ब्लॉगसेतु

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काम पे जाने  की जल्दी में अक्सर लोग घर से बिना नाश्ता किये चले जाते हैं और फिर रास्ते में थोडा सा कुछ खा के दिन गुज़ार देते हैं | एक कहावत  मशहूर है की नाश्ता करो राजा की तरह दोपहर का भोजन करो वजीर की तरह और रात का खाना खाओ फ़कीर की तरह | इसका मतलब होता है...
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हमारे वतन जौनपुर का घर एक ऐसा घर है जहां महानगरों की भीड़ भाड़ प्रदुषण और ट्रैफिक के शोर से मुकम्मल छुटकारा मिल जाता है | सुबह होते ही सूर्य की पहली किरणें मस्तक चूमती हैं ,सामने हरे भरे खेत खलिहान नज़र आते हैं जहां से ताज़ी सब्जियां आप हर दिन ला सकते हैं | गोमती नदी क...
 पोस्ट लेवल : संपादकीय FEATURED editorial
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आपने अक्सर computer या अंतरजाल पे फॉर्म भरते समय RESET का बटन देखा होगा जिसके दबा देने से सब कुछ पहले जैसा हो जाता है | ऐसे ही इंसान सामाजिक रिश्तों इत्यादि में अक्सर महसूस करता है की काश सब कुछ पहले जैसा हो जाता और जो कुछ उलझा हुआ है फिर से सुलझ जाता |// < ![CDATA...
 पोस्ट लेवल : संपादकीय editorial
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"ओ देश से आने वाले बता क्या अब भी वतन में वैसे ही सरमस्त नजारे होते होंगे ?" यह आवाज़ दूर देश में रहने वाले जौनपुरी के दिल से निकलती है जब वो अपने वतन से आये किसी  जौनपुरी  को देखता है | जी हाँ वतन से दूर वतन की याद बहुत आती है | ओ देश से आने वाले बता क्या...
 पोस्ट लेवल : संपादकीय editorial kavitakosh
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प्रकृति का प्रभाव इतना अधिक होता है कि वर्ष में परिवर्तित होने वाले मौसम में भी मनुष्य के मन-मस्तिष्क को प्रभावित एवं परिवर्तित करते हैं।  शोध से ज्ञात होता है कि वे लोग जो मानसिक समस्याओं में घिरे हुए हैं, वसंत ऋतु में उनकी स्थिति अच्छी हो जाती है।  व...
 पोस्ट लेवल : संपादकीय समाज editorial
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जौनपुर एक ऐतिहासिक शहर है लेकिन दुनिया इसके बारे में कम जानती है | जो शहर एक शतक तक शार्की राज्य की राजधानी रहा हो उस शहर के बारे में दुनिया ना जाने ये इन्साफ नहीं |मैं जौनपुर के इतिहास, यहाँ की प्रतिभाओं, यहाँ के समाज और संस्कृति को दुनिया से जोड़ने का काम पांच व...
 पोस्ट लेवल : संपादकीय editorial
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डॉ पवन विजय अपने भतीजे के साथ मेरे घर पे | मेरे घर पे डॉ पवन विजय और मैं | मेरे घर का एक हिस्सा और डॉ पवन विजय डॉ पवन विजय खालिस मुखलिस मस्जिद देखते हुए डॉ पवन विजय के साथ पंचों शिवाला के दर्शन डॉ पवन विजय सदर इमामबाडा जौनपुर में इमाम हुसैन...
 पोस्ट लेवल : संपादकीय amankapaigham
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  ये हिंदी ब्लॉगजगत डॉ पवन मिश्रा को भली भांति जानता है और हम उनकी लेखनी के दीवाने हैं | डॉ पवन मिश्रा जी से कई बार मुलाक़ात होते होते रह गयी | इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ की जब डॉ पवन जी का फ़ोन आया की आप जौनपुर में हैं या वापस मुंबई चले गए तो मैं जौनपुर से जा चुक...
 पोस्ट लेवल : संपादकीय editorial
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शादी से पहले कुंडली मिलान करना , अपना भविष्य जान ने की उत्सुकता इंसानों मैं हमेशा से रही है. पहले इसके लिए ज्ञानी पंडितों से संपर्क किया जाता था लेकिन आज कल कम्पुटर का ज़माना है, मशीनी युग है. अब लोग कंप्यूटर कुंडली सॉफ्टवेयर का सहारा लेने लगे हैं. पहले के ज्ञानी पं...
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मैंने अपने वतन से दूर रह के अपने वतन की यादों को हमेशा साथ रखा. यही वो यादें हैं जो मुश्किल के दिनों मैं मुझे सहारा देती हैं. कैस  ज़ंगीपूरी के कलाम  याद आते हैं कि-"हज़ार सामान हो साथ लेकिन, सफ़र सफ़र है वतन वतन है.जैसे ही मुझे मौक़ा मिला मैंने अपने वतन...