ब्लॉगसेतु

ANITA LAGURI (ANU)
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"वाह...!  क्या जादू है तुम्हारे हाथों में,तुम्हारे हाथों से बनी चाय पीकर तो लगता है कि जन्नत के दर्शन हो गये।  सच कहता हूँ सुधा, शादी की पहली सुबह और आज 50 साल बीत जाने के बाद भी तुम्हारे हाथों की बनी चाय में कोई फ़र्क़ नहीं आया।" श्याम जी कहते-कह...
sanjiv verma salil
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दोहा सलिला: *हर्ष; खुशी; उल्लास; सुख, या आनंद-प्रमोद। हैं आकाश-कुसुम 'सलिल', अब आल्हाद विनोद।।*कहीं न हैपीनेस है, हुआ लापता जॉय।हाथों में हालात के, ह्युमन बीइंग टॉय।।*एक दूसरे से मिलें, जब मन जाए झूम।तब जीवन का अर्थ हो, सही हमें मालूम।।*मेरे अधरों पर खिले...
sanjiv verma salil
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मीरां - तुलसी संवादकृष्ण-भक्त मीरां बाई और राम-भक्त तुलसीदास के मध्य हुआ निम्न पत्राचार शंका-समाधान के साथ पारस्परिक विश्वास और औदार्य का भी परिचायक है। इष्ट अलग-अलग होने और पूर्व परिचय न होने पर भी दोनों में एक दूसरे के प्रति सहज सम्मान का भाव उल्लेखनीय है। काश. ह...
अनंत विजय
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पिछले दिनों ‘अभिव्यक्ति का उत्सव’ ‘जागरण संवादी’ लखनऊ में संपन्न हुआ। ये उत्सव तीन दिनों तक लखनऊ के मशहूर संगीत नाटक अकादमी के लॉन में आयोजित था। अभिव्यक्ति के इस उत्सव में विचारों पर मंथन हुआ था जिसमें राजनीति से लेकर धर्म जैसे विषय थे। 30 नवंबर से 2 दिसंबर 2018 त...
अनंत विजय
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एक अनुमान के मुताबिक इस वक्त देश भर में सवा तीन सौ से अधिक लिटरेचर फेस्टिवल हो रहे हैं, जिनको लिट फेस्ट या साहित्योत्सव भी कहा जाता है ।अमूमन सभी लिटरेटर फेस्टिवल में साहित्य को केंद्र में रखकर इसकी विभिन्न विधाओं और प्रवृत्तियों पर चर्चा होती है। इस मायने में दैनि...
sanjiv verma salil
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दोहा संवाद:बिना कहे कहना 'सलिल', सिखला देता वक्त।सुन औरों की बात पर, कर मन की कमबख्त।।*आवन जावन जगत में,सब कुछ स्वप्न समान।मैं गिरधर के रंग रंगी, मान सके तो मान।। - लता यादव *लता न गिरि को धर सके, गिरि पर लता अनेक।दोहा पढ़कर हँस रहे, गिरिधर गिरि वर एक।। -संजी...
Yashoda Agrawal
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हजारों आँसू सैकड़ों गमआँखें नही दिल भी है नमआकर भर लो ना बाँहों मेतुम बिन तनहा रह गए हमवो क्या जाने इश्क का मतलबरोज बदलते हैं जो हमदमराख से हो सारे गए अरमाँदिल ये जला है मद्धम-मद्धमदर्द हुआ है कम सा अब तोबरसी है आँखे यूँ भरदम– रूचि शाही
Bhavna  Pathak
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आग में गर्मी ना हो, बर्फ में ठंढक ना हो, कलाकार में जुनून ना हो तो फिर ये भला किस काम के । यह कलाकार का जुनून ही है जो उसे जनसाधारण से अलग करता है। वह जो ठान लेता है उसे कर के ही मानता है। भले ही उसका यह जुनून दूसरों को सनक लगे या पागलपन। उसे कोई फर्क नहीं पड़ता। व...
sanjiv verma salil
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लघु (संवाद) कथाअनदेखीसंजीव*'पोता विद्यालय जाने से मना करता है कि रास्ते में बच्चे गाली-गलौज करते हैं, उसे भय लगता है।' मित्र  बताया। अगले दिन मैं मित्र के पोते के साथ स्थानीय भँवरताल उद्यान गया। मार्ग में एक हाथी मिला जिसके पीछे कुत्ते भौंक रहे...
Madabhushi Rangraj  Iyengar
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संप्रेषण और संवाद  आपके कानों में किसी की आवाज सुनाई देती है. शायद कोई प्रचार हो रहा है. पर भाषा आपकी जानी पहचानी नहीं है. इससे आप उसे समझ नहीं पाते. संवाद तो प्रसारित हुआ, यानी संप्रेषण हुआ, प्राप्त भी हुआ, पर संपूर्ण नहीं हुआ क्योंकि वह प्रेषिती द्वारा स...