ब्लॉगसेतु

S.M. MAsoom
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हर सच्चे मुसलमान की ख्वाहिश हुआ करती है की उसे अल्लाह के नेक बन्दों की जियारत करने का मौक़ा  मिले और इसी को अल्लाह से  मुहब्बत कहा जाता है | अल्लाह के नेक बन्दे  अपनी ज़िन्दगी में भी अल्लाह के नेक बन्दों के आस पास रहना पसंद करते हैं और मौत के बाद उनके...
S.M. MAsoom
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इंसान को उन मुहब्बतों की कद्र कम हुआ करती है जो उन्हें मिलती रहती है इसलिए यदि माँ की मुहब्बत किसे कहते हैं वो हम जैसे उन लोगों से पूछिए जिनकी माँ अब दुनिया में नहीं रही | हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम के ज़माने में दो औरतें अपने कुछ माह के बच्चों को साथ लिए जंगल से...
 पोस्ट लेवल : संपादकीय माँ amankapaigham Editorial
S.M. MAsoom
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आज अनायास  ही अटलबिहारी बाजपेयी जी की याद आ गयी | अटल बिहारी बाजपेयी मेरी नज़र में एक सर्वगुण संपन्न व्यक्तित्व के मालिक थे जिन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा एक बार नहीं बार बार दुनिया को मनवाया | अटल बिहारी का जन्म 25 दिसम्बर, 1924 को ग्वाल...
 पोस्ट लेवल : संपादकीय amankapaigham
S.M. MAsoom
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इस्लाम में नशा कोई भी हो हराम है या कह दें मना है | अक्सर लोग पूछते हैं क्या सिगरेट भी मना है क्या तम्बाकू और गुटका भी मना है ? भाई जिस चीज़ से नशा हो या  इंसान के शरीर के लिए जान के लिए घातक हो  वो सब हराम है या  मना है | अल्लाह ने हमें बनाया...
अविनाश वाचस्पति
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हमारा कमजोर होना हमें बनाता है बार बार कमजोर घटता जाता है जोर हम हैं जोरदार कमजोरजोर जो जबर्दस्‍ती होना चाहिए इसका तक नहीं कर पाते हैं हम सब मिलकर बंदोवस्‍त जोर के मामले पर हो जाते हैं पस्‍त पस्‍त के बाद सुस्‍त सुस्‍त के बाद उठाते हैं रोज रोज&nb...