ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
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श्री सलिल जी  एक प्रकाश पुंजहृदय हुआ गद् गद् अनुज सुन कर शुभ सम्वाद।शीर्ष हुआ उन्नत अधिक प्रभु की कृपा प्रसाद।हिन्दी के उत्थान में अमर रहेगा नाम।भाषा के विज्ञान में की सेवा निष्काम।।डॉ. सतीश सक्सेना 'शून्य'ग्वालियर  *संजीव वर्मा "सलिल"* एक ऐसा नाम जि...
सतीश सक्सेना
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जयकार में उठी कलम,क्या ख़ाक लिखेगीअभिव्यक्ति को वतन में,खतरनाक लिखेगी !अवसाद में निराश कलम , ज्ञान लिखेगी ?मुंह खोल जो कह न सके,चर्वाक लिखेगी ?जिसने किया बरवाद , वे बाहर के नहीं थे !तकलीफ ए क़ौम को भी इत्तिफ़ाक़ लिखेगी !किसने दिया था दर्द, वह बतला न सकेगी !कुछ चाहतें द...
Yashoda Agrawal
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प्रश्न चिन्हों की नदी में डूबता मैं जा रहा,सब चले पतवार लेकर, मैं भँवर में नहा रहा।है ये हिम्मत या हिमाक़त, वक़्त ही बताएगा,अपनी धुन हम ख़ुद रटेंगे, या ज़माना गायेगा।सब चले पक्की सड़क पर, पगडण्डी मैं बना रहा,प्रश्न चिन्हों की नदी में डूबता...
शिवम् मिश्रा
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"राजनीति का सीधा सरल अर्थ था, प्रजा के हित में राज्य को चलाने की वह नीति, जो साम दाम दंड भेद के साथ वह करे, जो राज्य को, देश को सुदृढ बनाये । पर इतिहास हो या वर्तमान राजनीति हो गई मात्र एक कुर्सी, जिस पर बैठकर पंच परमेश्वर जैसी बात को पैरों के नीचे रौंदकर अट्टाहास...
सतीश सक्सेना
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अंततः इंतज़ार समाप्त हुआ , विधि, गौरव की पुत्री मिट्ठी ने, आज (3April) म्युनिक, जर्मनी में जन्म लिया और मुझे बाबा कहने वाली इस संसार में आ गयी !मिट्ठी का स्वागत है अपने घर में , ढेरों प्यार से !गुलमोहर ने भी बरसाए लाखों फूल गुलाल के !नन्हें क़दमों की आहट से,दर्द न जा...
Yashoda Agrawal
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हम तो केवल हँसना चाहें सबको ही, अपनाना चाहेंमुट्ठी भर जीवन पाए हैंहँसकर इसे बिताना चाहेंखंड खंड संसार बंटा है, सबके अपने अपने गीत।देश नियम,निषेध बंधन में, क्यों बाँधा जाए संगीत।नदियाँ, झीलें, जंगल,पर्वतहमने लड़कर बाँट लिए।पैर जहाँ पड़ गए हमारे ,टुकड़े, टुकड़े...
सतीश सक्सेना
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खांसते दम ,फूलता है जैसे लगती जान जाए अस्थमा झकझोरता है, रात भर हम सो न पाएधुआं पहले खूब था अब  यह धुआं गन्दी हवा में समय से पहले ही मारें,चला दम घोटू पटाखे ,राम के आने पे कितने दीप आँखों में जले,अब लिखते आँखें जल रही हैं ,जा...
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )  संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश
सतीश सक्सेना
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विश्व में हमारे अलावा अन्य कितने ही जीव हैं , जो हमारी तरह सांस लेते हैं, सोते हैं, जागते हैं, भोजन करते हैं , बात करते हैं, चलते हैं,उड़ते हैं मगर बहुत कम इंसान हैं जो अपने पूरे जीवन में कभी अन्य जीवों के बारे में  सोंचते भी हैं और निश्चित ही यह कमी मानव जीवन...
सतीश सक्सेना
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अकेले लॉन्ग रन पर जाने में , मन बहुत व्यवधान पैदा करता है ! कल सुबह बेमन घर से निकला कि 10 km दौड़ना है अन्यथा Millennium City Marathon - 4th Edition 2nd Dec 2018​ जिसमें कई अंडर ब्रिज की चढ़ाइयाँ पार करते हुए 21 km दौड़ना इतना आसान नहीं होगा ! पहले दो सौ मीटर दौड़ने म...