ब्लॉगसेतु

संजीव तिवारी
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दे दे बुलउवा राधे को : छत्‍तीसगढ में फाग संजीव तिवारी छत्तीसगढ में लोकगीतों की समृद्ध परंपरा लोक मानस के कंठ कठ में तरंगित है । यहां के लोकगीतों में फाग का विशेष महत्व है । भोजली, गौरा व जस गीत जैसे त्यौहारों पर गाये जाने लोक गीतों का अपना अपना महत्व है । समयानुस...
संजीव तिवारी
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ब्लागर्स को अपने ब्लाग लेखन के द्वारा कमाई करने के लिए अंतरजाल में कई सेवा प्रदाता बेव साईट हैं जो प्रति क्लिक के अनुसार या अन्य प्रक्रियाओं के द्वारा ब्लागर्स को राशि मुहैया कराते है । हम सब की चाहत है कि ब्लागिंग से कुछ आय हो स्वांत: सुखाय लेखनी के बासी में चटनी...
संजीव तिवारी
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अंतरजाल में भ्रमण हेतु बीएसएनएल नें जेट के साथ हाथ मिलाया है और हमारे जैसे घुमंतु के लिए लगभग अच्छी स्पीड का बेतार ईवीडीओ व निक कार्ड डाटाकार्ड को बाजार में उतारा है ।छत्तीसगढ में निक कार्ड विक्रय व प्रयोग हेतु पिछले माह से प्रस्तुत हुआ है । ये बेतार निक डाटाक...
संजीव तिवारी
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जगार : हल्बी महागाथाछत्तीसगढ की राजधानी रायपुर के मोतीबाग में विगत कई वर्षों से जगार उत्सव का आयोजन किया जाता है । जिसमें उपस्थित होने के सुअवसर भी प्राप्त हुए, विगत रविवार को टैक्नोक्रेट रवि रतलामी जी एवं संजीत त्रिपाठी जी से मुलाकात में चर्चा के दौरान जगार उत्सव...
संजीव तिवारी
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स्‍वर्गीय दुलार सिंह दाउ जी के मंदराजी नाम पर एक कहानी है । बचपन में बडे पेट वाला एक स्‍वस्‍थ बालक दुलारसिंह आंगन में खेल रहा था । आंगन के ही तुलसी चौंरा में मद्रासी की एक मूर्ति रखी थी । मंदराजी के नानाजी नें अपने हंसमुख स्‍वभाव के कारण बालक दुलार सिंह को मद्रासी...
संजीव तिवारी
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ददरियाछत्तीसगढ के लोकप्रिय ददरिया से हम आपको छत्तीसगढी व हिन्‍दी में परिचय करा रहे है । पढिये सुनिये एवं आनंद लीजिये छत्तीसगढी लोकगीत का :-बटकी म बासी अउ चुटकी म नून मैं गावत हौं ददरिया तें कान देके सुन ।चना के दार राजा चना के दार रानी चना के दार गोंदली कडकत हे,टूर...
संजीव तिवारी
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रवि रतलामी जी ने पिछली पोस्ट "छत्तीसगढ़ी ब्लॉगर्स की ऊर्जा" पर कमेट करते हुए कहा कि " ज्ञानदत्त जी हम छत्तीसगढ़िया बटकी में बासी और चुटकी में नून खाते हैं (बटकी में बासी और चुटकी में नून - में गावत हों ददरिया तें खड़े खड़े सून)तो, आरंभ में बासी और बटकी और चटनी (अम...
संजीव तिवारी
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छत्‍तीसगढ इतिहास के आईने में - 1कोसल नरेश हैहयवंशी प्रजापाल‍क कल्‍याण साय मुगल सम्राट जहांगीर के सानिध्‍य में आठ वर्ष तक अपने राजनीतिज्ञान एवं युद्धकला को परिष्‍कृत करने के बाद सरयू क्षेत्र से ब्राह्मणों की टोली को साथ लेकर अपनी राजधानी रत्‍नपुर पहुंचे ।कोसल की प्र...
संजीव तिवारी
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छत्‍तीसगढ के शक्तिपीठ – 1 बस्‍तर के राजा अन्‍नमदेव वारांगल, आंध्रप्रदेश से अपनी विजय पताका फहराते हुए बस्‍तर की ओर बढ रहे थे साथ में में मॉं दंतेश्‍वरी का आशिर्वाद था । गढों पर कब्‍जा करते हुए बढते अन्‍नमदेव को माता दंतेश्‍वरी नें वरदान दिया था जब तक तुम पीछे मुड...
संजीव तिवारी
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बुचुआ के गांव म एक अलगे धाक अउ इमेज हे, वो हर सन 68 के दूसरी कक्षा पढे हे तेखरे सेती पारा मोहल्ला म ओखर डंका बाजथे । गांव के दाउ मन अउ नवां नवां पढईया लईका मन संग बराबर के गोठ बात करईया बुचुआ के बतउती वो हर सन 77 ले छत्तीसगढ राज के सपना संजोवत हे तउन ह जाके 2000 म...