ब्लॉगसेतु

Yashoda Agrawal
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(1)आशाहीना रजनी के अन्तस् की चाहें,हिमकर-विरह-जनित वे भीषण आहेंजल-जल कर जब बुझ जाती हैं,जब दिनकर की ज्योत्स्ना से सहसा आलोकितअभिसारिका ऊषा के मुख पर पुलकितव्रीडा की लाली आती है,भर देती हैं मेरा अन्तर जाने क्या-क्या इच्छाएँ-क्या अस्फुट, अव्यक्त, अनादि, असीम प्रणय की...
Sanjay  Grover
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ग़ज़लजब खुल गई पहेली, तो है समझना आसांसच बोलना है मुश्क़िल, लेकिन है गाना आसां पहले तो झूठ बोलो, ख़ुद रास्ता बनाओफिर दूसरों को सच का रस्ता बताना आसांवैसे तो बेईमानी .. में हम हैं पूरे डूबेमाइक हो गर मुख़ातिब, बातें बनाना आसांजो तुम तलक है पहुंचा, उन तक भी पहुंच...
kumarendra singh sengar
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उस दिन रविवार था, अगस्त का पहला रविवार. उन दिनों मोबाइल सपने में भी सोचा नहीं गया था. बेसिक फोन की घंटी घनघनाई. रविवार होने के कारण सभी लोग घर में ही थे. कोई विशेष दिन मनाये जाने का न चलन था और अपनी आदत के अनुसार हम भी ऐसे किसी दिन के प्रति सजग-सचेत नहीं थे. सचेत-स...
विजय राजबली माथुर
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एकता जोशी26-06-2018 मीडिया की  पोल खोल !!आपके कई लोग पिछले कई दिनों से पूछ रहे है की- मीडिया हमारा आन्दोलन क्यों नहीं दिखा रहा? बात एकदम सही है। आईये जानते है हर एक मीडिया चैनल और उनके मालिको का सच।Zee news:यह चैनल का मालिक सुभाष चंद्रा है।सुभाष चंद्रा नर...
Sanjay  Grover
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ग़ज़लcreation : Sanjay Groverसच जब अपनेआप से बातें करता हैझूठा जहां कहीं भी हो वो डरता हैदीवारो में कान तो रक्खे दासों केमालिक़ क्यों सच सुनके तिल-तिल मरता हैझूठे को सच बात सताती है दिन-रैनयूं वो हर इक बात का करता-धरता हैसच तो अपने दम पर भी जम जाता हैझूठा हरदम भीड़ इक...
Sujit Shah
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मिथिलाञ्चल शायरी के मेम्बर रचनाकार सचिन कुमार मैथिल के रचना सब स्टेप By स्टेप पढ़ि सकैत छी। आ मिथिलाञ्चल शायरी पर अपने सब मैथिली में रचना, शायरी, गज़ल, चुटकुला, कथा-पिहानी इत्यादि सब पढ़ि सकैत छी।यदि अपने अप्पन मैथिली में लिखल रचना मिथिलाञ्चल शायरी वेबस...
 पोस्ट लेवल : सचिन कुमार मैथिल
Bharat Tiwari
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निर्माल्य— डॉ. सच्चिदानंद जोशीमंच पर जैसे ही कलाकार के नाम की घोषणा हुइ, मै भौचक्का रह गया। कल से जिसे मैं लड़की समझ रहा था, वो लड़का निकला। वह मंच पर अपनी सितार हाथ में लिये आ रहा था और मैं कल के अपने लतिका के साथ हुए उस संभाषण को याद कर रहा था, जब इस संगीत सभा का...
Yashoda Agrawal
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रविवार की छुट्टी का काला सच जिसे कोई नही जानताहम सबको को सप्ताह में रविवार की छुट्टी का इंतजार रहता है लेकिन इस छुट्टी का इतिहास कोई नही जानता है। हम सब जानते हैं की हमे आजादी के लिए कितना संघर्ष करना पड़ा था।उसी प्रकार हमें रविवार की छुट्टी के लिए भी संघर्ष क...
 पोस्ट लेवल : छुट्टी का काला सच
Sanjay  Grover
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ग़ज़लया तो बेईमानी-भरी दुनिया से मैं कट जाऊंया कि ईमान के चक्कर में ख़ुद निपट जाऊंतुम तो चाहते हो सभी माफ़िया में शामिल होंतुम तो चाहोगे मैं अपनी बात से पलट जाऊं न मैं सौदा हूं ना दलाल न ऊपरवालालोग क्यों चाहते हैं उनसे मैं भी पट जाऊं मेरे अकेलेपन को मौक़ा मत समझ...
kumarendra singh sengar
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कल पुस्तक दिवस मनाया गया. जिनको पुस्तकों से प्रेम है उन्होंने तो जोश के साथ मनाया और जिनको पुस्तकों के प्रति प्रेम दर्शाना था उन्होंने सेल्फी के साथ मनाया. किताबों के प्रति हमारे लगाव का एक बहुत बड़ा कारण आनुवांशिक कहा जा सकता है. पिताजी को और बाबाजी को जबरदस्त शौक...