ब्लॉगसेतु

Bharat Tiwari
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रवीन्द्र त्रिपाठीजी के मेरे बड़े भाई होने के सम्बन्ध की नीव में पिता-समान राजेन्द्र यादवजी हैं। रवीन्द्रजी से मैं यह आग्रह करता रहता हूँ कि वह साहित्य से जुड़ी अपनी छोटी-बड़ी स्मृतियाँ ज़रूर कलमबद्ध करते रहें।उनका प्रस्तुत, गिरिराज किशोरजी को याद करता हुआ इस माह क...
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     एक अप्रैल अन्तर्राष्ट्रीय मूर्ख दिवस यूँ तो हर साल ही आता है। परन्तु मुझे इस दिन गुलबिया दादी की बहुत याद आती है।     बात आज से 45 वर्ष पुरानी है। मैंने उन दिनों इण्टर की परीक्षा दी थी। नजीबाबाद के मूर्ति देवी सरस्वती इण...
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संस्मरण(भूख) लगभग 45 साल पुरानी घटना है। उन दिनों नेपाल में मेरा हम-वतन प्रीतम लाल पहाड़ में खच्चर लादने का काम करता था। इनका परिवार भी इनके साथ ही पहाड़ में किराये के झाले (लकड़ी के तख्तों से बना घर) में रहता था।     कुछ दिनों के बाद इनका अपने घर...
 पोस्ट लेवल : संस्मरण ‘भूख
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      खटीमा से 27 किमी दूर कुमाऊँ का पर्वतीय द्वार टनकपुर नाम का एक छोटा नगर है। जहाँ की एक बुजुर्ग महिला कमला देवी का गठिया-वात का इलाज अमर भारती आयुर्वेदिक अस्पताल, खटीमा में मेरे यहाँ से चल रहा था।      किन्तु अचानक लॉकड...
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        अभी दो दिन पहले की ही तो बात है। घर में राशन, दालें आदि समाप्त हो गये थे। पूरा नगर लॉकडाउन था। आवाजाही बिल्कुल बन्द थी। मैंने स्थानीय किराना व्यापारी को फोन करके घर का सामान लिखवा दिया। लेकिन उसने कहा कि सामान तो मैं पैक करके...
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‘चन्दा और सूरज’’चन्दा में चाहे कितने ही, धब्बे काले-काले हों।सूरज में चाहे कितने ही, सुख के भरे उजाले हों।लेकिन वो चन्दा जैसी शीतलता नही दे पायेगा।अन्तर के अनुभावों में, कोमलता नही दे पायेगा।।सूरज में है तपन, चाँद में ठण्डक चन्दन जैसी है।प्रेम-प...
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संस्मरण(भूख) लगभग 45 साल पुरानी घटना है। उन दिनों नेपाल में मेरा हम-वतन प्रीतम लाल पहाड़ में खच्चर लादने का काम करता था। इनका परिवार भी इनके साथ ही पहाड़ में किराये के झाले (लकड़ी के तख्तों से बना घर) में रहता था।     कुछ दिनों के बाद इनका अपने घर...
 पोस्ट लेवल : संस्मरण ‘भूख
अजय  कुमार झा
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इस पूरी यात्रा को शुरू से पढ़ने के लिए आप  प्रथम ,द्वितीय ,तृतीय और चतुर्थ भाग को भी पढ़ देख सकते हैं | तो जैसा कि पिछली पोस्ट में मैं आपको बता चुका का था कि उदयपुर में बरसों से रह रहे अपने बहन और बहनोई के बताए अनुसार ही माउंट आबू के अगले दोनों दिनों क...
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : संस्मरण
अजय  कुमार झा
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यात्रा के पिछले भागों को आप यहां यहां और यहॉँ पढ़ सकते हैं          ये तो मैं आप सबको पिछली पोस्टों में बता ही चुका हूँ कि बहन और बहनोई जिनका निवास पिछले दो दशकों से उदयपुर में ही है और उन्होंने जैसे निर्देश हमें दिए उसने हमें बहुत ही सहूलिय...