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संजीव तिवारी
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दुर्ग ग्रामीण के रूप में उस समय दुर्ग से लगे ग्राम कुथरैल विधानसभा सीट था। दूसरे चुनाव में यह सीट भिलाई के रूप में परिसीमित हुआ था। उस समय के इस दुर्ग ग्रामीण सीट में कांग्रेस के मोहनलाल बाकलीवाल, समाजवादी पार्टी के दाउ त्रिलोचन सिंह, राम राज्य परिषद के लाल दशरथ सि...
संजीव तिवारी
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छत्तीसगढ़ की प्रदर्शनकारी लोककला "पंडवानी" के इतिहास पर इतना कहा जाता है कि यह "भजनहा" से आरंभ होकर नारायणलाल वर्मा, झाड़ूराम देवांगन, पद्मश्री पूनाराम निषाद और पद्मविभूषण तीजनबाई तक सफर करते हुए वर्तमान "पंडवानी" के रूप में स्थापित हुई।(adsbygoogle = window.adsbygoo...
संजीव तिवारी
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1952 के पहले आम चुनाव में दुर्ग विधानसभा में रोमांचक मुकाबला था। तब सीपी एंड बरार के स्पीकर घनश्याम सिंह गुप्त कांग्रेसी उम्मीदवार थे। जन संघ ने डॉक्टर डब्लू. डब्लू. पाटणकर को खड़ा किया था। अन्य प्रमुख उम्मीदवार डॉक्टर जमुना प्रसाद दीक्षित जो निर्दलीय उम्मीदवार के...
संजीव तिवारी
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दुर्ग के पहले सांसद वासुदेव श्रीधर किरोलीकर सतारा महाराष्ट्र के पास मसूर गांव में जन्मे किरोलीकर के पिताजी राजकुमार कॉलेज रायपुर में शिक्षक थे। इन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा रायपुर और कॉलेज की शिक्षा नागपुर फिर इलाहाबाद से प्राप्त की। कानून की डिग्री प्राप्त कर इन्हो...
संजीव तिवारी
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पराधीन देश मे स्वतंत्रता और अपने स्वयं के संविधान के लिए आकुल जनता की आवाज को बुलंद करते हुए जनवरी 1938 में पं.नेहरू नें कहा था कि राष्‍ट्रीय कांग्रेस का लक्ष्‍य स्‍वतंत्रता और लोकतांत्रिक राज्‍य की स्‍थापना है। उसकी मांग है कि स्‍वतंत्र भारत का संविधान वयस्‍क मताध...
संजीव तिवारी
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सरला दास को उडि़या साहित्य के आदिकवि के रूप में जाना जाता है। उन्‍होंनें पंद्रहवीं शताब्दी में उडि़या सरला महाभारत की रचना की थी। सरला महाभारत लोक में व्‍याप्‍त महाभारत कथा है यह वेद व्यास के संस्कृत महाभारत से काफी अलग हैं। पिछले दिनों केन्‍द्रीय सरकार की एक संस्‍...
संजीव तिवारी
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सीपी एण्ड बरार से सन् 1930 में घनश्याम सिंह गुप्ता एवं सेठ गोविन्द दास को केन्द्रीय धारा सभा के लिए मनोनीत किया गया। इस अवधि में घनश्याम सिंह गुप्ता, केन्द्रीय धारा सभा में विभिन्न कानूनों एवं केन्द्रीय बिलों के विधायन के बहसों में महत्वपूर्ण दखल देते रहे। उन्होंने...
संजीव तिवारी
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जनजातीय चित्रकला में रुचि रखने वालों के बीच लतिका वैष्णव का नाम जाना पहचाना है। लतिका अपने चित्रों में बस्तर के आदिम राग को अपनी विशिष्ट शैली में अभिव्यक्त करती है। लोक तत्वों से परिपूर्ण उसके चित्रों, भित्ति चित्रों में लोक संगीत प्रतिध्वनित होती है। बस्तर की माटी...
संजीव तिवारी
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"26 जनवरी 2014 को राजपथ नई दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस के मुख्य समारोह में जब मउँहा झरे रे.. मउँहा झरे रे.. गीत की पंक्तियां गूंजी और इस छत्तीसगढ़ी लोकगीत पर जब असम के कलाकारों ने भाव नृत्य कर वहां उपस्थित हजारों दर्शकों की तालियां बटोरी तो नि:संदेह हर छत्तीसगढ़...
संजीव तिवारी
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छत्तीसगढ़ के ख्‍यातिलब्ध रंग निर्देशक राम ह्रदय तिवारी जी की रंग यात्रा का समग्र अभी हाल ही में, लोक रंगकर्मी दीपक चंद्राकर के द्वारा, राजेंद्र सोनभद्र के संपादन में प्रकाशित हुआ है। सात सर्गों में विभक्त इस ग्रंथ में राम ह्रदय तिवारी जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व,...