ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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भटक  रही दर बदर  देखो ! स्नेह  भाव  से  बोल  रही,  अमृत  पात्र  लिये  हाथों  में,सृष्टि, चौखट-चौखट  डोल  रही|विशिष्ट औषधि, जीवनदात्री,सर्वगुणों  का  शृंगार    किये&n...
sanjeev khudshah
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हिंदी साहित्य के लिए अपूरणीय क्षति है कवि मलखान सिंह का जानासंजीव खुदशाहजब हम शुरुआती तौर पर दलित साहित्य पढ़ रहे थे यह ऐसा वक्त था जब दलित साहित्य से हमारा दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था। ऐसे समय में दो किताबें मेरे सामने आई जो पहले से चर्चित थी जिस के नामों को हमने...
sanjiv verma salil
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समीक्षा-"काल है संक्रांति का" आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' की अनुपम नवगीत कृति - इंजी. संतोष कुमार माथुर, लखनऊ *एक कुशल अभियंता, मूर्धन्य साहित्यकार, निष्णात संपादक, प्रसिद्ध समीक्षक, कुशल छंदशास्त्री, समर्पित समाजसेवी पर्यावरणप्रेमी, वास्तुविद अर्थात बहुमुख...
sanjiv verma salil
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सुभाषित संजीवनी १*मुख पद्मदलाकारं, वाचा चंदन शीतलां।हृदय क्रोध संयुक्तं, त्रिविधं धूर्त लक्ष्णं।।*कमल पंखुड़ी सदृश मुख, बोल चंदनी शीत।हृदय युक्त हो क्रोध से, धूर्त चीन्ह त्रैरीत।।*http://divyanarmada.blogspot.in/
अनंत विजय
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हिंदी के मशहूर कथाकार और साहित्यिक पत्रिका ‘हंस’ के संपादक राजेन्द्र यादव हमेशा कहा करते थे कि विश्वविद्यालयों के हिंदी विभाग प्रतिभाओं की कब्रगाह हैं।  उनकी इस भावना का हिंदी के कई साहित्यकार समर्थन भी करते रहे हैं। यादव जी कहा करते थे कि विश्वविद्यालय और कॉल...
sanjiv verma salil
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रचना-प्रतिरचना राकेश खण्डेलवाल-संजीव *अचल रहे संकल्प, विकल्पों पर विचार का समय नहीं है हुई व्यवस्था ही प्रधान, जो करे व्यवस्था अभय नहीं हैअभय दान जो मांगा करते उन हाथों में शक्ति नहीं हैपाना है अधिकार अगर तो कमर बांध कर लड़ना होगाकौन व्यवस्था का अनुया...
sanjiv verma salil
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परिचय- संजीवनाम: संजीव वर्मा 'सलिल'। संपर्क: &#2357...
 पोस्ट लेवल : परिचय संजीव
sanjiv verma salil
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साक्षात्कार के प्रश्न (१)    आप साहित्य की इस दुनिया में कैसे आए? कब से आए? क्या परिवार में कोई और सदस्य भी साहित्य सेवा से जुड़ा रहा है?मैं बौद्धिक संपदा संपन्न कायस्थ परिवार में जन्मा हूँ। शैशव से ही माँ की लोरी के रूप में साहित...
sanjiv verma salil
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पुस्तक चर्चा:'ऐसा भी होता है' गीत मन भिगोता है आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'  *[पुस्तक परिचय: ऐसा भी होता है, गीत संग्रह, शिव कुमार 'अर्चन', वर्ष २०१७, आईएसबीएन ९७८-९३-९२२१२- ८९-५, आकार २१ से.मी.x १४ से.मी., आवारण बहुरंगी, पेपरबैक, पृष्ठ ८०, मूल्य ७५/-, पहले...
संजीव तिवारी
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दुर्ग ग्रामीण के रूप में उस समय दुर्ग से लगे ग्राम कुथरैल विधानसभा सीट था। दूसरे चुनाव में यह सीट भिलाई के रूप में परिसीमित हुआ था। उस समय के इस दुर्ग ग्रामीण सीट में कांग्रेस के मोहनलाल बाकलीवाल, समाजवादी पार्टी के दाउ त्रिलोचन सिंह, राम राज्य परिषद के लाल दशरथ सि...