परिवेश पर आया संकट नया नहीं है इसके स्रोत एतिहासिक हैं. आधुनिक समय के इस संकट का करीबी रिश्ता अंग्रेजी शासन से जुड़ता है जब उसने जंगल की सामग्रियों की राज्य की संपति घोषित कर दिया, जमीन का बंदोबस्त करके स्थानीय सामंत पैदा किये जिसक...
अमितेश कुमार
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अनुरूपा राय की प्रस्तुति ‘एनेक्डाटस एंड एलीगरिज बाई गुलबदन बेगम’ का आलेख चोयती घोष ने लिखा है जो बाबर की पुत्री गुलबदन बेगम  के लेखन के रास्ते मुगल वंश के तीन शासकों बाबर, हुमायुं और अकबर की यात्रा को दिखाता है. उम्र के छठे दशक में अकबर ने उन्हें वह सब लिखने क...