ब्लॉगसेतु

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--उतरी हरियाली उपवन में,आ गईं बहारें मधुवन में,गुलशन में कलियाँ चहक उठीं,पुष्पित बगिया भी महक उठी, अनुरक्त हुआ मन का आँगन।आया बसन्त, आया बसन्त।१।--कोयल ने गाया मधुर गान,चिड़ियों ने छाया नववितान,यौवन ने ली है अँगड़ाई,सूखी शाखा भी गदराई,बौराये आम, नीम-...
 पोस्ट लेवल : गीत आया बसन्त
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--भाव सुप्त अब हो गये, हुई शायरी बन्द।नहीं निकलते कलम से, नये-पुराने छन्द।। --अँधियारा छाने लगा, गया भास्कर डूब।लिखने-पढ़ने से गया, मेरा मन अब ऊब।।-- थकी हुई है लेखनी, सूखे कलम-दवात।वृद्धावस्था में नहीं, यौवन जैसी बात।।-- मंजिल से पहले ह...
 पोस्ट लेवल : कालातीत बसन्त दोहे
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तुलसी सूर-कबीर की, परम्परा है सुप्त।कविता के आकाश से, सन्त हो गये लुप्त।।--कविताओं का नाम है, लेकिन हैं आलेख।छन्द बन्द ताबूत में, ठुकी हुई गुलमेख।।--कविताओं का अब नहीं, रहा पुराना ढंग।छन्दबद्ध रचनाओं पर, लगा हुआ है जंग।।--बदल गयी है सभ्यता, बदल ग...
Ajay Singh
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संत श्री जलाराम बापा संत श्री जलाराम बापा एक हिन्दु संत थे । वे राम-भक्त थे । वे ‘बापा’ के नाम से प्रसिद्ध हैं । जलाराम बापा का जन्म सन्‌ 1799 (4 नवम्बर 1799 विक्रम सम्वत 1856, वीरपुर-(खेरडी राज्य) में गुजरात के राजकोट जिले के वीरपुर गाँव में हुआ था ।...
 पोस्ट लेवल : ऋषि-साधु-सन्त-कवि
Vikram Pratap Singh Sachan
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पेट्रोल मूतते माननीय, मैं और आप दयनीय जब कल माननीयो में जूतमपैजार हो चुकी थी। माने जैसा मीडिया लिखता था।सांसद त्रिपाठी जी जब विधायक बघेल साहब की पूजा चरण पादुकाओ से कर चुके थे। वासेपर वाले फैज़ल खान से भी ज़्यादा अलंकृत गालियाँ बक चुके थे।तब मैं गुरुग्राम में...
जेन्नी  शबनम
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बसन्त   *******   मेरा जीवन मेरा बंधु   फिर भी निभ नहीं पाता बंधुत्व   किसकी चाकरी करता नित दिन   छुट गया मेरा निजत्व   आस उल्लास दोनों बिछुड़े   हाय ! जीवन का ये कैसा बसंत ! - जेन्नी शबनम (...
 पोस्ट लेवल : बसन्त ऋतु क्षणिका
सुबोध  श्रीवास्तव
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चित्र गूगल सर्च इंजन से साभारमौसम भी वाचाल हो रहा..(गीत)मौसम भी वाचाल हो रहा,आओ, कुछ बतिया लें !आया है वसन्त बाग़ों में, मुसकातीं कलियाँ लाखों में,हर दिशि में सौरभ बिखरा है,धरती पर अनंग उतरा है,भौरे भी अलमस्त गा रहे,कुछ मस्ती हथिया लें ।गेहूँ पर कैशौर्य छा गया,...
 पोस्ट लेवल : वसन्त
अरुण कुमार निगम
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हे कॉपी-पेस्ट सन्त !!! हे आधुनिक जगत के अवैतनिक दूत !!!  आपका समर्पण स्तुत्य है। सूर्योदय काल से रात्रि नीम विश्राम बेला तक आपका परोपकारी व्यक्तित्व, पराई पोस्ट को कॉपी-पेस्ट करते नहीं थकता। इस व्यस्तता में आप स्वयं सृजन शून्य हो जाते हैं। शून्य ही तो सम्पूर्ण...
वंदना अवस्थी दुबे
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वैसे तो महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला" का जन्म 21 फरवरी को 1896 में पश्चिमी बंगाल के मेदिनीपुर जिले के महिषादल नामक देशी राज्य में हुआ था, लेकिन उस दिन वसंतपंचमी थी. माँ सरस्वती ने प्रकृति का कैसा अनुपम उपहार दिया साहित्य-जगत को. वसंत पंचमी के अवसर पर निराला जी...
 पोस्ट लेवल : वसन्त पंचमी
Roli Dixit
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माँ शारदे! स्नेह से तार दे   मेरी कलम में वो   &...