ब्लॉगसेतु

Yashoda Agrawal
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ज़ुल्म पर जब शबाब आएगादेखना इंक़लाब आएगाउसकी ज़िद है तो टूट जाने देकल कोई और ख़्वाब आएगामौत! डर इसलिए भी लगता हैउम्र भर का हिसाब आएगाइन अंधेरे को कौन समझाएसुबह फिर आफ़ताब आएगाफ़स्ल काँटों की पहले आती हैतब कहीं इक गुलाब आएगा-सचिन अग्रवालनए मरासिम से
Sanjay  Grover
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(पिछला हिस्सा यहां पढ़ें)बात तो दिलचस्प है। ‘ईश्वर जब हमें पिता बनने के लिए चुनते हैं तो हमारे लिए बड़ी इज़्ज़त की बात होती है’, करन जौहर से लगभग यही तो कहा शाहरुख ने।यह एक महत्वपूर्ण तथ्य है कि ‘भगवान’ के प्रचार-प्रसार और ‘मेंटेनेंस’ में हिंदी फ़िल्मों की बहुत बड़...
Sanjay  Grover
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यूं तो इससे पहले कुछ पैंडिंग/लंबित पड़े लेख/मामले निपटाने का इरादा था मगर चैनल बदलते-बदलते कुछ ऐसा दिख गया कि जो लिखना था लिख गया।( ‘‘कुछ ऐसा दिख गया कि जो लिखना था लिख गया’’ वाक्य के कोई ख़ास मायने नहीं हैं, बस फ़िल्मी क़िस्म का डायलॉग ही है)बात हो रही थी शब्दों की त...
sanjiv verma salil
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पुस्तक चर्चा-'सच कहूँ तो' नवगीतों की अनूठी भाव भंगिमाआचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'*[पुस्तक विवरण- सच कहूँ तो, नवगीत संग्रह, निर्मल शुक्ल, प्रथम संस्करण २०१६, आकार २१.५ से.मी. x १४.५ से.मी., आवरण बहुरंगी, पेपरबैक जैकेट सहित, पृष्ठ ९६, मूल्य २५०/-, उत्तरायण प्रकाशन, के ३...
Bharat Tiwari
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छोटी कहानी में 'बड़े' मानवीय रिश्तों और मूल्यों को आधुनिक-आवश्यक-सामाजिक बदलावों की महत्ता दिखाते हुए कह पाना और साथ में कहानीपन का बने रहना, 'बड़ी' बात है! कहानीकार डॉ सच्चिदानंद जोशीजी को हार्दिक बधाई — भरत तिवारी (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).p...
sanjiv verma salil
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लघु कथा:सच्चा उत्सव *उपहार तथा शुभकामना देकर स्वरुचि भोज में पहुँचा, हाथों में थमी प्लेटों में कहीं मुरब्बा दही-बड़े से गले मिल रहा था, कहीं रोटी पापड़ के गाल पर दाल मल रही थी, कहीं भटा भिन्डी से नैन मटक्का कर रहा था और कहीं इडली-सांभर को गुत्थमगुत्था देखकर डोसा...
ANITA LAGURI (ANU)
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तुम कवि हो ना,शब्दों  को आकारदेते हो,मैं  एक कड़वा  सच  हूँ सच को नंगा करना मेरी  आत्मसंतुष्टि  है ।तुम्हारे  विचारों के प्रबल वेग का कोई छोर नहीं ।और मैं ...... गंतव्य का भटका राही,तलाश-ए- मंज़िल ...
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )  संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश
विजय राजबली माथुर
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Er S D Ojha2 hrs (27-10-2017)एक नारीवादी लेखिका का सच ।मशहूर लेखिका मैत्रेयी पुष्पा का छठ ब्रती महिलाओं पर कसा तंज उन पर हीं भारी पड़ गया । उन्होंने लिखा था -"छठ के त्यौहार में बिहार वासिनी स्त्रियां मांग माथे के अलावा नाक पर भी सिंदूर पोत रचा लेती हैं । कोई खा...
kumarendra singh sengar
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रोडवेज बस से कालपी अपने चाचा-चाची के पास जाना हो रहा था. बरसात का मौसम था. तब पानी भी आज के जैसे छिटपुट नहीं बल्कि खूब जमकर बरसता था. इधर बस ने उरई छोड़ा ही है कि बादलों ने अपनी छटा बिखेरी. खूब झमाझम पानी. बस की खिड़कियाँ बंद कर दी गईं. तेज बारिश के चलते कुछ बूँदें अ...