ब्लॉगसेतु

S.M. MAsoom
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मुझे अपने वतन जौनपुर से हमेशा से मुहब्बत रही लेकिन इस वतन में रहने का अवसर कम ही मिल पाया करता है मुझे | वैसे वर्ष में ३-४ चक्कर अब वतन पहुँच जाता हूँ लेकिन जब भी वापस आता हूँ दिल में एक ख्वाहिश बाकी रह जाती है काश २-४ दिन और मिल जाते |मेरी इस जन्म भूमि न...
S.M. MAsoom
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हमारा जौनपुर हमारा गौरव हमारी पहचान भारत की नेचर्स फोरएवर सोसायटी ऑफ इंडिया फाउंडर और प्रेसिडेंट  सुप्रसिद्ध पर्यावरणविद मोहम्मद ई दिलावर जैसे लोगों के प्रयासों से आज दुनिया भर में 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मानाया जाता है, ताकि लोग इस पक्षी के संरक्षण...
S.M. MAsoom
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जौनपुर अज़ादारी का अपना एक इतिहास है और शिया  मुसलमानों की आबादी लखनऊ के बाद यहाँ सबसे अधिक है | यहाँ एक से एक बड़े ऐतिहासिक इमामबाड़े और मस्जिदें मुग़ल और शार्की समय के मौजूद हैं इसीलिये यहाँ का मुहर्रम और चेहल्लुम दुनिया भर में मशहूर है | जौनपुर की अज़ादारी को अब...
YASHVARDHAN SRIVASTAV
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पश्चिम बंगाल सरकार ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस से संबंधित जिन 64 गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक किया है, उनकी विस्तृत पड़ताल में वक्त लगेगा, लेकिन यह एक बड़ा कदम है। नेताजी सुभाषचंद्र बोस की हवाई दुर्घटना में मौत एक रहस्य बनी हुई है, जिसकी बड़ी वजह यही है कि सरकार के पास इसस...
YASHVARDHAN SRIVASTAV
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नेताजी सुभाषचंद्र बोस और उनके परिवार से जुड़ी चौंसठ गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक कर पश्चिम बंगाल की तृणमूल सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। कायदे से आजादी के बाद ही सुभाषचंद्र बोस से जुड़ी गोपनीय जानकारियां सार्वजनिक हो जानी चाहिए थीं। लेकिन ऐसा न करके प्रथम प्रधानमंत्री...
S.M. MAsoom
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बलात्कार की समस्या अब विकराल रूप लेती जा रही है | जौनपुर और आस पास के गाँव से ऐसे खबरें हर दिन आती रहती हैं जिनमे अधिकतर मामले प्रेम  प्रकरण के या बदले की भावना से हुआ करते हैं | जवानी के आते ही युवा मन एक नयी दुनिया को देखने लगता है | ऐसे में उनकी इच्छा विपरी...
YASHVARDHAN SRIVASTAV
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हिंदी को लेकर अमूमन दो तरह की बातें होती हैं। एक तो यह है कि अंग्रेजी के दबाव में हिंदी का क्षरण हो रहा है। स्कूलों में शुरू से ही अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई होती है, जिससे बच्चे हिंदी लिखना-पढ़ना नहीं सीख पा रहे हैं। हिंदी बोलना हीनता का लक्षण माना जाता है और हिंदी ब...
S.M. MAsoom
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बचपन से जब भी मुहर्रम में अपने वतन जौनपुर आता था तो नौ मुहर्रम को मीर घर पानदरीबा का जुलुस अवश्य करता था | वहाँ यह जुलुस शाम ४-5 बजे तक उठता है | पहले यह बहुत ही शानदार तरीके से हुआ करता था जिसमे अमारी, हाथी ,टेबल,अलम तुर्बत और ज़ुल्जिनाह हुआ करते थे | आज ही उसकी शक...
 पोस्ट लेवल : muharram Editorial संपादकीय
S.M. MAsoom
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शार्की बादशाहों ने जौनपुर में बहुत से इमामबाड़े ,रौज़े बनवाये जिसे देख के ऐसा लगता है की वो जौनपुर को बग़दाद की शक्ल देना चाहते थे और बहुत हद तक इसमें कामयाब भी थे | लेकिन इब्राहीम लोधी ने इसे तोड़ दाल और बहुत बर्बाद किया | फिर भी बहुत से रौज़े और इमामबाड़े आज भी बचे हुए...
S.M. MAsoom
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जौनपुर आने पे मै अक्सर यहा के लोगो से यू ही मिला जुला करता हू जिस से मै उन्हे समझ सकू | क़रीब से देखने पे समझ मे आया यहा जब कोई ग्रुप किसी खास मक़्सद के लिये बनता है तो पूरा ग्रुप घन्टो बात करने के बाद भी किसी नतीजे पे नही पहुच पाता जिसका कारण सभी का खुद को सबसे...
 पोस्ट लेवल : संपादकीय editorial