ब्लॉगसेतु

S.M. MAsoom
33
मुझे अपने वतन जौनपुर से हमेशा से मुहब्बत रही लेकिन इस वतन में रहने का अवसर कम ही मिल पाया करता है मुझे | वैसे वर्ष में ३-४ चक्कर अब वतन पहुँच जाता हूँ लेकिन जब भी वापस आता हूँ दिल में एक ख्वाहिश बाकी रह जाती है काश २-४ दिन और मिल जाते |मेरी इस जन्म भूमि न...
S.M. MAsoom
33
हमारा जौनपुर हमारा गौरव हमारी पहचान भारत की नेचर्स फोरएवर सोसायटी ऑफ इंडिया फाउंडर और प्रेसिडेंट  सुप्रसिद्ध पर्यावरणविद मोहम्मद ई दिलावर जैसे लोगों के प्रयासों से आज दुनिया भर में 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मानाया जाता है, ताकि लोग इस पक्षी के संरक्षण...
S.M. MAsoom
33
जौनपुर अज़ादारी का अपना एक इतिहास है और शिया  मुसलमानों की आबादी लखनऊ के बाद यहाँ सबसे अधिक है | यहाँ एक से एक बड़े ऐतिहासिक इमामबाड़े और मस्जिदें मुग़ल और शार्की समय के मौजूद हैं इसीलिये यहाँ का मुहर्रम और चेहल्लुम दुनिया भर में मशहूर है | जौनपुर की अज़ादारी को अब...
YASHVARDHAN SRIVASTAV
522
पश्चिम बंगाल सरकार ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस से संबंधित जिन 64 गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक किया है, उनकी विस्तृत पड़ताल में वक्त लगेगा, लेकिन यह एक बड़ा कदम है। नेताजी सुभाषचंद्र बोस की हवाई दुर्घटना में मौत एक रहस्य बनी हुई है, जिसकी बड़ी वजह यही है कि सरकार के पास इसस...
YASHVARDHAN SRIVASTAV
522
नेताजी सुभाषचंद्र बोस और उनके परिवार से जुड़ी चौंसठ गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक कर पश्चिम बंगाल की तृणमूल सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। कायदे से आजादी के बाद ही सुभाषचंद्र बोस से जुड़ी गोपनीय जानकारियां सार्वजनिक हो जानी चाहिए थीं। लेकिन ऐसा न करके प्रथम प्रधानमंत्री...
S.M. MAsoom
33
बलात्कार की समस्या अब विकराल रूप लेती जा रही है | जौनपुर और आस पास के गाँव से ऐसे खबरें हर दिन आती रहती हैं जिनमे अधिकतर मामले प्रेम  प्रकरण के या बदले की भावना से हुआ करते हैं | जवानी के आते ही युवा मन एक नयी दुनिया को देखने लगता है | ऐसे में उनकी इच्छा विपरी...
YASHVARDHAN SRIVASTAV
522
हिंदी को लेकर अमूमन दो तरह की बातें होती हैं। एक तो यह है कि अंग्रेजी के दबाव में हिंदी का क्षरण हो रहा है। स्कूलों में शुरू से ही अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई होती है, जिससे बच्चे हिंदी लिखना-पढ़ना नहीं सीख पा रहे हैं। हिंदी बोलना हीनता का लक्षण माना जाता है और हिंदी ब...
S.M. MAsoom
66
बचपन से जब भी मुहर्रम में अपने वतन जौनपुर आता था तो नौ मुहर्रम को मीर घर पानदरीबा का जुलुस अवश्य करता था | वहाँ यह जुलुस शाम ४-5 बजे तक उठता है | पहले यह बहुत ही शानदार तरीके से हुआ करता था जिसमे अमारी, हाथी ,टेबल,अलम तुर्बत और ज़ुल्जिनाह हुआ करते थे | आज ही उसकी शक...
 पोस्ट लेवल : muharram Editorial संपादकीय
S.M. MAsoom
66
शार्की बादशाहों ने जौनपुर में बहुत से इमामबाड़े ,रौज़े बनवाये जिसे देख के ऐसा लगता है की वो जौनपुर को बग़दाद की शक्ल देना चाहते थे और बहुत हद तक इसमें कामयाब भी थे | लेकिन इब्राहीम लोधी ने इसे तोड़ दाल और बहुत बर्बाद किया | फिर भी बहुत से रौज़े और इमामबाड़े आज भी बचे हुए...
S.M. MAsoom
33
जौनपुर आने पे मै अक्सर यहा के लोगो से यू ही मिला जुला करता हू जिस से मै उन्हे समझ सकू | क़रीब से देखने पे समझ मे आया यहा जब कोई ग्रुप किसी खास मक़्सद के लिये बनता है तो पूरा ग्रुप घन्टो बात करने के बाद भी किसी नतीजे पे नही पहुच पाता जिसका कारण सभी का खुद को सबसे...
 पोस्ट लेवल : संपादकीय editorial