ब्लॉगसेतु

Sujit Shah
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नेह प्रीतक लगाक' मुह मोरि लेलौं किया !प्रेमक रोग लगाक' अहाँ छोरि गेलौं किया !!मनो नई लगैय इजोरिया राति मेंहमर जिनगी अन्हार बनेलौं  किया  !एखनो धरि बाट जोहैत छी अहिंकेघुरि'क हमरा जिनगीमें ऐलौं नई किया !!अहिंसंग बितेबै जिनगी केने छेलौं वादावादा करि'क अहाँ व...
kumarendra singh sengar
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किसी भी व्यक्ति के जीवन में जन्मने के बाद महत्त्वपूर्ण दिन होता है उसका पहले दिन स्कूल जाना. लगभग सभी के लिए पहला स्कूली दिन बहुत ही ख़ास होता है. एक जैसी होते हुए भी सबकी अलग-अलग सी कहानी रहती है. वैसे देखा जाये तो स्कूल भी अपने आपमें एक अजब सा स्थान होता है, बच्चो...
Sanjay  Grover
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ग़ज़लPHOTO by Sanjay Groverसच को ना औज़ार चाहिएकुछ पागल तैयार चाहिएसच क्यों जाए मंदिर-मस्ज़िदसच को सच्चे यार चाहिएसच क्यों करे भरोसा सबका !सच तुमको बीमार चाहिए ! (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); (adsbygoogle = window.adsbygoogle ||...
kumarendra singh sengar
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हम लोगों के लिए होली का मतलब हमेशा से हुल्लड़ से ही रहा है. उस समय भी जबकि हम छोटे से थे, उस समय भी जब हम किशोरावस्था में कहे जा सकते थे और तब भी जबकि हमें भी बड़ा माना जाने लगा था. हमारे लिए ही नहीं, हमारे पूरे परिवार के लिए होली का मतलब खूब मस्ती, खूब हुल्लड़, खूब ह...
Bharat Tiwari
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तेरह बरस की लड़की | हकलाहटके सच्चिदानंदन की दो कवितायेँप्रकाश के रेमलयालम साहित्य में मॉडर्निज़्म के सशक्त हस्ताक्षर किय्यमपरम्बत सच्चिदानंदन (K. Satchidanandan) को केरल साहित्य अकादमी (केरल सरकार के अधीन त्रिशूर में स्थित स्वायत्त संस्थान) के शीर्ष साहित्यिक...
Kajal Kumar
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ज्योति  देहलीवाल
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चाहे कैसी भी परिस्थितियां हो सच अपने आप में एक ऐसा अस्त्र हैं जो इंसान को बड़ी से बड़ी मुसीबत से लड़ने की ताकत देता हैं। अत: ऐसे दे बच्चों को सच बोलने की प्रेरणा। माता-पिता बचपन से ही बच्चों को सच बोलना सिखाते हैं। परवरिश का एक बड़ा हिस्सा हैं कि चाहे कितनी भ...
Yashoda Agrawal
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और तो ख़ैर क्या कहा जाए बेसबब मुंह का ज़ायका जाए .फिर उसे ढूंढने का क्या मतलबकोई जब इस क़दर चला जाए .तुम ही आ जाओ आशना मेरेइससे पहले कि कोई आ जाए .गीत ग़ज़लों से सफ़हे ज़ख़्मी हैंअबके एक फूल को लिखा जाए .तुम ज़मीं घर की बात करते होआदमी आदमी को खा जाए .भूख है ,आजिज़ी है,...
Yashoda Agrawal
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जियो उस प्यार मेंजो मैंने तुम्हें दिया है,उस दु:ख में नहीं जिसेबेझिझक मैंने पिया है।उस गान में जियोजो मैंने तुम्हें सुनाया है,उस आह में नहीं‍ जिसेमैंने तुमसे छिपाया है।उस द्वार से गुजरोजो मैंने तुम्हारे लिए खोला है,उस अंधकार से नहींजिसकी गहराई कोबार-बार मैंने तुम्ह...
Yashoda Agrawal
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धूप का दम निकल गयाये न समझो उजाला गयापत्थरों की नुमाइश हुईफूल क़दमों में डाला गयाशक़ तो खुद की वफ़ाओं पे थाऔर मिरा दिल ख़ँगाला गयाभूख को यूँ तसल्ली हुईपत्तियों को उबाला गयाबच्चे जब चैन से सो गएहलक़ से तब निवाला गयाचाहतों की गुज़ारिश भी थीसाँप भी घर में पाला गयाहै प...