ब्लॉगसेतु

संजीव तिवारी
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‘अगासदिया’ के संपादक व प्रसिद्ध कहानीकार डॉ.परदेशीराम वर्मा जी नें वर्तमान में देश के विलक्षण धनुर्धर एवं मंचीय योद्धा कोदूराम वर्मा के समग्र अवदानों को केन्‍द्र में रखकर उन पर रजत जयंती विशेषांक प्रकाशित किया है, जिसमें रमेश नैयर, डॉ.डी.के.मंडरीक, डॉ.विमल कुमार पा...
संजीव तिवारी
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छत्‍तीसगढ में पारंपरिक रूप में गाये जाने वाले लोकगीतों में जसगीत का अहम स्‍थान है । छत्‍तीसगढ का यह लोकगीत मुख्‍यत: क्‍वांर व चैत्र नवरात में नौ दिन तक गाया जाता है । प्राचीन काल में जब चेचक एक महामारी के रूप में पूरे गांव में छा जाता था तब गांवों में चेचक प्रभावित...
संजीव तिवारी
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भाद्रपद (भादो) का महीना छत्‍तीसगढ के लिए त्‍यौहारों का महीना होता है, इस महीने में धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्‍तीसगढ में किसान धान के प्रारंभिक कृषि कार्य से किंचित मुक्‍त हो जाते हैं । हरेली से प्रारंभ छत्‍तीसगढ का बरसात के महीनों का त्‍यौहार, खमरछठ से अपने असल...
संजीव तिवारी
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आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायेछत्तीसगढ के दुर्ग मे आज भी है आजादी के दिन का समाचार पत्र जिसे सम्हाला है सक्सेरिया परिवार ने धरोहर की तरह.15 अगस्त को स्वराज्य के सूर्योदय से दिल्ली मे रौनक9 अगस्त को दैनिक विश्वामित्र , मुम्बई से प्रकाशित समाचार पत्...
संजीव तिवारी
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भोजली एक लोकगीत है जो श्रावण शुक्‍ल नवमी से रक्षाबंधन के बाद तक छत्तीसगढ़ के गांव गांव में भोजली बोने के साथ ही गूंजती है और भोजली माई के याद में पूरे वर्ष भर गाई जाती है । छत्तीसगढ़ में बारिस के रिमझिम के साथ कुआरी लडकियां एवं नवविवाहिता औरतें भोजली गाती है।दरअसल...
संजीव तिवारी
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कंगला मांझी छत्‍तीसगढ के आदिवासी नेतृत्‍व के उदीयमान नक्षत्र थे । उनका नाम छत्‍तीसगढ के सम्‍माननीय स्‍वतंत्रता संग्राम सेनानियों के रूप में लिया जाता है । कंगला मांझी एकमात्र ऐसे नेता थे जो तत्‍कालीन सी पी एण्‍ड बरार (मध्‍य प्रदेश, छत्‍तीसगढ व महाराष्‍ट्र) से अंग्र...