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ललित शर्मा
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संध्या शर्मा का नमस्कार... चीन में पिछले 40 साल में 33 करोड़ से ज्यादा बच्चों को जन्म लेने से पहले ही मार दिया गया। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 1971 से लेकर 2010 तक चीन में इतने अबॉर्शन हुए हैं। जनसंख्या पर लगाम लगाने के लिए चीन द्वारा उठाए गए कदम हमेशा विवाद...
ललित शर्मा
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संध्या शर्मा का नमस्कार... मेरी ही आँखें मेरे ही अक्स को घूरती हैं अनजान की तरह वो कुछ शब्द जो यकीं दिलाते मुझे मेरे होने का क्यों नहीं बोलती कितना मुश्किल है इनकी ख़ामोशी तोडना...तुम कहते हो आसान है सब. सच कहूँ.... कुछ भी अजीब नहीं लगता, आदत सी हो गई है ,...
ललित शर्मा
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संध्या शर्मा का नमस्कार........अपना कह दूँ तो तुझको अच्छा नहीं लगता, गैर कह के बुलाऊं तो कलेज़ा मुँह को आता है. हरजाई कह दूँ तो खुद को अच्छा नहीं लगता, बावफ़ा और बेवफ़ा ऐसी बातों पर खुद ही यकीन नहीं. अब ले दे कर ज़ालिम और निर्मोही बचता है, कैसे पुकारूँ तुझे कैसे...
ललित शर्मा
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संध्या शर्मा का नमस्कार......फागुन की ऋतु घर आई .....!! - प्रकृति गाये मधुवंती .... और बहार राग ... हरसूँ ऐसा छिटका .... फाग के अनुराग का पराग ... हृदय छंद हुए स्वछंद .... मंद मंद महुआ की गंध ...... तोड़ती मन तटबंध&nbsp...
ललित शर्मा
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संध्या शर्मा का नमस्कार....कल यानि ७ मार्च २०१३ को नोबल शांति पुरस्कार से सम्मानित तिब्बती धर्मगुरू और तिब्बत की निर्वासित सरकार के प्रमुख श्री दलाई लामा ने प्रख्यात ब्लॉगर ललित शर्मा जी की पुस्तक "सिरपुर : सैलानी की नजर से" का विमोचन सिरपुर में किया. बहुत-बहुत बधा...
ललित शर्मा
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संध्या शर्मा का नमस्कार.... सुप्रभात... सूरज की सिन्दूरी आभा और पलाश के खूबसूरत फूलों के साथ प्रस्तुत है, आज की वार्ता...  *जब पड़ा था * *पहला कदम तुम्हारा * *मेरे आँगन में ,* *तब -* *वो फूल ही तो थे * *पलाश के ,* *जो बिखरे थे * *मेरे आँचल में ......!!!!!* *प...
ललित शर्मा
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संध्या शर्मा का नमस्कार.... मेहंदीप्रतिक है प्रेम काप्रेम की सौगात है .....चढ़ गया मेरी हथेलियों पर भीपिया तेरा प्यार है .....मेहंदी का रंग , रंग नहींतेरे प्यार का अहसास है .....ये रंग उतरे न जीवन से मेरेपिया तुझसे अब यही आस है ....चढ़ गया मेरे ह्रदय पर भी मेह...
ललित शर्मा
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संध्या शर्मा का नमस्कार.......झांकी फ़ेसबुकिस्तान की  ये एक ऐसा आभासी मेला है जिसमें सतत् रेले चलते हैं। जहाँ मेले के सारे रंग दिख जाएगें। जहाँ इंटरनेट कनेक्ट हो जाए, इसे वहीं लगा हुआ पाएगें। इस मेले का नहीं कोई ठौर ठिकाना, कोई अपना है पराया है और बेगान...
ललित शर्मा
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संध्या शर्मा का नमस्कार....जब भी मुझे लगता है तुम्हे कि तुम्हे पाना है ......तभी मेरे हाथो कि लकीरों से तुम खो से जाते हो .......चाहे कुछ मुझे यकीन है...........गर तुम मेरे तो हाथों को थाम लो..........तो हाथों की लकीरों का क्या करना.......... मैं नही जानती कि क...
ललित शर्मा
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संध्या शर्मा का नमस्कार....कहाँ हो तुम ... ये सड़कें, घर, फूल-पत्ते, अड़ोसी-पड़ोसी सभी तो उदास हैं तेरे चले जाने के बाद लगा की इस शहर में लौटने की वजह खत्म हो गई बीती उम्र की पक्की डोर ... झटके में टूट गई पर ऐसा हो न सका कुछ ही दिनों में श...