ब्लॉगसेतु

अनंत विजय
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स्वाधीनता आंदोलन में कई ऐसी सेनानी रही हैं जिन्होंने स्वतंत्रता के पहले भी और देश के स्वतंत्र होने के बाद भी अपने कार्यों से भारतीय समाज को प्रभावित किया। ऐसी ही एक सेनानी हैं रमादेवी चौधरी। रमादेवी ने किशोरावस्था में ही अपने पति के साथ देश की स्वाधीनता का स्वप्न द...
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--जो मेरे मन को भायेगा,उस पर मैं कलम चलाऊँगा।दुर्गम-पथरीले पथ पर मैं,आगे को बढ़ता जाऊँगा।।--मैं कभी वक्र होकर घूमूँ,हो जाऊँ सरल-सपाट कहीं।मैं स्वतन्त्र हूँ, मैं स्वछन्द हूँ,मैं कोई चारण भाट नहीं।फरमाइश पर नहीं लिखूँगा,गीत न जबरन गाऊँगा।दुर्गम-पथरीले पथ पर मैं,...
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--वातावरण कितना विषैला हो गया है।मधुर केला भी कसैला हो गया है।।--लाज कैसे अब बचायेगी की अहिंसा,पल रही चारों तरफ है आज हिंसासत्य कहने में झमेला हो गया है।मधुर केला भी कसैला हो गया है।।--अब किताबों में सजे हैं ढाई आखर,सिर्फ कहने को बचे हैं नाम के घर,आदमी कितना अकेला...
sahitya shilpi
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किसान आंदोलन की आड में [आलेख] – डॉ. सत्यवान सौरभकिसान आंदोलन की आड़ में 26 जनवरी को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जो कुछ भी हुआ है उसे जायज नहीं करार दिया जा सकता है. कृषि कानूनों के विरोध में गणतंत्र दिवस के मौके पर किसानों का ट्रैक्टर मार्च  हिंसक हो गया. कई...
sahitya shilpi
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आज हमारे लिए बड़े सौभाग्य की बात है की हमें हर साल 26 जनवरी को गणतन्त्र  दिवस मनाने का मौका मिलता है| हर साल की तरह इस साल भी सभी को इस दिवस की बहुत बहुत शुभकामनाए व इस दिवस पर पेश है मेरे नई बाल कविता "मेरे सपनों का भारत "    मेरे सपनों...
sahitya shilpi
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आज के दौर में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच मीडिया के लिए विश्वसनियता की अहमियत पहले से ज्यादा बढ़ गई है। आज देश भर के चैनलों और अख़बारों में खबर जहां जल्दी पहुंचाने पर जोर है, वहीं समाचार में वस्‍तुनिष्‍ठता, निष्पक्षता और सटीकता बनाए रखना भी बेहद जरूरी है। इं...
ज्योति  देहलीवाल
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हिंदू धर्म में जब भी किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो उसके शव को स्मशान ले जाते वक्त सभी लोग 'राम नाम सत्य है' ऐसा बोलते है। सवाल ये उठते है कि हिंदुओं के बहुत सारे देवी-देवता होने के बावजुद सिर्फ़ राम का ही नाम क्यों लिया जाता है? यदि राम नाम सत्य है, तो असत्य क्...
sanjiv verma salil
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अभिनव प्रयोगनवान्वेषित सवैयासत्यमित्रानंद सवैया*विधान -गणसूत्र - य न त त र त र भ ल ग।पदभार - १२२ १११ २२१ २२१ २१२ २२१ २१२ २११ १२ ।यति - ७-६-६-७ ।*गए हो तुम नहीं, हो दिलों में बसे, गई है देह ही, रहोगे तुम सदा।तुम्हीं से मिल रही, है हमें प्रेरणा, रहेंगे मोह से, हमेशा...
sanjay krishna
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साप्ताहिक ‘महावीर’ का सत्याग्रह अंकबिहार से प्रकाशित साप्ताहिक ‘महावीर’ के बारे में कहीं कोई जानकारी नहीं मिलती है। इसका एक विशेषांक सत्याग्रह पर आया था। 21 जून, 1931 में यह अंक निकला था। इस अंक के बारे में संपादक ने लिखा है, ‘इन पंक्तियों में उन्हीं घटनाओं का संक्...
अनंत विजय
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किसे पता था कि 1945 में अपने मित्र डी के गुप्ता की प्रिटिंग प्रेस से विभूति भूषण बनर्जी के उपन्यास ‘पाथेर पांचाली’ के लिए इलस्ट्रेशन बनाने वाले सत्यजित रे ठीक दस साल बाद 1955 में इसी नाम से एक फिल्म बना डालेंगे। दरअसल सत्यजित रे उस परिवार से आते थे जिनका प्रिंटिंग...