ब्लॉगसेतु

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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ऑफिस से पाँच बजे फुर्सत मिल गयी तो मन हुआ कि शहर में घूमा जाये। सुबह दैनिक जागरण के स्थानीय पृष्ठ पर खबर थी कि पूरा शहर दुर्गामय हो गया है। श्रद्धालु मंदिरों में उमड़ रहे हैं। चौक स्थित प्राचीन दक्षिणमुखी दुर्गा मंदिर में सबसे ज्यादा भक्त दर्शन के लिए आ रहे हैं। आजम...
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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एक अंग्रेजी व्हाट्सएप सन्देश से प्रेरित ताज़ी रचना यही समय है आँखें खोलोजब इस दुनिया से चल दूंगा, तुम रोओगे नहीं सुनूंगा व्यर्थ तुम्हारे आँसू होंगे, तब उनको ना पोछ सकूंगा बेहतर है तुम अभी यहीं पर मेरी खातिर जी भर रो...
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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#साइकिल_से_सैरतीन-चार दिन लगातार बारिश होने के बाद कल धूप खिली तो बाहर सड़क पर आवाजाही बढ़ गयी। सुबह बिस्तर पर पड़ा-पड़ा पहले तो मैं आलस्य रस का भोग करता रहा लेकिन अचानक उठ बैठा। मानो मेरी साइकिल ने जोर से घंटी बजाकर जगा दिया हो। बरामदे में खड़ी साइकिल ने दिखाया कि आँगन...
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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‪#‎साइकिल_से_सैर‬इंदिरानगर मुंशीपुलिया के सेक्टर 16 के अपने अपार्टमेंट की छत से जब उत्तर की ओर देखता था तो कंक्रीट के जंगल के पीछे मीलों दूर प्राकृतिक हरियाली वाले असली जंगल की स्काइलाइन दिखायी देती थी। जब मेरी साइकिल कुछ दिनों के लिए लखनऊ पहुंची तो मैंने उस हरियाल...
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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#साइकिल_से_सैर, लखनऊ मेंपिछले शनिवार को बुद्ध पूर्णिमा और अगले दिन रविवार की छुट्टी तो थी ही, शुक्रवार को एनपीएस पर परिचर्चा के लिए मुख्यालय से सभी कोषाधिकारियों को बुलावा आ गया तो मुझे लगातार चार रातें और तीन दिन लखनऊ में गुजारने का मौका मिल गया। वृहस्पतिवार की शा...
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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शत्रुघ्न सिंह चौहान गुजरात राज्य सरकार के सिंचाई विभाग में नौकरी करते थे। उनकी 1976 में छंटनी हो गयी। फिर किसी सरकारी निगम में पुनः सेवायोजित होकर 1991 में सेवानिवृत्त हुए। सरकार इन्हें पेंशन मंजूर करती इसके पहले ही 08 अगस्त 1992 को मृत्यु हो गयी। उनकी विधवा पत्नी...
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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सूखती नदी पर पसरी हरियाली14 मई 2016 इब्राहिमपुर, रायबरेली ‪#‎साइकिल_से_सैर‬ आज साइकिल लेकर सीधे स्टेडियम पहुँचा जहाँ का तरणताल हाल ही में तैराकी के शौक़ीन शहरियों के लिए फिर से खोल दिया गया है। साइक्लिंग के साथ-साथ स्विमिंग का आनंद लेते हुए मुझे तीन दिन ह...
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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स्टेशन पहुँचने पर उसे पता चला कि आज राजधानी एक्सप्रेस दो घंटे विलम्ब से चलेगी। इसके रूट पर कोई मालगाड़ी डिरेल हो गयी थी। दिल्ली में एक ऑफ़िस से दूसरे ऑफ़िस का चक्कर लगाते हुए कब सुबह से शाम हो गयी इसका पता ही नहीं चला। दिन भर चिलचिलाती धूप और गर्मी में भटकना था इसल...
 पोस्ट लेवल : सत्यार्थमित्र कहानी
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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6 मई, 2016 शहीद स्मारक स्थल मुंशीगंज,रायबरेली ‪#‎साइकिल_से_सैर‬आज की सुबह का मौसम क्या मस्त था। आसमान में छुट्टा बादलों की आवाजाही और पुरवाई के वेग को रोकती-टोकती पछुवा हवा बारिश की संभावना बताती हुई भी सैर पर निकलने वालों को डरा नहीं रही थी। घर से बाहर निकल...
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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5 मई 2016 सीताराम पुर, रायबरेली ‪#‎साईकिल_से_सैर‬ आज सैर पर निकलने को हुए तो साइकिल ने टोका - रोज एक ही रस्ते जाने पर बोर नहीं होते? मैंने तड़ से उसका मूड ताड़ लिया और कानपुर जाने वाले हाइवे की ओर चल दिया। मेरे घर के पास रायबरेली से इलाहाबाद जाने वाली...