ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
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संस्मरण : पहली मुलाकात।मैं बैंक का सेवानिवृत्त प्रबंधक साहित्य पाठन से तो जुडा़ था, पर लेखन और साहित्यकारों से दूर था। बैंक सेवा के दौरान आपा- धापी में समय द्रुत गति से दौड़ता जा रहा था। सेवा निवृत्ति के बाद फेसबुक समूहों से जुड़ा और लघुकथाएँ लिखने लगा। फेसबुक पर '...
Shreesh Pathak
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पार्ट- 2प्रोफेसर इन चार्ज और कमरा नंबर १०"फीस यहीं जमा होगी? " वॉटर टैंक के बगल में बने एक कमरे की खिड़की में झांक कर मैंने पूछा।"हाँ, यहीं जमा होगी", क्या नाम है? ""शाश्वत पांडेय""यू पी से हो""हाँ""कौन सी जगह?""गोरखपुर""मानीराम जानते हो?""हाँ""हम वहीं से हैं, कोई...
Shreesh Pathak
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धागा मोह काभाग- २ कश्मीर .. लड़की कश्मीर के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) की स्टूडेंट थी। एनआईटी और कश्मीर यूनिवर्सिटी के कैम्पस लगभग आमने-सामने ही थे। इसलिए दोनों ही इंस्टीट्यूट्स के स्टूडेंट्स एक ही साथ आए थे चैंपियनशिप में। लड़की कम्युनिकेशन स...
Shreesh Pathak
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#विश्वविद्यालय के दिन अर्चना मिश्रा ये उन दिनों की बात है यानि सन् 1990 की ,इसी वर्ष मैंने इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। परीक्षा समाप्त होने के साथ-साथ मन में ढेर सारे ख्वाब और उत्साह कि अब स्कूल से छुट्टी मिल जायेगी और हमारा अगला पड़ाव कालेज होगा...
Shreesh Pathak
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शाश्वत पाण्डेय कैंपस लॉ सेण्टर माने दिल्ली विश्वविद्यालय की लॉ फैकल्टी (हांलाकि ये अलग बात है की फैकल्टी में दो और सेण्टर एल सी १ और  एल सी २ भी हैं) ये फैकल्टी कहने भर को लॉ स्टूडेंटों को पढ़ाती है बाकी यहां आप भांति भांति के प्राणियों के दर्शन कर सकते है...
Shreesh Pathak
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धागा मोह कापद्माकर द्विवेदी इसके पहले वह कभी चंडीगढ़ नहीं गया था।पर अब जा रहा था। दिल्ली में यूनिवर्सिटी के वो उसके आख़िरी साल थे। दिसंबर की सर्दियों में उसकी यूनिवर्सिटी के डिबेटिंग क्लब ने उसे पंजाब यूनिवर्सिटी में होने वाले नेशनल डिबेट चैंपियनशिप में यूनिवर्स...
 पोस्ट लेवल : संस्मरण
Bharat Tiwari
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इस आखिरी किस्त के साथ विनोद भारद्वाज जी की किताब यादनामा पूरी हो गयी है। इसका उप-नाम है, लॉकडाउन डायरी, कुछ नोट्स, कुछ यादें। जल्दी ही किताब भी सामने आयेगी। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});न्यू यॉर्क की यादें — विनोद भारद्वाज संस्मर...
Bharat Tiwari
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विनोद जी अपने संस्मरणों में, इसके पिछले लेखन (जापान वाले 'साकुरा की यादें') से, खूबसूरत कवि-से हो गए हैं! उनके इस सौन्दर्य भरे परिवर्तन से उनको पढ़ना अलग किस्म का रोचक हो गया है. आनंद उठाइए... भरत एस तिवारी/शब्दांकन संपादकलेखक के लिए उपेक्षा खराब है तो उसको ज्यादा व...
sanjiv verma salil
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संस्मरण: अपने आपमें छंद काव्य सलिल जी - आभा सक्सेना, देहरादून *संजीव वर्मा सलिल एक ऐसा नाम जिसकी जितनी प्रशंसा की जाए उतनी ही कम है |उनकी प्रशंसा करना मतलब सूर्य को दीपक दिखाने जैसा होगा |उनसे मेरा परिचय मुख पोथी पर सन 2014 - 2015 में हुआ |उसके बाद त...
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मेरे पूज्य पिता जी!       यह घटना सन् 1979 की है। उस समय मेरा निवास जिला-नैनीताल की नेपाल सीमा पर स्थित बनबसा कस्बे में था।       पिता जी और मा...