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Bharat Tiwari
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संजीव की कहानी 'सौ बार जनम लेंगे' एक किरदार जो हमारे आसपास होता है लेकिन हमें उसकी महत्ता नहीं दीखती. उस किसी किरदार की कहानी गढ़ना, एक रेखाचित्र खींच देना, उसे हमेशा के लिए शब्दों में ढाल देना एक कहानीकार का योगदान होता है. यह सवाल उठ सकता है कि कौन कहानीकार अ...
 पोस्ट लेवल : कहानी संजीव Kahani Sanjiv
sanjiv verma salil
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उपन्यास समीक्षा जीवन के झंझावातों से जूझता "अधूरा मन "[अधूरा मन, उपन्यास।, प्रथम संस्करण २००७, आकार २२ से.मी. x १४ से.मी., आवरण बहुरंगी, सजिल्द जैकेट सहित, पृष्ठ १७९, मूल्य १५०/-, तिवारी ग्राफिक्स एन्ड पब्लिकेशंस भोपाल]हिंदी साहित्य की समकालिक सारस्वत कार...
sanjiv verma salil
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शारद वंदना संजीव *ॐअम्ब विमल मति दे......हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनीअम्ब विमल मति दे।अम्ब विमल मति दे ।।जग सिरमौर बनाएँ भारत,वह बल विक्रम दे।वह बल विक्रम दे ।।हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनीअम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे ।।१।।साहस शील हृदय में भर दे,जीवन त्याग-तपोमय कर द...
sanjiv verma salil
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कार्यशालादोहाधूप सुनहली साँझ की, कहती मन की बात।सर्दी खेले खेल अब, कर न सकेगी घात।। - चन्द्रकान्ता   रोला कर न सकेगी घात, मात फिर भी दे देगी सूर्य-रश्मि को हार चंद्र-कांता दे देगी चकित सलिल संजीव हो, देखे सराहे रूपअ...
sanjiv verma salil
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सरस्वती वंदना भोजपुरी संजीव * पल-पल सुमिरत माई सुरसती, अउर न पूजी केहू कलम-काव्य में मन केंद्रित कर, अउर न लेखी केहू रउआ जनम-जनम के नाता, कइसे ई छुटि जाई नेह नरमदा नहा-नहा माटी कंचन बन जाई अलंकार बिन खुश न रहेलू, काव्य-कामिनी मैया काव्य कलश भर छंद क्षीर से, दे आँचल...
sanjiv verma salil
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परिचय : आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'। संपर्क: विश्व वाणी हिंदी संस्थान, ४०१ विजय अपार्टमेंट, नेपिअर टाउन, जबलपुर ४८२००१ मध्य प्रदेश। ईमेल-  salil.sanjiv@gmail.com, ९४२५१८३२४४, ७९९९५५९६१८। जन्म: २०-८-१९५२, मंडला मध्य प्रदेश।  माता-पिता: स्...
अनीता सैनी
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भटक  रही दर बदर  देखो ! स्नेह  भाव  से  बोल  रही,  अमृत  पात्र  लिये  हाथों  में,सृष्टि, चौखट-चौखट  डोल  रही|विशिष्ट औषधि, जीवनदात्री,सर्वगुणों  का  शृंगार    किये&n...
sanjeev khudshah
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हिंदी साहित्य के लिए अपूरणीय क्षति है कवि मलखान सिंह का जानासंजीव खुदशाहजब हम शुरुआती तौर पर दलित साहित्य पढ़ रहे थे यह ऐसा वक्त था जब दलित साहित्य से हमारा दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था। ऐसे समय में दो किताबें मेरे सामने आई जो पहले से चर्चित थी जिस के नामों को हमने...
sanjiv verma salil
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समीक्षा-"काल है संक्रांति का" आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' की अनुपम नवगीत कृति - इंजी. संतोष कुमार माथुर, लखनऊ *एक कुशल अभियंता, मूर्धन्य साहित्यकार, निष्णात संपादक, प्रसिद्ध समीक्षक, कुशल छंदशास्त्री, समर्पित समाजसेवी पर्यावरणप्रेमी, वास्तुविद अर्थात बहुमुख...
sanjiv verma salil
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सुभाषित संजीवनी १*मुख पद्मदलाकारं, वाचा चंदन शीतलां।हृदय क्रोध संयुक्तं, त्रिविधं धूर्त लक्ष्णं।।*कमल पंखुड़ी सदृश मुख, बोल चंदनी शीत।हृदय युक्त हो क्रोध से, धूर्त चीन्ह त्रैरीत।।*http://divyanarmada.blogspot.in/