ब्लॉगसेतु

विजय राजबली माथुर
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Hemant Kumar Jha12 -08-2018  · जिन संस्थाओं पर देश को नाज था उनकी दीवारें दरक रही हैं। इनसे जुड़े लोग आशंकित और आंदोलित हैं। बदलती अवधारणाओं के इस दौर में संरचनाएं पुनर्परिभाषित हो रही हैं और संस्थाओं से जुड़ी जन आस्थाओं का कोई मूल्य नहीं रह गया है।रेल...
Bharat Tiwari
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अरे आप समझ नहीं रहे हैं… ये कितना महत्वपूर्ण मुद्दा है. आप संपादक हैं आप ही निर्णय लें, देश के लिए क्या ज़रूरी है ये तो समझें. आप देशहित को ध्यान में नहीं रखते. देखिये, वक़्त बदल रहा है, अब पुरानी समझ का कोई म...
विजय राजबली माथुर
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इस नए आपातकाल का अभी नामकरण किया जाना शेष हैडा. गिरीश आपातकाल और उसकी ज्यादतियां इतिहास की वस्तु बन गयी हैं. संघ, उसके पिट्ठू संगठनों, भाजपा और उनकी सरकार ने विपर्यय की आवाज को कुचलने की जो पध्दति गड़ी है इतिहास को अभी उसका नामकरण करना शेष है. फासीवाद, नाजीवाद, अधिन...
Bharat Tiwari
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तारीखी तस्वीर — मुकेश भारद्वाजआमार शोनार बांग्ला,आमि तोमाए भालोबाशी.(मेरा सोने जैसा बंगाल / मैं तुमसे प्यार करता हूं)...रवींद्रनाथ टैगोर ने 1905 में यह गीत लिखा था जब अंग्रेजों ने मजहब के आधार पर बंगाल के दो टुकड़े कर दिए थे। गुरुदेव का लिखा यह गीत उस बांग्लाद...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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लोकतंत्र का एक खम्भा कहलाती न्याय-व्यवस्था, न्याय-तंत्र ही माँगे न्याय    आयी कैसी जटिल अवस्था।    इंसाफ़ के लिए वर्षों से लाचार जनता तड़पती देखो,  वर्चस्व के लिए अब आपस में&nbs...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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सरकारी फ़ाइल में रहती है एक रेखा जिनके बीच खींची गयी है क्या आपने देखा ..?सम्वेदनाविहीन सत्ता के केंद्र को अपनी आवाज़ सुनाने चलते हैं  पैदल किसान 180 किलोमीटरचलते-चलते घिस जाती है चप्पल डामर की सड़क बन जाती है हीटर। सत्ता के गलि...
Bhavna  Pathak
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       शिवजी की बारात जब नगर के पास पहुंची तो बारात की अगवानी करने सजधज कर आए लोग पहले देवताओं के दल को देखकर बहुत खुश हुए लेकिन जब उनकी नजर दूल्हे के साथ चल रहे नाचते गाते उनके गणों पर पड़ी तो उनके होश उड़ गए। बच्चा पार्टी तो सिर पर पैर रख कर भ...
विजय राजबली माथुर
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जो पार्टियाँ या कार्यकर्ता यह मानते हैं कि उनकी पार्टी को सत्ता प्राप्त करना है चाहे वह बुलेट से चाहते हों या बैलॉट से, वह क्रांतिकारी या मार्क्सवादी नहीं हो सकते हैं.Virendra KumarNovember 22 at 11:12am ·कम्युनिस्ट या सर्वहारा! : कम्युनिस्ट पार्टियाँ एवं...
विजय राजबली माथुर
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आजकल विभिन्न पत्र -पत्रिकाओं, फेसबुक, ब्लाग वगैरह पर कुछ महिला और कुछ पुरुष लेखकों द्वारा भी समाज के पितृ  सत्तात्मक होने व महिलाओं के दोयम दर्जे की बातें बहुतायत से देखने - पढ़ने को मिल जाती हैं। लेकिन ऐसा हुआ क्यों ? और कैसे ? इस पर कोई चर्चा नहीं मिलती है। अ...
विजय राजबली माथुर
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 ‘कलाकार’ अपने पेट की बजाए अपने ‘कलात्मक’ आलोक से आलौकित होते हैं !कलाकारों का अर्थ उपार्जन और जीविका-    मंजुल भारद्वाज (रंग चिन्तक)हर प्राणी को ब्रह्माण्ड में जीने के लिए ‘भोजन’ की आवश्यकता अनिवार्य है चाहे वो मिटटी हो , पानी हो ,वनस्पति , मांस य...