ब्लॉगसेतु

ललित शर्मा
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संध्या शर्मा का नमस्कार.... 'पूर्णस्य पूर्णमादाय ' कहने से तात्पर्य यह है की यदि तुम स्वयं इस सत्य की अनुभूति कर सको कि वही ' पूर्ण ' तुम्हारे साथ साथ इस विश्व ब्रह्माण्ड के कण कण में भी प्रविष्ट है तो फिर उस ' पूर्ण ' के बाहर शेष बचा क्या ? इसी को कहा गया - ' प...
ललित शर्मा
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संध्या शर्मा का नमस्कार... जब-जब ओस की बूँदें बेचैन होंगी घास के मुरझाये पत्तों पर ढरकने को धीरे से धरती भी छलक कर उड़ेल देगी भींगा-भींगा सा अपना आशीर्वाद और बूँदों के रोम-रोम से घास का पोर-पोर रच जाएगा हरियाली की कविता से तब-तब मैं पढ़ ली जाऊँगी उन तृप्ति की तारों...
ललित शर्मा
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संध्या शर्मा का नमस्कार... रात की झील पर.....तैरती उदास कि‍श्‍ती हर सुबह आ लगती है कि‍नारे मगर न जाने क्‍यों ये जि‍या बहुत होता है उदास ..... ऐ मेरे मौला कहां ले जाउं अब अपने इश्‍क के सफ़ीने को तेरी ही उठाई आंधि‍यां हैं है तेरे दि‍ए पतवार.... कहती हूं तुझसे अब सु...
ललित शर्मा
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संध्या शर्मा का नमस्कार....बड़ा बेदम निकलता है... - हँसी होंठों पे रख, हर रोज़ कोई ग़म निगलता है... मगर जब लफ्ज़ निकले तो ज़रा सा नम निकलता है... वो मुफ़लिस खोलता है रोटियों की चाह मे डिब्बे...लीजिये प्रस्तुत है, आज की वा...
ललित शर्मा
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संध्या शर्मा का नमस्कार...लम्हा - लम्हा जिंदगी कुछ यूँ सिमट गई , जो मज़ा था इंतजार में अब सज़ा बन गई | दर्द और ख़ुशी के बीच दूरियां जो बड गई , दिलो के दरमियाँ मोहोब्बत कम हो गई | चिठ्ठी - तार बीते जमाने की बात हो गई , आधुनिक दौड़ में वो बंद किताब हो गई | कुछ सवा...
ललित शर्मा
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संध्या शर्मा का नमस्कार......कभी जो हम नहीं होंगे ....!!! - .... कहो किस को बताओगे ...? वो अपनी उलझने सारी ... वो बेचैनी में डूबे पल ...? वो आँखों में छुपे आँसू ...? किसे फिर तुम दिखाओगे ...ब्लॉग जगत में कल का पूरा...
ललित शर्मा
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संध्या शर्मा का नमस्कार......करती रहती हूं भरने की कोशि‍श शब्‍द-बूंदो से उम्‍मीद का घड़ा टप-टप टपकती आस की बूंदों को गि‍नती-सहेजती हैं दो आतुर नि‍गाहें कि तभी पी जाता है आकर, संदेह का काला कौआघड़े का सारा पानी भर जाती है देह में बेतरह थकान सोचती हूं कहां मि‍लेग...
ललित शर्मा
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संध्या शर्मा का नमस्कार...मायूस तो हूं वायदे से तेरे कुछ आस नहीं कुछ आस भी है, मैं अपने ख्यालों के सदके तू पास नहीं और पास भी है. दिल ने तो खुशी माँगी थी मगर, जो तूने दिया अच्छा ...सुबह ढूंढेंगे फ़िर सपने, अभी तो शाम ढलती है -...
ललित शर्मा
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संध्या शर्मा का नमस्कार... जनता पर फिर महंगाई की मार, पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े. डॉलर की तुलना में रुपये की गिरावट आम जनता पर महंगी पड़ी। कमजोर रुपये की वजह से ही शुक्रवार को तेल कंपनियों को तीन महीने बाद पेट्रोल की कीमत में 75 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि करने का फैसला...
ललित शर्मा
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संध्या शर्मा का नमस्कार.....ये ब्लॉगिंग है जनाब ! जैसे हड्डी-शोरबा मिला शोख़ क़बाब या गज़क लाजवाब पर यहाँ नहीं है कोई नवाब एक-दूजे का जोरदार हुकुम बजाइये और नजराना में वही आह-वाह पाइये......लीजिये प्रस्तुत है, आज की वार्ता ........ श्रीसंतों का कैसा हो बसंत ?...