ब्लॉगसेतु

Saransh Sagar
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नाम - कुशमा गोसाईं.., 10 साल का बेटा - रामू गोसाईं..,चारों थैलों का वजन 105 किलो.. आज दोपहर करीब 3:00 बजे जब मैं "गुलधर" रेलवे स्टेशन पर उतरा तो सहसा कानों में एक आवाज सुनाई दी--"भैया ई थैला उठवा दीजिए तो "।  पीछे मुड़कर देखा तो लगभग 30 साल की एक महिला खड़ी थ...
Saransh Sagar
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साल २०१५ में यही कोई नवम्बर,अक्टूबर का महिना होगा ! परी-चौक ग्रेटर नॉएडा का लोकप्रिय स्थान है वहां जाने के लिए ऑटो का इंतजार कर रहा था होस्टल से ! ताकि छुट्टी में घर जा सकू ! रात काफी थी तो कोई ऑटो वाला दिखा नही लेकिन मै अपना सामान लेकर के पैदल ही चल पड़ा सोचा शारदा...
Rajeev Upadhyay
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मैं कब कहता हूँ जग मेरी दुर्धर गति के अनुकूल बने, मैं कब कहता हूँ जीवन-मरू नंदन-कानन का फूल बने? काँटा कठोर है, तीखा है, उसमें उसकी मर्यादा है, मैं कब कहता हूँ वह घटकर प्रांतर का ओछा फूल बने? मैं कब कहता हूँ मुझे युद्ध में कहीं न तीखी चोट मिले?&...
kumarendra singh sengar
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आखिरकार लम्बे इंतजार के बाद कुछ सच्ची कुछ झूठी का प्रकाशन हो ही गया. विगत दो-तीन वर्षों से लगातार प्रकाशन की, लेखन की, संपादन की स्थिति में होने के कारण हमारा यह ड्रीम प्रोजेक्ट थमा हुआ था. रुका हुआ नहीं कह सकते क्योंकि इस पर लगातार काम चल रहा था. जब स्थिति खुद पर...
Saransh Sagar
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अधिकांशतः अपने प्रत्येक मधुर व कटु अनुभव को इस प्रकार के शब्द व भाव देने का प्रयास करता हूं कि घटना आप तक यथावत पहुंचे... अभी दिल्ली से घर के लिए निकला हूं, टिकट लेने के लिए लाइन में लगा हुआ था, आजकल बुकिंग क्लर्क के नाम की नेमप्लेट सामने रखी होती है, दिनेश नाम क...
Yashoda Agrawal
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पत्थर मिलेंगे टूटे, तन्हाइयां मिलेंगीमासूम खंडहरों में, परछाइयां मिलेंगीइंसान की गली से, इंसानियत नदारदमासूम अधखिली से, अमराइयां मिलेंगीकुछ चूड़ियों की किरचें, कुछ आंसुओं के धब्बेजालों से कुछ लटकती, रुस्वाइयां मिलेंगीबाज़ार में हैं मिलते, ताली बजाने वालेपैसे नहीं जो...
Saransh Sagar
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घटना 23 जून रात की है, किसी कारण आधी रात में ही गुड़गांव से निकलना पड़ा, करीब 2:00 बजे पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पहुंचा, गाड़ी का पता किया 2 घंटे बाद प्लेटफार्म नंबर 14 पर आनी थी तो वहीं जाकर बैठ गया | अचानक अपने पीछे गिलासी खड़कने की आवाज आई, मुड़कर देखा तो कर...
Saransh Sagar
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तलवार लेकर धमकी देते हुए !!यूँ तो रोज नित्य कई घटनाये होती रहती है लेकिन मुखर्जी नगर के इलाके की घटना इसीलिए थोड़ी संवेदनशील है क्योंकि झड़प करने वाला व्यक्ति सिख समुदाय से है ! भारत में सिख समुदाय को बड़े ही सम्मान व् गौरवमय तरीके से देखा जाता है क्योंकि उनके दस गुरु...
Saransh Sagar
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जैसा की लेख का विषय है - प्यास और भूख सबको लगती है ! उससे हम और आप समझ सकते है कि कैसा लगता होगा जब आपको भूख लगे और आप अपनी बात सामने वालो को समझा भी न सके ! मेरे रिश्तेदार में ही एक मेरी बहन है जो दिव्यांग है और उसके कष्ट मुझे सहन नही होते लेकिन उसकी पीड़ा को मैंने...
sanjiv verma salil
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कृति चर्चा:'सच्ची बात' लघुकथाओं की ज़िंदगी से मुलाकात चर्चाकार: आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'*[कृति विवरण: सच्ची बात, लघुकथा संग्रह, चंद्रकांता अग्निहोत्री, प्रथम संस्करण २०१५, आकार डिमाई, आवरण बहुरंगी सजिल्द जैकेट सहित, पृष्ठ ९६, मूल्य २२५/-, विश्वास प्रकाशन, अम्ब...