ब्लॉगसेतु

राजीव तनेजा
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अमूमन अपनी जिंदगी में हम सैकड़ों हज़ारों लोगों को उनके नाम..उनके काम..उनकी पहचान से जानते हैं। मगर क्या वे सब के सब हमारे जीवन में इतना अधिक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं कि उन सभी का किसी कहानी या उपन्यास में असरदार तरीके से जिक्र या समावेश किया जा सके? मेरे ख्याल...
sanjiv verma salil
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परिचय नाम: संजीव वर्मा 'सलिल'।जन्म: २०-८-१९५२, मंडला मध्य प्रदेश।माता-पिता: स्व. शांति देवी - स्व. राज बहादुर वर्मा।प्रेरणास्रोत: बुआश्री महीयसी महादेवी वर्मा।शिक्षा: त्रिवर्षीय डिप्लोमा सिविल अभियांत्रिकी, बी.ई., एम. आई. ई., विशारद, एम. ए. (अर्थशास्त्र, दर्शन...
sanjiv verma salil
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दोहा सलिला पूनम नम नयना लिए, करे काव्य की वृष्टि।पूर्णिमा रस ले बिखर, निखर रचे नव सृष्टि।।*प्रणय पत्रिका पूर्णिमा, प्रणयी मृग है चाँद।चंचल हिरणी ज्योत्सना, रही गगन को फाँद।।*http://divyanarmada.blogspot.in/
sanjiv verma salil
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कार्यशालादोहा से कुंडलियासंजीव वर्मा 'सलिल', *पुष्पाता परिमल लुटा, सुमन सु मन बेनाम।प्रभु पग पर चढ़ धन्य हो, कण्ठ वरे निष्काम।।चढ़े सुंदरी शीश पर, कहे न कर अभिमान।हृदय भंग मत कर प्रिये!, ले-दे दिल का दान।।नयन नयन से लड़े, झुके मिल मुस्काता।प्रणयी पल पल लुटा, प...
sanjiv verma salil
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नवगीत:तोड़ दें नपना*अंदाज अपना-अपनाआओ! तोड़ दें नपना*चोर लूट खाएंगेदेश की तिजोरी परपहला ऐसा देंगेअच्छे दिन आएंगे.भूखे मर जाएंगेअन्नदाता किसानआवारा फिरें युवारोजी ना पाएंगेतोड़ रहे हर सपनाअंदाज अपना-अपना*निज यश खुद गाएंगेहमीं विश्व के नेतावायदों को जुमला कहठेंगा दिख...
sanjiv verma salil
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नवगीत-पड़ा मावठा *पड़ा मावठा घिरा कोहराजला अँगीठी आगी ताप*सिकुड़-घुसड़कर बैठ बावले थर-थर मत कँप, गरम चाय ले सुट्टा मार चिलम का जी भर उठा टिमकिया, दे दे थापपड़ा मावठा घिरा कोहराजला अँगीठी आगी ताप*आल्हा-ऊदल बड़े लड़ैया टेर जोर से,भगा लड़ैया गारे राई,सुना सवैयाघाघ-भड्डरी बन ज...
sanjiv verma salil
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शेर / द्विपदीमिलाकर हाथ खासों ने, किया है आम को बाहरनहीं लेना न देना ख़ास से, हम आम इन्सां हैंदोहा दुनिया *राजनीति है बेरहम, सगा न कोई गैर कुर्सी जिसके हाथ में, मात्र उसी की खैर *कुर्सी पर काबिज़ हुए, चेन्नम्मा के खास चारों खाने चित हुए, अम्मा जी के दास *दोहा देहरादू...
sanjiv verma salil
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लेख प्रेम गीत में संगीत चेतनासंजीव*साहित्य और संगीत की स्वतंत्र सत्ता और अस्तित्व असंदिग्ध है किन्तु दोनों के समन्वय और सम्मिलन से अलौकिक सौंदर्य सृष्टि-वृष्टि होती है जो मानव मन को सच्चिदानंद की अनुभूति और सत-शिव-सुन्दर की प्रतीति कराती है. साहित्य जिसमें सबक...
sanjiv verma salil
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भारत आरतीसंजीव *आरती भारत माता कीपुण्य भू जग विख्याता की*सूर्य ऊषा वंदन करतेचाँदनी चाँद नमन करतेसितारे गगन कीर्ति गातेपवन यश दस दिश गुंजातेदेवगण पुलक, कर रहे तिलक ब्रह्म हरि शिव उद्गाता कीआरती भारत माता की*हिमालय मुकुट शीश सोहेचरण सागर पल पल धोएनर्मदा काव...
sanjiv verma salil
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राजस्थानी मुक्तिका संजीव *घाघरियो घुमकाय मरवण घणी सुहाय *गोरा-गोरा गाल मरते दम मुसकाय *नैणा फोटू खैंच हिरदै लई मँढाय *तारां छाई रात जाग-जगा भरमाय *जनम-जनम रै संग ऐसो लाड़ लड़ाय *देवी-देव मनाय   मरियो सा...