ब्लॉगसेतु

संजीव तिवारी
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बहुत दिनों से सोंच रहा हूं मेरे आरकुट प्रोफाईल को डिलीट कर दूं. क्‍योंकि अब प्रत्‍येक दिन ऐसे एक-दो फ्रैंड रिक्‍वेस्‍ट आ रहे हैं जो या तो छद्म प्रोफाईल हैं या फिर विशुद्ध रूप से पोर्नसाईटों की ओर ले जाने वाले प्रोफाईल हैं. फ्रैंड रिक्‍वेस्‍ट के बाद स्‍वाभाविक तौर प...
संजीव तिवारी
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छत्तीसगढ की कला, संस्कृति व साहित्य से संबंधित अनेक पत्र-पत्रिकाओं के बीच छत्तीसगढ की मांगलिक मंजूषा के रूप में विगत कई वर्षों से प्रकाशित पत्रिका ‘झांपी’ का अहम स्थान है. इस पत्रिका में संग्रहित पाठ्य सामाग्रियों में प्रधान संपादक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व गांध...
संजीव तिवारी
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स्‍टील टि्वन सिटी के नाम से ज्ञात मेरे नगर के मुख्‍य डाकघर के पास लगे एक पत्‍थर पे मेरी नजर पिछले कई बरसों से ठहर जाती रही है. यह पत्‍थर संभवत: तत्‍कालीन ब्रिटिश शासन के द्वारा मील के पत्‍थर के रूप में जीई रोड के किनारे लगाई गई थी. इस पर ना...
संजीव तिवारी
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दुर्ग जिले में लौह अयस्‍क भंडार होने के संबंध में सर्वप्रथम 1887 में भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण जिल्‍द बीस के अभिलेखों में पी.एन.बोस के द्वारा एक शोध पत्र के द्वारा बतलाया गया. इसके बाद से ही तत्‍कालीन मे.टाटा संस एण्‍ड कम्‍पनी की ओर से दुर्ग जिले में दिलचस्‍पी...
संजीव तिवारी
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आफिस से निकलते ही एक मित्र का फोन आया, लगभग चार साल बाद उसने मुझे याद किया था. उसने पूछा कहां हो मैंनें कहा 'अपनी नगरी में, घर जाने के लिये निकल गया हूं. बोल बहुत दिनों बाद याद किया, तू कहां है. ' 'किस रोड से जा रहे हो.' मित्र नें मेरे प्रश्‍न का जवाब दिये बिना पू...
संजीव तिवारी
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साहित्‍यकार महोदयजनों आपने पिछले दिनों कहा था कि 'छपास पीडा का इलाज मात्र है ब्‍लाग'. ब्लागर्स और उनकी पीडा से व्यथित ‘साहित्यकार’ महानुभावो आपने अपनी अहम की तुष्टि के लिये यह मान लिया है कि ब्लागर्स ही छपास पीडा से ग्रसित हैं, आप लोग बैरागी है. क्या ‘साहित्याकार’...
संजीव तिवारी
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26 जुलाई को दुर्ग जिला हिन्‍दी साहित्‍य समिति द्वारा तुलसी जयंती पर कार्यक्रम आयोजित किया गया. छत्‍तीसगढ में हिन्‍दी के प्राध्‍यापक के रूप में अपनी दीर्धकालीन सेवायें दे चुके एवं प्रदेश के अधिकांश साहित्‍यकारों, शव्‍दशिल्पियों एवं विचारकों के प्रिय गुरू रहे वर्तमान...
संजीव तिवारी
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मोबाईल की घंटी बजते ही मैंनें मोबाईल जेब से निकाली. उधर से थानेदार साहब का फोन था. 'क्‍या कर रहे हो' 'कुछ विशेष नहीं सर, नौकरी बजा रहा हूं, आप आदेश करें' मैनें कहा.'एकाध घंटे की फुरसद निकालो और मेरे पास आवो' साहब नें कहा.'ओके सर, आपके लिये बंदा हाजिर है, पर काम तो...
संजीव तिवारी
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आधुनिक संदर्भो में हरेली छत्‍तीसगढ में पर्यावरण जागरण के हेतु से मनाया जाने वाला त्‍यौहार है पर जडो तक फैले अंधविश्‍वास के कारण अधिसंख्‍यक जनता के लिये यह त्‍यौहार तंत्र मंत्र एवं तथाकथित अलौकिक ज्ञान के 'रिवीजन' का त्‍यौहार है. इस संबंध में राजकुमार जी नें पिछले द...
संजीव तिवारी
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आधुनिक संदर्भो में हरेली छत्‍तीसगढ में पर्यावरण जागरण के हेतु से मनाया जाने वाला त्‍यौहार है पर जडो तक फैले अंधविश्‍वास के कारण अधिसंख्‍यक जनता के लिये यह त्‍यौहार तंत्र मंत्र एवं तथाकथित अलौकिक ज्ञान के 'रिवीजन' का त्‍यौहार है. इस संबंध में राजकुमार जी नें पिछले द...